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ईरान युद्ध के बीच कतर के पूर्व PM ने ग्रेटर इजरायल के मुकाबले में खाड़ी NATO बनाने के दिया सुझाव

शेख हमद ने स्वीकार किया कि अमेरिकी ठिकानों ने दशकों से महत्वपूर्ण निवारक की भूमिका निभाई है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि एशिया की ओर वाशिंगटन के रणनीतिक बदलाव और चीन को नियंत्रित करने का मतलब है कि खाड़ी देश अब अनिश्चित काल तक अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर नहीं रह सकते.

ईरान युद्ध के बीच कतर के पूर्व PM ने ग्रेटर इजरायल के मुकाबले में खाड़ी NATO बनाने के दिया सुझाव
कतर के पूर्व प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख हमद बिन जसीम अल थानी ने साफ कहा कि खाड़ी में चल रहे युद्ध से सबसे ज्यादा फायदा ईरान और इजरायल को हो रहा है.
  • कतर के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान पर हमला अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय की योजना का परिणाम है
  • शेख हमद ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट को युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम बताते हुए ईरान के नियंत्रण की चेतावनी दी
  • शेख हमद ने खाड़ी देशों के बीच खाड़ी नाटो के गठन का प्रस्ताव देकर आंतरिक फूट को खतरा बताया
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ईरान युद्ध ने पूरी दुनिया को चिंतित ही नहीं बल्कि डरा दिया है. असमंजस ऐसी है कि सरकारें तो अलग आम आदमी भी डर में है कि कब कौन सी बुरी खबर आ जाए. दुनिया भर के नेता और एक्सपर्ट अपने-अपने अनुभव के आधार पर मौजूदा स्थिति और भविष्य में होने वाले प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं. इसी बीच कतर के पूर्व प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख हमद बिन जसीम अल थानी ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल का युद्ध अचानक नहीं हुआ, बल्कि मध्य पूर्व को हिंसक रूप से नया आकार देने के इजरायल के लंबे समय से किए प्लानिंग का नजीजा है. 

अल जजीरा के अल मुकाबला कार्यक्रम में एक इंटरव्यू में,  शेख हमद बिन ने क्षेत्र के तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात का स्पष्ट आकलन प्रस्तुत किया. उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट हालिया युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम है. उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की "ग्रेटर इजराइल" की महत्वाकांक्षाओं के प्रति आगाह किया और एक एकीकृत खाड़ी रक्षा समझौते की तत्काल स्थापना का आह्वान किया. शेख हमद ने कहा कि हम क्षेत्र के एक बड़े पुनर्गठन के साक्षी हैं. वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल आने वाले दशकों तक मध्य पूर्व के स्वरूप को निर्धारित करेगी.

नेतन्याहू का 'भ्रम' और अमेरिका की चूक

शेख हमद ने पिछले साल ही संभावित संघर्ष की चेतावनी दी थी और खाड़ी देशों से आग्रह किया था कि वे ईरान के साथ संकट का राजनयिक समाधान निकालें और सैन्य हमलों को रोकें. उन्होंने ईरान के साथ संघर्ष को बढ़ावा देने के प्रयासों की पहचान की और इसके लिए नेतन्याहू के नेतृत्व वाले इजरायल के एक "कट्टरपंथी गुट" को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू 1990 के दशक में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के प्रशासन के समय से ही तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका को युद्ध में घसीटने की कोशिश कर रहे थे. शेख हमद का तर्क था कि जहां पिछली अमेरिकी सरकारें (जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला कार्यकाल भी शामिल है) ईरान पर पूर्ण पैमाने पर युद्ध छेड़ने से हिचकिचाती रहीं, वहीं नेतन्याहू अंततः वाशिंगटन को एक "भ्रम" बेचकर सफल हो गए. उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को विश्वास दिला दिया कि युद्ध छोटा और त्वरित होगा और ईरानी शासन कुछ ही हफ्तों में गिर जाएगा. इसी भ्रम में अमेरिकी सरकार फंस गई, खासकर वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद.

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कतर के पूर्व प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन की सैन्य शक्ति पर निर्भरता की आलोचना करते हुए कहा, "अमेरिका की असली ताकत हमेशा से बल प्रयोग से बचने की क्षमता में रही है, न कि उसे इस्तेमाल करने में." उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध ने अंततः सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस आने के लिए मजबूर कर दिया है. उन्होंने याद दिलाया कि इस साल की शुरुआत में जिनेवा में दो सप्ताह की अतिरिक्त बातचीत युद्ध को टाल सकता था. मगर वार्ता के बीच में ही युद्ध छेड़ दिया गया. शेख हमद ने कहा कि नेतन्याहू इस युद्ध के प्राथमिक लाभार्थी के रूप में उभरे हैं, और कहा कि इजरायली नेता इस अराजकता का उपयोग जबरन क्षेत्रीय गठबंधनों और "ग्रेटर इजरायल" के अपने दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं. 

होर्मुज अब ईरान के कंट्रोल में

तेहरान की रणनीति का आकलन करते हुए शेख हमद ने कहा कि ईरान ने युद्ध के शुरुआती सैन्य हमलों को सफलतापूर्वक झेल लिया. फिर बाद में जब उसे होर्मुज जलडमरूमध्य के नए रणनीतिक लाभ का फायदा उठाने की अपनी क्षमता का एहसास होने लगा तो वो समझौते में देरी करने लगा. जलमार्ग के शस्त्रीकरण को युद्ध का "सबसे खतरनाक परिणाम" बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अब इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग को अपनी संप्रभुता का केंद्र मान रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि यह ईरानी परमाणु कार्यक्रम की तुलना में वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए कहीं अधिक तात्कालिक और गंभीर खतरा है.

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शेख हमद ने कहा कि इस संकट का खामियाजा वाशिंगटन के बजाय खाड़ी देशों को भुगतना पड़ा है. पूर्व प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों के ऊर्जा, औद्योगिक और नागरिक बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की आड़ बताया. उन्होंने यह भी कहा कि इन खाड़ी देशों ने स्पष्ट रूप से युद्ध का विरोध किया था. अब तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी अधिकांश राजनीतिक साख खो दी है. हालांकि, शेख हमद ने इस बात पर जोर दिया कि भौगोलिक स्थिति सह-अस्तित्व निर्धारित करती है और भविष्य के लिए एक यथार्थवादी ढांचा स्थापित करने के लिए तेहरान के साथ एक स्पष्ट, सामूहिक खाड़ी संवाद का आह्वान किया.

'खाड़ी नाटो' बनाने की अपील

अपने सबसे स्पष्ट आकलन में से एक में, शेख हमद ने घोषणा की कि खाड़ी के लिए सबसे बड़ा खतरा न तो ईरान, न इजरायल और न ही विदेशी सैन्य अड्डे हैं, बल्कि खाड़ी देशों की आंतरिक फूट है. इसका मुकाबला करने के लिए, उन्होंने एक "खाड़ी नाटो" के निर्माण का प्रस्ताव रखा, जो एक संयुक्त राजनीतिक और रक्षा परियोजना होगी. सऊदी अरब इसकी स्वाभाविक रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करेगा. उन्होंने तर्क दिया कि यूरोपीय संघ की शुरुआत कुछ ही राज्यों से हुई थी और बाद में इसका विस्तार हुआ, जो सभी सदस्यों द्वारा सम्मानित सख्त संस्थागत कानूनों द्वारा शासित एक समान मॉडल का सुझाव देता है.

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शेख हमद ने स्वीकार किया कि अमेरिकी ठिकानों ने दशकों से महत्वपूर्ण निवारक की भूमिका निभाई है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि एशिया की ओर वाशिंगटन के रणनीतिक बदलाव और चीन को नियंत्रित करने का मतलब है कि खाड़ी देश अब अनिश्चित काल तक अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर नहीं रह सकते. उन्होंने खाड़ी देशों से आग्रह किया कि वे तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र जैसी क्षेत्रीय शक्तियों के साथ दीर्घकालिक, हित-आधारित रणनीतिक साझेदारी विकसित करें.

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