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सहारनपुर में जब 62 साल के 'कार्यकर्ता' के घर दाल-चावल खाने पहुंचे नितिन नवीन

NDTV से बात करते अजब सिंह ने बताया कि बहुत पहले RSS से जुड़े रहे हैं फिर ABVP में सक्रिय रहे. फिर उत्तराखंड में शिक्षक बन गए. रिटायरमेंट के बाद वापस सहारनपुर आ गए हैं.

सहारनपुर में जब 62 साल के 'कार्यकर्ता' के घर दाल-चावल खाने पहुंचे नितिन नवीन
  • नितिन नवीन का सहारनपुर दौरा भाजपा कार्यकर्ताओं के व्यापक समर्थन और स्वागत के बीच हुआ था
  • दौरे के दौरान उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी किलेबंदी को त्रिस्तरीय संगठन बनाने पर जोर दिया
  • नितिन नवीन ने दलित कार्यकर्ता अजब सिंह के घर जाकर पार्टी संगठन में सुधार और समावेशन की रणनीति अपनाई
लखनऊ:

दर्जनों गाड़ियों का क़ाफ़िला… हर 5 किलोमीटर पर स्वागत द्वार… मंगलवार को सहारनपुर की सड़कें नितिन नबीन के स्वागत बैनर पोस्टर से भरी हो. सांसद, विधायक और कार्यकर्ताओं की हज़ारों की फ़ौज पीछे हो. सहारनपुर में नितिन नवीन के दौरे की ये पहली तस्वीर है. हर कार्यकर्ता नितिन नबीन की बस एक झलक पाने के लिए बेकरार था.सुबह 11:30 बजे नितिन नबीन का क़ाफ़िला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत मेरठ से सहारनपुर में दाखिल हुआ. शहर के बाहर बने एक होटल में एक के बाद एक तीन बैठक हुई. 

पहली बैठक पश्चिमी क्षेत्र के सांसद, विधायक से हुई. दूसरी बैठक पूर्व सांसद, विधायक समेत जनप्रतिनिधि और तीसरी बैठक जिले से लेकर बूथ तक के पदाधिकारियों से. मक़सद एक ही था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी किलेबंदी को त्रिस्तरीय बनाया जाए. यानि जिले से लेकर मंडल और बूथ लेवल तक के कार्यकर्ताओं की शिकायत भी सुनी जाए और संगठन में सुधार के सुझाव भी. इसी कड़ी में नितिन नवीन भाजपा के एक दलित कार्यकर्ता अजब सिंह के घर जा पहुंचे, वह बूथ लेवल पर काम करने वाले कार्यकर्ता हैं. 

अजब सिंह ने नितिन नबीन के लिए बनवाया दाल, चावल, सब्जी, रोटी और रायता

बैठक खत्म होने के बाद नितिन नवीन का क़ाफ़िला सहारनपुर के ओजपुरा के लिए निकला. ओजपुरा की तंग गलियां साफ़ हो चुकी हैं और संत रविदास मंदिर तक जाने वाली सड़कों पर रेड कार्पेट बिछा दिया गया. ओजपुरा में नितिन नबीन RSS से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अजब सिंह के यहां पहुंचे. अजब सिंह घर के पास बने संत रविदास मंदिर के पांच सालों तक लगातार प्रबंधक रहे हैं. अजब सिंह ने अपने घर दाल, चावल, सब्जी, रोटी और रायता बनवा रखा है. NDTV से बात करते उन्होंने बताया कि बहुत पहले RSS से जुड़े रहे हैं फिर ABVP में सक्रिय रहे. फिर उत्तराखंड में शिक्षक बन गए. रिटायरमेंट के बाद वापस सहारनपुर आ गए हैं. वह कहते हैं कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जो अपने पुराने कार्यकर्ता रहे लोगों का ख्याल रखती है. वह बीजेपी से ज्यादा संत रविदास मंदिर के प्रबंधन से जुड़े हैं, लेकिन फिर भी नितिन नबीन उनके घर आए. हालांकि सहारनपुर में पेशे से पत्रकार अशोक कश्यप बताते हैं कि अजब सिंह के सहारे भाजपा पश्चिमी यूपी में दलितों के बीच अपनी सियासी जमीन को भी मजबूत करना चाहती है.

नितिन नवीन ने मेरठ के बाद सहारनपुर को क्यों चुना  

पश्चिमी यूपी में सोमवार को विधानसभा चुनाव की तैयारियों का शंखनाद मेरठ से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने किया. दरअसल 2027 में भाजपा को पश्चिमी यूपी की 71 सीटों में 54 पर जीत हासिल हुई थी, लेकिन 2022 में ये सीटें घटकर 41 हो गई थीं. फिर सहारनपुर में 7 में से 5 विधानसभा सीट जीतने वाली भाजपा को लोकसभा चुनाव में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. इसके पीछे मुस्लिम वोटों की लामबंदी और भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी मुख्य वजह रही है. यही वजह है कि इस बार नितिन नबीन सियासी जमीन को मजबूत करने में जुटे हैं.

नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को दिया कौन सा गुरु मंत्र  

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सहारनपुर में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करीब तीन घंटे तक चली. बैठक में नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से अनुशासित और विनम्र रहने को कहा. इसके साथ ही Genz और युवाओं से संपर्क करने के लिए हर विधानसभा में 50-50 युवाओं को तैयार करने का आह्वान किया. ये भी कहा कि सरकारी नीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करें. दूसरी पार्टियों में गए मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को समझाएं. जिले से लेकर बूथ लेवल तक कार्यकर्ताओं की नियमित बैठक कर बेहतर संवाद और तालमेल बनाए. भाजपा के साथ सहयोगी पार्टियां यानि RLD के कार्यकर्ताओं से भी नियमित संपर्क में रहें ताकि बूथ वार उनका सहयोग रहे.

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