विज्ञापन

ईरान-अमेरिका में शांति समझौते पर नहीं बनी बात तो होर्मुज को लेकर UN टास्क फोर्स ने दी चेतावनी

मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सात दिनों में इस तंत्र को चालू कर सकता है अगर जलडमरूमध्य अभी भी खुल जाता है, तो सामान्य स्थिति बहाल होने में तीन से चार महीने लगेंगे. यह सिर्फ समय की बात है.

ईरान-अमेरिका में शांति समझौते पर नहीं बनी बात तो होर्मुज को लेकर UN टास्क फोर्स ने दी चेतावनी
होर्मुज में ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी पर यूएन टास्क फोर्स ने भूखमरी और कुपोषण की चेतावनी दी है.
  • होर्मुज जलडमरूमध्य से उर्वरकों की आवाजाही बंद होने के कारण विश्व में खाद्य संकट और कुपोषण की संभावना बढ़ गई है
  • अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण यह प्रमुख जलमार्ग फिलहाल बंद है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है
  • यदि जलडमरूमध्य खुलता है तो संयुक्त राष्ट्र सात दिनों में तंत्र चालू कर सकता है और संकट को कम किया जा सकता है

ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव का पाकिस्तान के माध्यम से ऐसा जवाब दिया कि ट्रंप को पसंद नहीं आया. उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका इसके लिए राजी नहीं हो सकता. साफ है कि अब कभी भी खाड़ी में बमों की बारिश हो सकती है. मगर ये सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है. पेट्रोल-डीजल की बात तो छोड़िए अनाज तक मिलना मुश्किल हो सकता है. आज संयुक्त राष्ट्र टास्क फोर्स के प्रमुख ने बताया कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से उर्वरकों (Fertilisers) की आवाजाही जल्द ही शुरू नहीं की गई तो करोड़ों लोग भुखमरी और कुपोषण का सामना कर सकते हैं. 

कहां है दिक्कत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने मार्च में इस कार्य बल का गठन किया था ताकि जलडमरूमध्य से उर्वरकों और अमोनिया, सल्फर और यूरिया जैसे संबंधित कच्चे माल के परिवहन की अनुमति देने के लिए एक तंत्र का नेतृत्व किया जा सके. अमेरिका और ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को फिलहाल बंद कर रखा है. यहां से दुनिया भर को सप्लाई होने वाले उर्वरकों का एक तिहाई हिस्सा आता-जाता था. अब दुनिया भर के किसानों के लिए महत्वपूर्ण व्यापार बाधित हो गया है. संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) के कार्यकारी निदेशक और टास्क फोर्स के प्रमुख जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा कई हफ्तों से संघर्षरत पक्षों को कुछ जहाजों को भी गुजरने की अनुमति देने के लिए मनाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्होंने इस तंत्र के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों का सहयोग जुटाने के लिए "100 से अधिक देशों के प्रमुखों" से मुलाकात की है.

Latest and Breaking News on NDTV

जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि कई देश इस योजना का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान, साथ ही खाड़ी देश (जो प्रमुख उर्वरक उत्पादक हैं) अभी तक पूरी तरह से सहमत नहीं हैं. हालांकि, अंतिम उम्मीद क्षेत्र में "स्थायी शांति" समझौते और जलडमरूमध्य से सभी वस्तुओं के लिए "स्वतंत्र नौवहन" की है, लेकिन मोरेरा दा सिल्वा ने कहा, "समस्या यह है कि बुवाई का मौसम इंतजार नहीं कर सकता," क्योंकि अफ्रीकी देशों में कुछ बुवाई का मौसम कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो रहा है. उन्होंने पेरिस में एएफपी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "हमारे पास एक बड़े मानवीय संकट को रोकने के लिए कुछ सप्ताह का समय है. हम एक ऐसे संकट के साक्षी बन सकते हैं, जो 4.5 करोड़ और लोगों को भुखमरी और कुपोषण की ओर धकेल देगा."

'राजनीतिक इच्छाशक्ति'

मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सात दिनों में इस तंत्र को चालू कर सकता है अगर जलडमरूमध्य अभी भी खुल जाता है, तो सामान्य स्थिति बहाल होने में तीन से चार महीने लगेंगे. यह सिर्फ समय की बात है. अगर हम जल्द ही संकट के मूल कारण को नहीं रोकते हैं, तो हमें मानवीय सहायता के माध्यम से इसके परिणामों से निपटना होगा. मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी तक बेतहाशा नहीं बढ़ी हैं, लेकिन उर्वरकों की लागत में "भारी वृद्धि" हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कृषि उत्पादकता में गिरावट आ सकती है और खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू सकती हैं. मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि जलडमरूमध्य से उर्वरक और संबंधित कच्चे माल से भरे प्रतिदिन औसतन केवल पांच जहाजों की आवाजाही से किसानों के लिए संकट को टाला जा सकता है. उन्होंने कहा कि कमी "राजनीतिक इच्छाशक्ति" की है. जो संभव है और जो करना अत्यंत आवश्यक है, उसे टालना ठीक नहीं है.

ये भी पढ़ें-

ईरान युद्ध के बीच कतर के पूर्व PM ने ग्रेटर इजरायल के मुकाबले में खाड़ी NATO बनाने के दिया सुझाव

यूरोप-रूस वार्ता के लिए पुतिन ने जिसे बताया 'अच्छा मध्यस्थ' वो यूरोपीय संघ को कुबूल नहीं, गिनाए कारण

इराक को पता ही नहीं था कि उसके रेगिस्तान में एक इजरायली सैन्य अड्डा है, जानिए फिर क्या हुआ

क्या ईरान के खिलाफ ट्रंप का युद्ध अमेरिकी वर्चस्व का अंत? एक्सपर्ट क्यों उठा रहे ऐसे सवाल

अमेरिका के शांति प्रस्ताव का ईरान ने जवाब भेजा, राष्ट्रपति ने संकेतों में बता दी बात

ऑपरेशन सिंदूर को याद कर पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने किए बड़े-बड़े दावे, भारत को दी धमकी

लेखक के बारे में
img
विजय शंकर पांडेय
चीफ सब एडिटर
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
UN Task Force Warning, Iran-US Peace Deal Fails, Hormuz Blockade Impact, Hormuz Blockade Crisis, Strait Of Hormuz News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com