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तालिबान ने मासूम बच्चियों की जबरन शादी को बना दिया कानूनी, UN ने पूछा तो कहा- यह इस्लाम के अनुसार है

Taliban Rule in Afghanistan and Child Marriage: अफगानिस्तान में तालिबान का नया फरमान- अगर कोई लड़की अपने पति से तलाक मांगती है और पति इसे मानने से इनकार कर देता है, तो ऐसी स्थिति में पति की बात को सही माना जाएगा.

तालिबान ने मासूम बच्चियों की जबरन शादी को बना दिया कानूनी, UN ने पूछा तो कहा- यह इस्लाम के अनुसार है
Taliban Rule in Afghanistan and Child Marriage: तालिबान ने बालविवाह को बना दिया कानूनी

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने छोटी बच्चियों की जबरन शादी को भी कानूनी मान्यता देते हुए एक आदेश पास किया है, जिसकी पूरी दुनिया में थू-थू हो रही है. इस आदेश में ऐसी बातें शामिल हैं जिन्हें लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी गंभीर चिंता जताई है. अब तालिबान ने अफगानिस्तान में न सिर्फ बाल विवाह को कानूनी बना दिया है बल्कि पूरी व्यवस्था कर दी है ताकि इन मासूम बच्चियों की मर्जी न चले, उनके पिता और पति जो चाहें करें.  संयुक्त राष्ट्र ने अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के नए शादी संबंधी कानून पर “गंभीर चिंता” जताई है.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस कानून में बाल विवाह से जुड़े प्रावधान शामिल हैं और इससे महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव और मजबूत होगा. तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार तालिबानी सरकार ने कहा कि यह आदेश इस्लामी कानून के अनुसार है और देश में लड़कियों की जबरन शादी पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है.

आखिर कानून में ऐसा क्या है?

अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने पिछले हफ्ते डिक्री नंबर 18 जारी की थी. इसका नाम “पति-पत्नी के न्यायिक अलगाव” है. इसमें शादीशुदा कपल के अलग होने के नियम बताए गए हैं. सबसे विवादित नियमों में कहा गया है कि युवावस्था में पहुंची लड़की की चुप्पी को शादी के लिए उसकी मंजूरी माना जा सकता है.

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन यानी UNAMA ने बयान में कहा कि इस कानून में उन लड़कियों के तलाक का भी जिक्र है जो अब युवावस्था में पहुंच चुकी हैं और शादीशुदा हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि तालिबान ने बाल विवाह को कानूनी अनुमति दे दी है. UNAMA ने कहा कि यह कानून पूरी और स्वतंत्र सहमति के सिद्धांत को कमजोर करता है और बच्चों के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहता है.

इस तालिबानी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी पिता या दादा ने किसी नाबालिग लड़की या लड़के की शादी बिना दहेज, बहुत कम दहेज या गलत तरीके से की है, तो शादी को अमान्य घोषित किया जा सकता है. इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी लड़की की शादी उसके पिता या दादा ने ऐसे आदमी से कर दी हो जो उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता या अपने बुरे फैसलों के लिए बदनाम है, तो लड़की युवावस्था में पहुंचने के बाद अदालत जाकर शादी रद्द कराने की मांग कर सकती है.

हालांकि अगर कोई लड़की अपने पति से तलाक मांगती है और पति इसे मानने से इनकार कर देता है, तो नए कानून के मुताबिक ऐसी स्थिति में पति की बात को सही माना जाएगा, क्योंकि लड़की के पास गवाह नहीं होंगे. अगर लड़की जज के सामने यह मांग रखती है, तो उसे गवाहों की जरूरत नहीं होगी.

अफगानिस्तान में लड़कियों और महिलाओं की स्थिति

अफगानिस्तान में महिलाएं और लड़कियां पहले से ही बड़े स्तर पर भेदभाव का सामना कर रही हैं. वहां कानून तय करते हैं कि उन्हें कैसे कपड़े पहनने हैं और कैसे व्यवहार करना है. लड़कियों को स्कूल, कॉलेज और ज्यादातर नौकरियों से बैन किया गया है. उन्हें जिम, ब्यूटी सैलून और यहां तक कि सार्वजनिक पार्कों जैसी लगभग सभी मनोरंजन गतिविधियों से भी रोका गया है.

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