महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक बड़ा ट्विस्ट सामने आ रहा है. राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या ठाकरे गुट के 9 में से 7 सांसदों को तोड़ने का उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का यह महाऑपरेशन पूरी तरह विफल हो चुका है? हालांकि खुद एकनाथ शिंदे ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और अफवाह बताया है, तो वहीं उद्योग मंत्री उदय सामंत ने एनडीटीवी से बातचीत में इसे खारिज करते हुए एक सस्पेंस भी छोड़ दिया कि 'ऑपरेशन कभी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किए जाते और कई नेता संपर्क में हैं.' इस बीच सूत्रों का दावा है कि इस ऑपरेशन के ठंडे पड़ने के तार दिल्ली की राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी (TMC) के 'बागी'सांसदों द्वारा एनडीए को संभावित समर्थन देने की खबरों से जुड़े हैं, जिससे केंद्र में चंद्रबाबू नायडू और एकनाथ शिंदे की बार्गेनिंग पॉवर (सौदेबाजी की ताकत) कम होने की आशंका है. इसी बदले समीकरण के कारण सांसदों को तोड़ने की जल्दबाजी अब शांत पड़ती दिख रही है.
क्या है 'ऑपरेशन टाइगर' और क्यों हो रही है चर्चा?
दरअसल लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा तेजी से फैली थी कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट के कई निर्वाचित सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में हैं. राजनीतिक हल्कों में इस संभावित दलबदल या पाला बदलने की रणनीति को ही 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया था. ताजा चर्चाओं के अनुसार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसदों में से कम से कम 7 सांसदों को अपने पाले में लाने में एकनाथ शिंदे कामयाब नहीं हो पाए हैं. इन्हीं दावों के बाद महाविकास अघाड़ी और विशेषकर उद्धव गुट के नेता अब शिंदे पर तंज कस रहे हैं कि उनका यह तथाकथित 'ऑपरेशन' पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ है. अब आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि उद्धव गुट के वे कौन से सांसद थे जिन पर शिंदे गुट की नजर टिकी थी.
- अरविंद सावंत (दक्षिण मुंबई)
- अनिल देसाई (दक्षिण मध्य मुंबई)
- ओमराजे निंबाळकर (धाराशिव)
- संजय देशमुख (यवतमाळ वाशिम)
- नागेश पाटील आष्टीकर (हिंगोली)
- संजय जाधव (परभणी)
- राजाभाऊ वाझे (नाशिक)
- भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
- संजय दिना पाटील (उत्तर पूर्व मुंबई)
'7' का आंकड़ा क्यों है जरूरी ?
दलबदल कानून और नए गुट के रूप में मान्यता पाने के तकनीकी नियमों के तहत दो-तिहाई बहुमत, यानी 9 में से 7 सांसदों को साथ लाना शिंदे की शिवसेना के लिए बेहद जरूरी है. एकनाथ शिंदे 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए लोकसभा में अपना संख्याबल बढ़ाकर केंद्र में अपनी ताकत मजबूत करने की तैयारी में थे.
इसके तहत पाला बदलने वाले सांसदों में से एक को केंद्र सरकार में मंत्री पद और अन्य सांसदों को सम्मानजनक और बड़े पदों का ऑफर दिया गया था.
दिल्ली के बदले समीकरणों से पस्त हुआ शिंदे गुट का दांव?
राष्ट्रीय राजनीति में चल रही चर्चाओं के अनुसार, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों द्वारा अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने की खबरें आ रहीं हैं. इसके कारण केंद्र सरकार में चंद्रबाबू नायडू (TDP) और एकनाथ शिंदे (शिवसेना) की बार्गेनिंग पॉवर कम होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सांसदों को तोड़ने की यह जल्दबाजी अब शांत पड़ गई है. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शिंदे की शिवसेना अब तक इस '7' के जादुई आंकड़े को छूने में नाकाम रही है. इसी वजह से अब कयास लगाए जा रहे हैं कि शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी तरह फेल हो चुका है.
शिर्डी के सांसद वाकचौरे के रुख से बढ़ा था सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम पर उद्धव गुट के पूर्व सांसद विनायक राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सीधे तौर पर एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर आरोप लगाया है कि वे उद्धव ठाकरे के वफादार सांसदों को तोड़ने और उन्हें लालच देकर फंसाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.
ऑपरेशन टाइगर' पर उद्योग मंत्री उदय सामंत का बड़ा बयान
इस पूरे सियासी घमासान और कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चल रही चर्चाओं पर शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत से जब NDTV ने पूछा तो उन्होंने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दिल्ली दौरा उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों को तोड़ने के लिए बिल्कुल नहीं था. सामंत ने साफ किया कि एकनाथ शिंदे दिल्ली में शिवसेना सांसदों के साथ बैठक करने और एनडीए व महाराष्ट्र के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गए थे. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की.
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'ऑपरेशन सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं होते', संपर्क में हैं कई नेता: सामंत
उदय सामंत ने आगे दावा किया कि उन्हें किसी 'ऑपरेशन टाइगर' की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि कई नेता और जनप्रतिनिधि अपनी इच्छा से लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि शिंदे के नेतृत्व और सरकार के कामकाज से प्रभावित होकर अन्य दलों के कई बड़े चेहरे शिवसेना में शामिल होने को उत्सुक हैं. इसी मुद्दे पर एक और अहम टिप्पणी करते हुए सामंत ने कहा कि अगर कोई ऑपरेशन चल रहा होता है तो उसे सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया जाता. कई सांसद और जनप्रतिनिधि हमारे संपर्क में हैं और सही समय आने पर इसकी जानकारी खुद-ब-खुद सबके सामने आ जाएगी.
एकनाथ शिंदे ने बताया पूरी तरह निराधार
एक तरफ जहां उदय सामंत ने संपर्क में होने की बात कहकर सस्पेंस बनाए रखा है, वहीं दूसरी तरफ खुद शिवसेना शिंदे गुट के प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन खबरों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है. एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के साथ उनकी कथित बैठक की खबरें पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और सिर्फ एक अफवाह हैं, और मीडिया को ऐसी सनसनाटी खबरों से बचना चाहिए. अब इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि क्या वाकई यह सिर्फ अफवाह है या पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है.
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