संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया है. एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और प्रासंगिक प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए. इसमें कश्मीर भी शामिल है.
एर्दोगन के इस बयान ने एक बार फिर कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा छेड़ दी है, जबकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह उसका आंतरिक मामला है.
अपने संबोधन में एर्दोआन ने कहा, "दक्षिण एशिया में यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के ढांचे के भीतर संवाद के जरिए संबोधित किया जाए."
तुर्किये के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर अपने-अपने रुख में कोई बदलाव नहीं देखा गया है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कश्मीर का जिक्र किया हो.
Turkish President Erdogan:
— Clash Report (@clashreport) September 22, 2026
In South Asia, it is important that all disputes, including the Kashmir issue, be addressed through dialogue within the framework of the United Nations Charter and of relevant resolutions. pic.twitter.com/9eaE7wQxfH
पिछले साल भी कश्मीर को लेकर दिया था बयान
पिछले साल सितंबर में भी उन्होंने अपने UNGA संबोधन में कश्मीर मुद्दे के समाधान की बात कही थी. तब उन्होंने कहा था कि कश्मीर में रहने वाले लोगों के हित में इस मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर और बातचीत के जरिए निकलना चाहिए.
तुर्किये लंबे समय से कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के करीब रुख अपनाता रहा है. यही वजह है कि एर्दोगन समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय को उठाते रहे हैं. हालांकि भारत हर बार ऐसे बयानों का विरोध करता रहा है और स्पष्ट करता रहा है कि कश्मीर से जुड़ा मामला किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का विषय नहीं है.
भारत ने बता दिया था अपना स्टैंड
पिछले वर्ष एर्दोगन की टिप्पणी पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि कश्मीर पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है.
उन्होंने यह भी दोहराया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है. भारत का लगातार कहना रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इससे जुड़े सभी मुद्दों का समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर ही संभव है.
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