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कब तक बचेगा हाफिज सईद! अब लाहौर जाएगा भारत का समन; बड़े एक्शन की तैयारी

भारत और पाकिस्तान के बीच इस समय न तो कोई सामान्य प्रत्यर्पण व्यवस्था काम कर रही है और न ही पाकिस्तान की तरफ से हाफिज सईद को भारत को सौंपे जाने की संभावना दिखाई देती है.

कब तक बचेगा हाफिज सईद! अब लाहौर जाएगा भारत का समन; बड़े एक्शन की तैयारी
आतंकी हाफिज सईद
NDTV

पहलगाम आतंकी हमले में भारत अब लश्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने जा रहा है.सूत्रों के मुताबिक भारत पाकिस्तान के लाहौर में मौजूद हाफिज सईद को कोर्ट का समन राजनयिक चैनल के जरिए भेजने की तैयारी में है.इसके लिए समन विदेश मंत्रालय के जरिए पाकिस्तान तक पहुंचाया जाएगा.

NIA ने साल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की साजिश के मामले में हाफिज सईद को आरोपी बनाया है. NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद का नाम शामिल किया है. एजेंसी ने  लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट यानी TRF के एक अहम नेता के तौर पर भी उसकी भूमिका का जिक्र किया है.

NIA का आरोप है कि हाफिज सईद पहलगाम आतंकी हमले की साजिश और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश में शामिल था. इस मामले में जम्मू की विशेष NIA अदालत पहले ही उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट यानी Non-Bailable Warrant जारी कर चुकी है.

अब इसी वारंट के बाद कोर्ट की तरफ से जारी समन को पाकिस्तान में आधिकारिक तौर पर सर्व कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, समन विदेश मंत्रालय के जरिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक भेजा जाएगा और इसे भारतीय राजनयिक चैनल के जरिए हाफिज सईद तक पहुंचाने की कोशिश होगी.

हाफिज सईद के खिलाफ यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत आगे की कानूनी कार्रवाई से पहले यह रिकॉर्ड पर रखना चाहता है कि आरोपी को अदालत के सामने पेश होने और अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था.

अगर समन मिलने के बाद भी हाफिज सईद अदालत में पेश नहीं होता है और कानून में तय प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है. इसमें उसे घोषित अपराधी यानी Proclaimed Offender घोषित करने की प्रक्रिया भी शामिल है.

BNSS की धारा 356 कुछ निर्धारित परिस्थितियों में घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में जांच, ट्रायल या फैसला देने की अनुमति देती है. यानी अगर आरोपी विदेश में है, अदालत की प्रक्रिया से बच रहा है और कानून में तय सभी शर्तें पूरी हो जाती हैं तो उसकी गैर-मौजूदगी में भी मुकदमा आगे बढ़ाया जा सकता है.

भारत और पाकिस्तान के बीच इस समय न तो कोई सामान्य प्रत्यर्पण व्यवस्था काम कर रही है और न ही पाकिस्तान की तरफ से हाफिज सईद को भारत को सौंपे जाने की संभावना दिखाई देती है.ऐसे में भारत अपनी न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कूटनीतिक माध्यम का इस्तेमाल कर रहा है.

हाफिज सईद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्रवाई हो चुकी है. उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी मौजूद है. हाफिज सईद के मामले में पाकिस्तान का कहना रहा है कि वह आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद हिरासत में है

वहीं भारतीय एजेंसियां लंबे समय से आरोप लगाती रही हैं कि पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग हाफिज सईद जैसे आतंकियों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई से बचाने की कोशिश करते रहे हैं.

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