- इंदिरा गांधी के एक इशारे पर रॉ चीफ आरएन काव ने बिना खून बहाए सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बना दिया.
- अमेरिकी रानी पर सीआईए एजेंट होने का शक था, जिसने राजा को भारत के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया था.
- भारतीय सेना ने सिर्फ 20 मिनट के सीक्रेट ऑपरेशन में गंगटोक पैलेस को घेरकर तिरंगा फहरा दिया था.
क्या आप जानते हैं कि भारत के गले पर एक ऐसा खंजर लटक रहा था, जो अगर जरा भी चल जाता तो हिंदुस्तान का पूरा नॉर्थ-ईस्ट हमेशा के लिए हमसे कट जाता. हम बात कर रहे हैं नक्शे पर दिखने वाले छोटे से राज्य 'सिक्किम' की. 1975 से पहले यह भारत का हिस्सा नहीं था. वहां एक राजा का राज था, जिसकी अमेरिकी पत्नी पर सीआईए (CIA) एजेंट होने का शक था और चीनी सेना बॉर्डर पर घात लगाए खड़ी थी. लेकिन फिर एंट्री होती है भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' (R&W) के पहले बॉस आरएन काव (रामेश्वर नाथ काव) की. जिन्होंने बिना खून बहाए, चीन की नाक के नीचे से पूरे सिक्किम को भारत की झोली में डाल दिया.
करण जौहर ने R&W के जन्मदाता और पहले बॉस आरएन काव पर बायोपिक बनाने का ऐलान किया है. फिल्म 2028 में रिलीज होगी. यह मूवी लेखक नितिन गोखले की किताब R.N. Kao जेंटलमैन स्पाइमास्टर पर आधारित है. इस किताब का फोरवर्ड एनएसए अजीत डोभाल ने लिखा है. 1948 में जब इंटेलिजेंस ब्यूरो की स्थापना हुई, तो भारतीय पुलिस सेवा के अफसर आरएन उन्हें उसका सहायक निदेशक बनाया गया. 1968 में इंदिरा गांधी ने सीआईए की तर्ज पर विदेश के बाहरी खुफिया मामलों के लिए एक जासूसी एजेंसी 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' (R&W) बनाने का फैसला किया. जिम्मेदारी दी गई आरएन काव को. आइए शुरू करते हैं सिक्किम के भारत में विलय की कहानी.

राजा, रानी और विदेशी हाथ
1947 में जब देश आजाद हुआ, तब सिक्किम में चोग्याल यानी राजा ताशी नामगयाल का शासन था. 1950 में भारत के साथ एक संधि हुई, जिसके तहत सिक्किम भारत का 'रक्षित राज्य' बना. यानी रक्षा और विदेश नीति भारत की, लेकिन अंदरूनी राज-काज राजा का. करीब दो दशक तक सब ठीक चला, लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब नए राजा पलदेन थोंडुप नामगयाल गद्दी पर बैठे.
राजा साहब एक अमेरिकी महिला होप कुक के प्यार में पड़ गए और उनसे शादी कर ली. बस यहीं से कहानी में असली ट्विस्ट आया. दिल्ली के गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई कि रानी साहिबा दरअसल अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की प्लांट की हुई मोहरा हैं, जो राजा को भारत के खिलाफ भड़का रही थीं. राजा साहब सिक्किम को स्विट्जरलैंड की तरह एक न्यूट्रल देश बनाने का सपना देखने लगे और भारत से दूरी बनाने लगे.

सिक्किम के राजा और उनकी अमेरिकी पत्नी.
इंदिरा गांधी का मास्टरस्ट्रोक और काव का गेमप्लान
इधर, दिल्ली में बैठी 'आयरन लेडी' इंदिरा गांधी इस खतरे को भांप चुकी थीं. अगर सिक्किम हाथ से जाता, तो हमारा 'चिकन नेक' यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर खतरे में पड़ जाता, जिससे पूरा उत्तर-पूर्व भारत से अलग हो जाता. 1971 की जंग जीतने के बाद आत्मविश्वास से भरी इंदिरा गांधी ने रॉ चीफ आरएन. काव को तलब किया और सीधे पूछा- "क्या तुम सिक्किम का कुछ कर सकते हो?" बस, यहीं से शुरू हुआ पर्दे के पीछे का वो खेल, जिसने इतिहास बदल दिया.

रॉ के जांबाज अफसर पी.एन. बनर्जी ने सिर्फ चार दिनों में एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया कि इंदिरा गांधी ने भी तुरंत हरी झंडी दे दी. रणनीति साफ थी- सिक्किम की राजशाही को धीरे-धीरे कमजोर करना और वहां की जनता को लोकतंत्र के लिए तैयार करना. इसके लिए सिक्किम नेशनल कांग्रेस के नेता काजी लेंडुप दोरजी को साथ लिया गया. रॉ ने जमीन पर दो सीक्रेट ऑपरेशन लॉन्च किए- 'ऑपरेशन जनमत' और 'ऑपरेशन ट्विलाइट'.
काव की टीम ने सिक्किम के भीतर लोकतांत्रिक आंदोलनों को चुपके से हवा देना शुरू किया. वहां की बहुसंख्यक नेपाली आबादी, जो राजा के भेदभाव से तंग आ चुकी थी, सड़कों पर उतर आई.
4 अप्रैल 1973 को राजा का 50वां जन्मदिन था. महल में जश्न चल रहा था. जनता ने महल को घेर लिया. प्रदर्शनकारियों पर राजा के गार्ड्स ने गोली चला दी, जिससे दो लोगों की मौत हो गई. बस फिर क्या था, काजी ने पूरे सिक्किम में चक्काजाम कर दिया. कानून-व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और चोग्याल घुटनों पर आ गए. उन्होंने घबराकर भारत से मदद मांगी. भारतीय सेना ने तुरंत मोर्चा संभाला और वहां शांति बहाल की.
सिर्फ 20 मिनट का एक्शन और तिरंगा बुलंद
9 अप्रैल 1975 की वो सुबह सिक्किम के इतिहास की सबसे बड़ी सुबह थी. ब्रिगेडियर देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना की तीन बटालियन ने गंगटोक में चोग्याल के महल को घेर लिया. ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि परिंदा भी पर न मार सके. महज 20 मिनट के अंदर महल के राजा के वफादार 243 सिक्किम गार्ड्स का सरेंडर करा दिया गया और वहां शान से तिरंगा लहराने लगा.

चीन ने सीमा पर लाल आंखें दिखाईं, रेडियो पर धमकियां दीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने दो टूक कह दिया, 'सिक्किम हमारा अंदरूनी मामला है, दखल दिया तो अंजाम बुरा होगा.' चीन पीछे हट गया. इसके बाद हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह में सिक्किम की 97.5% जनता ने भारत के साथ आने का फैसला किया. 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक तौर पर भारत का 22वां राज्य बन गया. यह जीत थी बिना युद्ध लड़े, दिमाग से जीती गई एक जंग की और इसके हीरो थे रामेश्वर नाथ काव.
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