अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चीफ डॉ मोहन भागवत ने ऐतिहासिक भाषण दिया. उन्होंने दुनिया को बताया कि इंसानियत सभी धर्म से ऊपर है. मोहन भागवत ने कहा कि लोगों के शरीर, पहनावा, पूजा-पद्धति और जीवनशैली अलग हो सकती है, लेकिन सभी के भीतर मौजूद आत्मा उन्हें आपस में जोड़ती है. इस दौरान आरएसएस चीफ भागवत ने अमेरिका या विदेश में रह रहे भारतीयों से अपील किया कि वे भले ही विदेश में रह रहे हों, लेकिन उन्हें अपनी मातृभूमि का कर्तव्य नहीं भूलना चाहिए.
Swami Vivekananda said that every nation has a message to deliver, a mission to accomplish, and a destiny to fulfil. Bharat is there to realise, and from time to time make the world realise this unity in diversity. - Dr. Mohan ji Bhagwat at #UniversalOneness ;… pic.twitter.com/gwRAImPKgq
— RSS (@RSSorg) August 29, 2026
मोहन भागवत ने कहा, "हमारा क्या कर्तव्य है? आप अमेरिका में हैं या फिर आप अमेरिका में रहते हैं. आप अमेरिका में कमाते हैं, तो आप ही अमेरिका हैं और आपको अमेरिका के प्रति सच्चा बर्ताव करना चाहिए. लेकिन विदेश में रहने वाले लोगों का अपनी कर्मभूमि के प्रति कर्तव्य है. उन्हें उसे पूरा करना चाहिए. उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहना चाहिए."
आरएसएस प्रमुख ने कहा, विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत ही उनकी जन्मभूमि है, अगर उनमें इसके लिए कुछ करने की इच्छा है और वे अपनी कर्मभूमि के प्रति अपना फर्ज पूरा करने के बाद ऐसा कर सकते हैं, तो इसकी कोई मनाही नहीं है."
#WATCH | New York, US | At the Universal Oneness Celebration, RSS Chief Mohan Bhagwat says, "Bharatiya diaspora (in America) have a duty to their Karma Bhoomi and they must fulfill that. They should be loyal to their Karma Bhoomi. Since Bharat is their Janma Bhoomi, if they have… pic.twitter.com/BaF8qvvdxs
— ANI (@ANI) August 29, 2026
भगवान ने मनुष्य को सही और गलत में अंतर करने की क्षमता दी है: मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया की जिम्मेदारी इंसानों पर है और मानव समाज को व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी सीमाओं से ऊपर उठकर मानव कल्याण के लिए कार्य करना है. भगवान ने मनुष्य को सही और गलत में अंतर करने की क्षमता दी है और इसी क्षमता का उपयोग करके वह बेहतर समाज का निर्माण कर सकता है.
आरएसएस चीफ ने भारत की भूमिका पर भी खासा जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दायित्व दुनिया को 'एकता में विविधता' का संदेश देना है. भारत में विविधता कोई चुनौती नहीं बल्कि ताकत है. उन्होंने कहा कि विविधता को दबाने की नहीं बल्कि उसका उत्सव मनाने की जरूरत है. यही भारत का स्वभाव है और यही उसकी पहचान भी है.
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