- इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने चुनाव से पहले तुर्की को नया राजनीतिक विरोधी और खतरा बताया है
- इजरायल के लड़ाकू विमानों ने सीरिया में तुर्की सीमा के पास एक सैन्य ठिकाने पर बमबारी की है
- तुर्की ने हमास का समर्थन किया है और गाजा युद्ध के दौरान इजरायल के खिलाफ कड़ी आलोचना की है
इजरायल में चुनाव होने जा रहे हैं और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है. उन्हें चुनाव में अपनी स्थिति मौजूद करने के लिए नए विलेन की जरूरत है और लगता है कि उन्होंने उसे खोज लिया है. दो साल से ज्यादा समय तक मिडिल ईस्ट में इजराइल के तमाम दुश्मनों के खिलाफ लगातार जंग करने के बाद अब नेतन्याहू की नजर एक और देश पर है- तुर्की. मंगलवार को इजराइल के लड़ाकू विमानों ने उत्तरी सीरिया में एक सैन्य ठिकाने पर बम गिराए. यह ठिकाना तुर्की की सीमा से थोड़ी ही दूरी पर है.
नेतन्याहू ने कहा कि तुर्की वहां अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाना चाहता था. उन्होंने कहा कि तुर्की ने इजराइल की चेतावनियों को नजरअंदाज किया, इसलिए हमने उन्हें यह बात और साफ तरीके से समझा दी. याद रहे कि 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले नेतन्याहू की चुनावी टीम ने कई 'दुश्मन' नेताओं की तस्वीरों वाले पोस्टर लगाए हैं. इनमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की तस्वीर भी शामिल है. पोस्टर पर लिखा है- “वे चाहते हैं कि नेतन्याहू चुनाव हार जाएं.”

चुनाव और नए दुश्मन की खोज!
7 अक्टूबर 2023 को हमास के अभूतपूर्व हमले के बाद गाजा में इजराइल के बड़े सैन्य अभियान को लेकर एर्दोगन लगातार इजराइल की कड़ी आलोचना करते रहे हैं. तुर्की से गाजा में मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं की नावों को इजराइल द्वारा रोकने की आक्रामक कार्रवाई के बाद दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए हैं. लेकिन ईरान जैसे दूसरे देशों के मुकाबले तुर्की के पास मजबूत सहयोगी हैं. तुर्की नाटो का सदस्य है. एर्दोगन के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी अच्छे रिश्ते हैं. तुर्की में मौजूद अमेरिकी राजदूत ने इजराइल के इन हमलों की आलोचना की है.
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के मध्य-वामपंथी विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के नेता याइर गोलान ने सीरिया में हुए हमले को “उकसाने वाला और खतरनाक” बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे “तुर्की के साथ टकराव का खतरा बढ़ता है और हमारे सहयोगियों, खासकर अमेरिका के साथ दूरी और बढ़ती है. गोलान ने कहा, “एक बार फिर राजनीतिक फायदे के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है और एक बार फिर इजराइल को सुरक्षा के मामले में इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.”
एर्दोगन को लेकर इजरायल में बढ़ता शक
एर्दोगन ने हमास के नेताओं को तुर्की में रहने की अनुमति दी है. इस वजह से इजरायल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के समर्थकों के अलावा भी उनके कई आलोचक हैं. मध्य-दक्षिणपंथी विपक्षी नेता और इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने इस साल की शुरुआत में नेतन्याहू पर आरोप लगाया था कि वह सिर्फ ईरान पर ध्यान देकर तुर्की से पैदा हो रहे नए खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार तेल अवीव स्थित इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज की सीनियर रिसर्चर गैलिया लिंडेनस्ट्रॉस ने कहा कि एर्दोगन की सख्त भाषा से इजरायल की चिंताएं कम नहीं हुई हैं. उन्होंने कहा, “यह चिंता भी है कि जिस तरह तुर्की हमास की मेजबानी करता है, उसी तरह वह सीरिया में भी ऐसे हथियारबंद समूहों को काम करने की अनुमति दे सकता है, जो भविष्य में इजराइल के लिए खतरा बन सकते हैं.”
वहीं वॉशिंगटन स्थित मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर एक्सपर्ट गोनुल टोल ने कहा कि नेतन्याहू को विपक्ष की ओर से इस आरोप का सामना करना पड़ रहा है कि वह अपने कई युद्धों के लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हैं. इनमें ईरान की इस्लामी सरकार को हटाना और हमास को खत्म करना जैसे लक्ष्य शामिल हैं. अमेरिका में एर्दोगन के कई आलोचक हैं, लेकिन टोल के मुताबिक तुर्की के खिलाफ कोई और सीधी सैन्य कार्रवाई नेतन्याहू को ऐसे “लापरवाह नेता” के रूप में दिखा सकती है, जो सत्ता में बने रहने के लिए कुछ भी कर सकता है.
(इनपुट- एएफपी)
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