न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट' (Partners for Multilateralism Summit) में दुनिया के सामने मौजूद प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा हुई. इस दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यवस्था दबाव के दौर से गुजर रही है और ऐसी स्थिति में बहुपक्षवाद की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने कहा कि शांति, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, विकास वित्त और नई प्रौद्योगिकियों जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए देशों के बीच सहयोग और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं.
जयशंकर ने बहुपक्षवाद को बताया समय की जरूरत
समिट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत इस पहल का सह-प्रायोजक बनकर खुश है और इसके लिए उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि दुनिया लंबे समय से शक्ति संतुलन में बदलाव देख रही है, जो एक स्वाभाविक संरचनात्मक प्रक्रिया थी. लेकिन अब अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस स्थिति को अधिक जटिल बना दिया है. जयशंकर ने कहा कि यदि ऐसी परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं. इसलिए यह आवश्यक है कि बहुपक्षवाद इस समय मजबूती से अपनी भूमिका निभाए.
Addressed the inaugural ‘Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity (P4M) Summit' #UNGA81#UNHighLevelWeek pic.twitter.com/eCNJnRT8HS
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 21, 2026
शांति से लेकर जलवायु न्याय तक कई मुद्दे दांव पर
विदेश मंत्री ने कहा कि यह केवल नीतिगत बहस का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े वास्तविक मुद्दे पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं. उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, उभरती प्रौद्योगिकियां, विकास वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, आपदा प्रतिरोध क्षमता और महामारी की तैयारी जैसे सभी विषय सहयोग की सामूहिक इच्छा पर निर्भर करते हैं.
4F संकट पर भी जताई चिंता
जयशंकर ने कहा कि अब तक जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वे सामूहिक प्रयासों से ही संभव हुई हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्षों के बीच भी कुछ खास मुद्दों पर समाधान तलाशा जा सकता है. उन्होंने ईंधन (Fuel), खाद्य (Food), उर्वरक (Fertilizer) और वित्त (Finance) से जुड़े "4F संकट" का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनका कहना था कि जब नई क्षमताएं और नई चिंताएं सामने आती हैं, तब उनके लिए स्पष्ट ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की जरूरत होती है.
वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी
जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षवाद तभी प्रभावी हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए. उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद की वकालत और उसके व्यवहारिक अनुपालन दोनों को मजबूत करने की जरूरत है. इसके लिए सुधारित बहुपक्षवाद आवश्यक है. उनका मानना है कि अधिक भागीदारी वाली चर्चाएं और अधिक पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया समय की मांग हैं. इससे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में नई उम्मीद और विश्वास पैदा होगा.
एंटोनियो कोस्टा ने भी जताई चिंता
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि उन्हें इस पहले "पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म" सम्मेलन की सह-मेजबानी कर खुशी हो रही है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, भारत और केन्या जैसे विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश इसमें शामिल हैं, लेकिन सभी समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. कोस्टा ने कहा कि दुनिया इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है. संघर्ष बढ़ रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है.
किसी देश के लिए अकेले समाधान संभव नहीं
कोस्टा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, महामारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक असुरक्षा जैसी चुनौतियां इतनी बड़ी हैं कि कोई भी देश, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, अकेले उनका समाधान नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि अब टकराव को सहयोग में बदलने और आपसी सम्मान तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर एक वैश्विक नेटवर्क तैयार करने की जरूरत है.
तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर
यूरोपीय परिषद अध्यक्ष ने भविष्य के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं भी गिनाईं. उन्होंने कहा कि सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र चार्टर, शांतिपूर्ण विवाद समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसी संस्थाओं और नियमों की रक्षा करनी होगी. दूसरे, जलवायु वित्त, सतत विकास, महामारी तैयारी, आर्थिक मजबूती और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे वैश्विक मुद्दों पर ठोस प्रगति करनी होगी. तीसरे, वैश्विक संस्थाओं में ऐसे सुधार किए जाने चाहिए जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बना सकें.
संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर भी जोर
कोस्टा ने कहा कि 'पैक्ट फॉर द फ्यूचर', 'यूएन-80 पहल' और अन्य सुधार कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी, समन्वित और सक्षम बनाने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा लक्ष्य उन संबंधों को मजबूत करना है जो देशों को जोड़ते हैं, विश्वास बढ़ाते हैं और संवाद को गहरा बनाते हैं. समिट में नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बढ़ते वैश्विक तनाव और चुनौतियों के बीच बहुपक्षीय सहयोग ही दुनिया को स्थिरता और सामूहिक प्रगति की दिशा में आगे ले जा सकता है.
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