- अमेरिका ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया है.
- 30 जुलाई के बाद यह अमेरिका का ईरान पर पहला बड़ा हमला है.
- कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐलान किया था कि हमला कभी भी हो सकता है.
अमेरिका और ईरान के बीच फिर तनाव शुरू हो गया है. रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया. अमेरिका ने दो रॉकेट लॉन्चर्स पर सीधा हमला किया. 30 जुलाई के बाद यह अमेरिका का ईरान पर पहला बड़ा हमला है. कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि ईरान के साथ युद्ध बंद नहीं हुआ. उन्होंने हमले की चेतावनी दी थी, जिसके बाद यह पहला बड़ा हमला है. अमेरिका का दावा है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें लॉन्च करने वाले थे. इसलिए यह कार्रवाई की गई है. वहीं अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है.
अमेरिका ने की हमले की पुष्टि
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना के अधिकारी ने बताया 'मैं पुष्टि कर सकता हूं कि आज अमेरिकी सेना ने लराक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों पर हमला किया, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सैनिकों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा गया था. बता दें कि लारक द्वीप होर्मुज द्वीप के दक्षिण और केशम द्वीप के पूर्व में स्थित है, यह राजधानी तेहरान से दक्षिण-पूर्व की ओर लगभग 1,100 किलोमीटर दूर है.
डोनाल्ड ट्रंप ने दी थी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते चेतावनी दी थी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में नई बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश करता है, तो वाशिंगटन उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. ऐसे में एक बार फिर से अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला बोला है. यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई द्वारा क्षेत्र के मुस्लिम-बहुल देशों से अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ एकजुट होने की अपील करने के कुछ घंटों बाद किया गया है.
ईरान बोला-हमले का जवाब दिया जाएगा
ईरान के सेमी-ऑफिशियल मीडिया ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि कई सैनिक और नागरिक मारे गए हैं. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने ड्रोन से हमला किया है. वहीं इस हमले के बाद ईरान ने भी अमेरिका पर पलटवार करने का ऐलान किया है.
मोजतबा खामेनेई ने दिया था संदेश
दरअसल, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने मुस्लिम-बहुल देशों से अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी. खामेनेई ने युद्ध शुरू होने के छह महीने बाद पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के अवसर पर यह लिखित संदेश जारी किया था. उन्होंने कहा 'इस्लामिक देशों की समस्याओं का समाधान एकजुटता, दोस्ती और अच्छाई के रास्ते पर सहयोग है. कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी पद पर हो, जो ऐसा कुछ भी करता है जिससे मुसलमानों के बीच बंटवारा हो और मुस्लिम समुदाय में संघर्ष पैदा हो चाहे जानबूझकर या अनजाने में उसने इस्लाम के दुश्मनों के मकसद को ही पूरा किया है. उन्होंने आगे कहा अपने असली दुश्मन को पहचानें, उसकी योजना को समझें और उसका सामना करें.
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