RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर जमकर बवाल मचा हुआ है. न्यूयॉर्क के मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन (MSG) में शनिवार, 29 अगस्त को उनका कार्यक्रम है, जिसको लेकर सरगर्मी बढ़ी हुई है. इस कार्यक्रम से पहले अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सलाहकार आयोग- यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने एक बार फिर बयान जारी किया है. संस्था ने आरोप लगाया कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है. उसने अमेरिकी सरकार से RSS के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की भी अपील की है.
पाकिस्तानी-अमेरिकी आसिफ महमूद की अध्यक्षता वाली इस संस्था ने बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार कहा, “भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है. धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के लिए अक्सर हिंसा और भड़काऊ बयानबाजी का इस्तेमाल किया जाता है.”
भारत पहले ही दे चुका जवाब
इससे पहले 21 अगस्त को भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका में RSS प्रमुख की बैठकों पर रोक लगाने की USCIRF की मांग की आलोचना की थी. विदेश मंत्रालय ने इस संस्था को “पक्षपाती” बताया था और कहा था कि इसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि यह आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है. उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि यह एक पक्षपाती संस्था है. कई वर्षों से यह भारत के बारे में गलत और भड़काऊ बयान देती रही है. हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि उनका अपना एजेंडा है और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है.”
इस बीच, RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बुधवार को कहा कि न्यूयॉर्क में होने वाला ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' एक ऐसा कार्यक्रम होगा, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लोग शामिल होंगे. इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों से जुड़े लोगों से बातचीत करेंगे. आंबेकर ने कहा कि यह कार्यक्रम खुली बातचीत और एक-दूसरे के सम्मान की भावना से आयोजित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति की उस सोच को दिखाता है, जो सभी को साथ लेकर चलने और सभी का स्वागत करने वाली है.
आंबेकर ने ‘एक्स' पर लिखा कि न्यूयॉर्क में होने वाला ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक कार्यक्रम है, जिसमें RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों से आने वाले लोगों से बातचीत करेंगे. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खुली बातचीत और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित किया गया है और यह ऐसी भारतीय सोच को दिखाता है जो मूल रूप से सभी को साथ लेकर चलने वाली और सभी का स्वागत करने वाली है.
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