- रूस की एक लैब वर्कर शेलेखोव की वायरस के संक्रमण में आने से मौत हो गई.
- सैंपल लेते वक्त जीवित प्लेग वाली ट्यूब टूट गई थी.
- 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है.
रूस के साइबेरिया में 27 साल की एक लैब वर्कर की एक गंभीर बीमारी के बाद मौत हो गई. शक है कि उसे न्यूमोनिक प्लेग नाम की बीमारी हो गई थी. यह एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित महिला रूस के इर्कुत्स्क में स्थित 'एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट' में काम करती थी. उसे गंभीर निमोनिया के लक्षणों के साथ इर्कुत्स्क के पास शेलेखोव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. अस्पताल में कई दिन बिताने के बाद 2 अक्टूबर, 2026 को उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद, महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है. इसके साथ ही रूस में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं.
लेकिन यह सब हुआ कैसे?
The Moscow Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 साल की महिला ने मेडिकल स्टाफ को बताया था कि सैंपल लेते वक्त गलती से उससे एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, जिसमें जीवित प्लेग बैक्टीरिया थे. रूसी अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों के संपर्क में वह आई थी, उन पर नजर रखी जा रही है और उनके शुरुआती टेस्ट के रिजल्ट निगेटिव आए हैं.
न्यूमोनिक प्लेग क्या है?
न्यूमोनिक प्लेग, प्लेग का एक गंभीर रूप है, जो 'येर्सिनिया पेस्टिस' बैक्टीरिया की वजह से होता है. ब्यूबोनिक प्लेग मुख्य रूप से लिम्फ नोड्स यानी लसीका ग्रंथियों को प्रभावित करता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को संक्रमित करता है और इससे सांस लेने में बड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.
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प्लेग एक जूनोटिक बीमारी होती है यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है. ये बैक्टीरिया आमतौर पर छोटे स्तनधारी जीवों और उनके शरीर पर रहने वाले पिस्सुओं में पाए जाते हैं. न्यूमोनिक प्लेग सांस के जरिए निकलने वाली संक्रामक बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए सीधे एक शख्स से दूसरे शख्स में भी फैल सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, न्यूमोनिक प्लेग तेजी से बढ़ सकता है और इलाज में देरी होने पर जानलेवा साबित हो सकता है. हालांकि, शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता चलने और एंटीबायोटिक से इलाज करने पर बचने की संभावना बढ़ जाती है.
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