- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर 9 आतंकियों को गिरफ्तार किया है
- मुन्ना झिंगाड़ा पाकिस्तान में बैठकर ISI के इशारे पर भारत में आतंकी नेटवर्क संचालित कर रहा है
- मुन्ना झिंगाड़ा का असली नाम सैयद मुज्जकिर है और वह मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का निवासी है
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हाल ही में भंडाफोड़ किए गए ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल की जांच में एक ऐसा नाम सामने आया है, जो कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में खौफ का पर्याय माना जाता था. यह नाम है मुन्ना झिंगाड़ा का. वही मुन्ना झिंगाड़ा, जिसने साल 2000 में बैंकॉक की अदालत ले जाते समय NDTV के कैमरे पर खुलेआम धमकी दी थी- 'हमको शकील बॉस ने भेजा है, 2 महीने में छोटा राजन को फिर मारेंगे.'
करीब 26 साल बाद यही मुन्ना झिंगाड़ा एक बार फिर चर्चा में है. इस बार आरोप है कि वह पाकिस्तान में बैठकर ISI के इशारे पर भारत में आतंकी नेटवर्क संचालित कर रहा है और दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए मॉड्यूल के प्रमुख हैंडलर्स का आका है.
#NDTVExclusive: जो पाकिस्तान से दिल्ली के ISI मॉड्यूल को दे रहा हुक्म, उसने कभी NDTV के कैमरे पर दी थी ये धमकी : Exclusive#Pakistan | #ISI pic.twitter.com/i51GcPZaNb
— NDTV India (@ndtvindia) May 31, 2026
दिल्ली मॉड्यूल की जांच में सामने आया नाम
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में ISI से जुड़े एक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक इस मॉड्यूल को पाकिस्तान से चार प्रमुख हैंडलर निर्देश दे रहे थे- मुन्ना झिंगाड़ा, दिलावर खान, शहजाद भट्टी और आमिर जट्ट.
सूत्रों के अनुसार, ये नेटवर्क दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े शहरों में हमलों की साजिश रच रहा था. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अंडरवर्ल्ड और आतंकी संगठनों से जुड़े संबंधों की पड़ताल कर रही हैं.
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कौन है मुन्ना झिंगाड़ा?
मुन्ना झिंगाड़ा का असली नाम सैयद मुज्जकिर (या सैयद मुदस्सर हुसैन) बताया जाता है. मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में रहने वाला यह युवक कभी सामान्य जिंदगी जीना चाहता था, लेकिन एक स्थानीय दुश्मनी ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया.
फरवरी 1990 में इलाके के दबंग वज़ीर की हत्या के बाद उसका नाम पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में आया. जेल से बाहर आने के बाद उसने सामान्य जीवन की कोशिश की, लेकिन दुश्मनी बढ़ती गई और 1995 में वज़ीर के भाई की हत्या के बाद वह स्थायी रूप से अपराध जगत में चला गया. आर्थर रोड जेल में उसकी मुलाकात डी-कंपनी के कुख्यात सदस्य इस्माइल मलबारी से हुई. यहीं से उसकी पहचान छोटा शकील से हुई और वह दाऊद इब्राहिम के गैंग का हिस्सा बन गया.

दाऊद का भरोसेमंद शूटर
मुन्ना झिंगाड़ा जल्द ही डी-कंपनी का भरोसेमंद शार्प शूटर बन गया. उस पर हत्या, रंगदारी, गैंगवार और आपराधिक साजिशों सहित 70 से अधिक मामलों में संलिप्त होने के आरोप लगे. बताया जाता है कि दाऊद इब्राहिम को उसकी निशानेबाजी पर इतना भरोसा था कि गैंग के सबसे संवेदनशील मिशनों में उसे ही भेजा जाता था.
‘मिशन बैंकॉक' और छोटा राजन पर हमला
1994 में दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के बीच अलगाव के बाद दोनों गैंगों के बीच खूनी संघर्ष शुरू हो गया. इसी संघर्ष के तहत डी-कंपनी ने वर्ष 2000 में 'मिशन बैंकॉक' शुरू किया. 15 सितंबर 2000 को बैंकॉक में छोटा राजन के ठिकाने पर हमला किया गया. आरोप है कि मुन्ना झिंगाड़ा फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए थाईलैंड पहुंचा था. हमले में छोटा राजन घायल हो गया, जबकि उसका करीबी सहयोगी रोहित वर्मा मारा गया.
हमले के कुछ ही घंटों बाद थाई पुलिस ने मुन्ना झिंगाड़ा को गिरफ्तार कर लिया.
NDTV के कैमरे पर दी थी धमकी
गिरफ्तारी के बाद जब बैंकॉक पुलिस उसे अदालत में पेश करने ले जा रही थी, तब उसने मीडिया के सामने खुलेआम कहा था- 'हमको शकील बॉस ने भेजा है. दो महीने में छोटा राजन को फिर मारेंगे.' उस समय यह बयान अंडरवर्ल्ड की दुनिया में बड़ी खबर बना था. यह पहली बार था जब डी-कंपनी का कोई शूटर कैमरे पर मिशन की जिम्मेदारी स्वीकार करता दिखाई दिया था.
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