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अमेरिका में फुटबॉल गेम देखते दक्षिण एशियाई छात्रों की तस्वीर पर क्यों मचा बवाल?

पहले डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने नस्लभेदी पोस्ट किया था और अब उनकी पार्टी के एक उम्मीदवार ने सीमा लांघ दी है. पढ़िए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बो फ्रेंच ने क्या पोस्ट किया और उसका विरोध क्यों हो रहा है.

अमेरिका में फुटबॉल गेम देखते दक्षिण एशियाई छात्रों की तस्वीर पर क्यों मचा बवाल?
अमेरिका में ट्रंप की पार्टी के उम्मीदवार ने फुटबॉल गेम देखते दक्षिण एशियाई छात्रों की तस्वीर पोस्ट कर विवादित टिप्पणी की
  • US में रिपब्लिकन नेता बो फ्रेंच ने दक्षिण एशियाई छात्रों की तस्वीर शेयर कर विदेशी होने का विवादित आरोप लगाया
  • नफरती दावे से इतर टेक्सास यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय छात्र कुल छात्रों के 10% से भी कम हैं
  • रिपब्लिकन सांसद जॉन कॉर्निन सहित कई नेताओं ने बो फ्रेंच की पोस्ट को नस्लवादी बताते हुए निंदा की

अमेरिका में न डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की नस्लीय सोच सुधर रही है, न उनकी पार्टी के नेता नस्लीय पोस्ट करने से परहेज कर रहे हैं. पहले डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने 'मिस्टर सिंह अमेरिकी की सड़कों से हटो' वाला नस्लभेदी पोस्ट करके विवाद खड़ा किया था. अब रिपब्लिकन पार्टी के एक नेता ने टेक्सास में फुटबॉल मैच में जीत का जश्न मना रहे दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों को 'समस्या' बता दिया है. उनके इस पोस्ट के पीछे की सोच इस हद तक आपत्तिजनक थी कि डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने भी इस टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे ‘‘नस्लवादी'' करार दिया है.

बो फ्रेंच ने क्या पोस्ट किया?

‘टेक्सास रेलरोड कमिश्नर' पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बो फ्रेंच ने एक फुटबॉल मैच की जीत का जश्न मनाते हुए दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों की एक फोटो शेयर की. इसके साथ उन्होंने लिखा कि यह दृश्य दिखाता है कि ‘‘विदेशियों ने कितने अमेरिकियों की जगह ले ली है.''

फ्रेंच इससे पहले 10 करोड़ प्रवासियों को देश से निर्वासित करने की मांग भी कर चुके हैं.

फ्रेंच ने उसी तस्वीर को शोयर करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘‘मैंने सुना था कि इस साल टेक्सास यूनिवर्सिटी (UT) का दीक्षांत समारोह ऐसा ही दिख रहा था. मुझे विश्वास नहीं हुआ था. अब स्पष्ट है कि समस्या किसी की कल्पना से भी कहीं अधिक गंभीर है.''

सच्चाई क्या है?

18 सितंबर 2025 को टेक्सास यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी के कुल छात्रों में से 80.5% छात्र टेक्सास के ही रहने वाले हैं. 10.2% छात्र अमेरिका के ही हैं लेकिन टेक्सास के बाहर से हैं. यानी ये छात्र अमेरिका के 48 अन्य राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया से आए हैं. इसके अलावा 5,140 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं जो कुल छात्रों के केवल 9.3% है. 2025 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 1.7% कम था. 

अब ट्रंप की पार्टी के नेता की हो रही आलोचना

सांसद जॉन कॉर्निन ने इस पोस्ट को नस्लवादी बताते हुए इसकी निंदा की और रिपब्लिकन पार्टी के अन्य नेताओं से भी इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की. रिपब्लिकन पार्टी के नेता कॉर्निन ने सोशल मीडिया मंच ‘X' पर लिखा, ‘‘यह राज्य के एक पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं.''

अमेरिकी सीनेट में ‘इंडिया कॉकस' के सह-अध्यक्ष कॉर्निन ने कहा, ‘‘क्या रिपब्लिकन पार्टी के अन्य निर्वाचित पदाधिकारी इस असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे या इसे सामान्य बनते हुए देखकर भी आंखें फेर लेंगे? महान राजनीतिक दल इसी तरह खुद को बर्बाद कर लेते हैं. दुखद है.''

चार बार के सांसद कॉर्निन इस साल सीनेट का प्राइमरी चुनाव टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन से हार गए थे. पैक्सटन के खिलाफ सीनेट चुनाव लड़ रहे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलारिको ने कहा, ‘‘आपके नेतृत्व के लिए धन्यवाद जॉन कॉर्निन. टेक्सास में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है. केन पैक्सटन, क्या आप इस खुले नस्लवाद की निंदा करेंगे या चरमपंथियों के सामने झुक जाएंगे?''

टेक्सास प्रतिनिधि सभा के कई रिपब्लिकन सदस्यों ने भी फ्रेंच की आलोचना की और उनसे पोस्ट हटाने को कहा, टेक्सास में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सदस्य लेसी हल ने ‘X' पर कहा, ‘‘कृपया इसे हटा दें. इस पोस्ट से मेरा दिल दुखा है. मुझे तो कॉलेज के छात्र अपनी फुटबॉल टीम का उत्साह बढ़ाते दिख रहे हैं. मुझे टेक्सास के लोग दिख रहे हैं.'' राज्य के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के एक अन्य सदस्य जेरेड पैटरसन ने भी पोस्ट को ‘‘नस्लवादी'' बताया और कहा कि इसमें छात्रों की नस्ल या जातीयता के आधार पर उन्हें नीचा दिखाया गया है.

बता दें कि टेक्सास में अनुमानित 19 लाख एशियाई अमेरिकी रहते हैं, जिनमें 4.5 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी हैं. कई भारतीय-अमेरिकी अधिकार समूहों ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की.

भारतीय-अमेरिका अधिकार समूहों ने क्या कहा?

‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन' ने X पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीयों और हिंदुओं के प्रति नफरत अपने चरम पर है. हमारे निर्वाचित नेताओं को ऐसी बयानबाजी की निंदा करनी चाहिए।. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एवं सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने फ्रेंच की पोस्ट को प्रवासियों के प्रति घृणा से भरा बताया. ‘इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल' ने X पर कहा, ‘‘हम टेक्सास यूनिवर्सिटी में अश्वेत छात्रों पर बो फ्रेंच के घृणित नस्लवादी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं.

आगे कहा गया, ‘‘उन्होंने अपने यूनिवर्सिटी की टीम का उत्साह बढ़ा रहे अश्वेतत छात्रों की तस्वीर देखी और तुरंत मान लिया कि वे विदेशी हैं. यही नस्लवाद है.''

हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने फ्रेंच का समर्थन भी किया और उनकी निंदा करने के लिए कॉर्निन की आलोचना की. रिपब्लिनक नेता मैट रिनाल्डी ने कॉर्निन और अन्य रिपब्लिकन नेताओं पर ‘‘सरकारी सहायता और सस्ते श्रम के लिए हमारे बच्चों के भविष्य को गिरवी रखने'' का आरोप लगाया.

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