- भारत ने UN सुरक्षा परिषद में अफगानों की जबरन वापसी और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों पर चिंता जताई
- भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी नेटवर्क को पनाह देने वाली स्थितियों को खत्म करने की अपील की
- भारत ने 30 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी को सुरक्षित और सम्मानजनक न मानते हुए पुनर्वास में मदद की अपील की
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाखों अफगानों की जबरन वापसी और आतंकी संगठनों के सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा उठाया. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन हालात को खत्म करने की अपील की जो बॉर्डर पार आतंकी नेटवर्क को पनाह देते हैं. यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि,पार्वथनेनी हरीश ने वापसी करने वालों की मानवीय दुर्दशा पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि 30 लाख से ज्यादा लोगों की इस तरह जबरन वापसी गंभीर चिंता की बात है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हालात में बड़े स्तर पर मानवीय मदद और लोगों के बेहतर पुनर्वास की कोशिश की जानी चाहिए.उन्होंने सेक्रेटरी जनरल की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 2025 में 29 लाख अफगानों ने वापसी की. 22 अगस्त 2026 तक 11.5 लाख और लोगों ने अफगान वापसी की, जिनमें ज्यादातर की वापसी जबरदस्ती कराई गई थी.
“Draining this swamp… is important”: India on permissive environment that sheltered 9/11 masterminds & still protects LeT, JeM
— ANI Digital (@ani_digital) September 17, 2026
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जबरदस्ती वापसी न सुरक्षित, न सम्मानजनक
पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि 30 लाख से ज्यादा लोगों की इस तरह जबरदस्ती वापसी न तो सुरक्षित है और न ही सम्मानजनक. इस तरह वापस करने वालों के पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल होने के लिए इंटरनेशनल मदद मिलनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि ये घटना अगर दुनिया के किसी और हिस्से में हुई होती तो यूएन में इस पर हंगामा होता और बड़े स्तर पर मानवीय सहायता की तुरंत व्यवस्था की जाती. लेकिन अफगानों के मामले में ऐसा कुछ न किया जाना एक दुखद सच्चाई है.
उन्होंने इस बात को भी दोहराया कि ये वापसी अपनी मर्जी से और सुरक्षित रूप से सम्मान के साथ होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने भारत की तरफ से आवास, भोजन और जरूरी सामान भेजने के लिए यूएन और अफगान अधिकारियों के साथ अपने सहयोग का भी जिक्र किया. भारत ने हालही में अफगान शरणार्थी और पुनर्वास मंत्रालय को परिवारों के लिए टेंट भी गिफ्ट किए थे.
9/11 हमलों से मिले सबक पर जोर
भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी उपायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 9/11 हमलों से मिले सबक पर जोर देते हुए कहा कि अल-कायदा लीडरशिप दूरदराज के इलाकों में भी न्याय से बच नहीं सका. 9/11 के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद का मुकाबला करने के वैश्विक अभियान का समर्थन किया. लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अल-कायदा के आतंकी इको-सिस्टम ने अपने सहयोगियों के जरिए अफगानिस्तान से परे अपनी रणनीतिक पैठ बनाई थी.
9/11 हमलों की प्लानिंग करने वालों के हश्र का जिक्र
उन्होंने कहा कि अल-कायदा के जिन नेताओं ने इन 9/11 हमलों की प्लानिंग की और उन्हें एग्जीक्यूट किया, वे बच नहीं पाए. उन्होंने कहा कि इस साजिश को रचने वाले ओसामा बिन लादेन तो फंडिंग की गई. लेकिन उसे 'ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर' के तहत एक सुरक्षित किले के भीतर से भी खोजकर मार दिया गया. इसके साथ ही उन्होंने इस ऑपरेशन के मुख्य मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद, जो एक घर में छिपा था और हाइजैकर सेल को कोऑर्डिनेट करने वाले रम्जी बिन अल-शिभ और अल-कायदा के सीनियर ऑपरेटिव वलीद बिन अताश का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये लोग लंबे समय तक पकड़े जाने से बचते रहे. इंसानियत के ऐसे दरिंदों को फलने-फूलने का माहौल देने वाली इस गंदगी को खत्म करना जरूरी है.भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे पहानगारों की समस्या से निपटने के लिए एकजुट होने की अपील की.
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इनपुट- ANI
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