- तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पाकिस्तान को सैन्य दबाव के खिलाफ कड़ा संदेश दिया
- अखुंदजादा ने कहा कि वे हवाई हमलों और तोपखाने की गोलीबारी से डरने वाले नहीं हैं और रुख में बदलाव नहीं होगा
- उन्होंने NATO जैसी महाशक्ति के खिलाफ जारी संघर्ष में सैन्य ताकतों से हार नहीं मानने का दावा किया
कंधार की ईदगाह मस्जिद की मीनार से तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने दुनिया और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है. पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अखुंदजादा ने साफ किया कि वे हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन ने NATO जैसी महाशक्ति को पीछे छोड़ दिया, उसे सैन्य ताकत से झुकाया नहीं जा सकता.
'तोपखाने-गोलीबारी से डरने वाले नहीं'
हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव पर बयान दिए. अखुंदजादा ने कहा कि वे हवाई हमलों या तोपखाने की गोलाबारी से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के दबाव से उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा. उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें सैन्य ताकत का डर होता, तो NATO और पश्चिमी ताकतों के साथ हुए युद्ध के दौरान ही वे हार चुके होते.
'जनता का सवाल पूछने का अधिकार'
अखुंदजादा ने सरकार की दिशा को लेकर लोगों की चिंताओं को भी स्वीकार किया और कहा कि लोगों को नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है. इसके अलावा, उन्होंने सामान की जमाखोरी करने वाले कारोबारियों की आलोचना की. उन्होंने इस काम को गुनाह बताया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए.
यह पहली बार है जब तालिबान के किसी नेता ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के साथ मौजूदा तनाव का जिक्र किया है. अखुंदजादा कंधार की मस्जिद की मीनार पर चढ़कर खुतबा देने के लिए सामने आए, जो उनके सार्वजनिक दिखने के दुर्लभ मौकों में से एक है.
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पाक ने अस्थाई रूप से रोके हमले
बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव तब चरम पर पहुंच गया. फरवरी में पाकिस्तान ने इसे खुली जंग करार करते हुए अपने हमले तेज कर दिए. यह टकराव तब और बढ़ गया जब 16 मार्च को काबुल में एक कथित पाकिस्तानी हवाई हमले में सैकड़ों लोग मारे गए. हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव और सऊदी अरब, कतर व तुर्की जैसे देशों की मध्यस्थता के बाद, पाकिस्तान ने ईद-उल-फितर के मौके पर 19 मार्च से 23 मार्च 2026 तक अपने सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला किया.
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