इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल (RCB vs GT Final) मुकाबले में भी उम्मीदों पर खरा उतरते हुए गुजरात टाइंटस को...हराकर लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया. और इस कारनामे के साथ ही बेंगलुरु यह उपलब्धि हासिल करने वाली चैन्नई और मुंबई के बाद सिर्फ तीसरी टीम बन गई. निश्चित तौर पर करीब डेढ़ महीने भर चलने वाले इस टूर्नामेंट में खिताबी जीत के साथ ही साफ उभरकर आया कि इस टीम ने लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने के लिए खुद पर कितना ज्यादा काम किया है. हेड कोच एंडी फ्लॉवर, स्टाफ और प्रबंधन ने पर्दे के पीछे काम किया, तो कुछ ऐसी शानदार बातें और प्रदर्शन निकलकर सामने आए, जो आरसीबी की जीत की वजह बने. चलिए आप RCB की खिताबी जीत की 5 सबसे बड़ी वजहों के बारे में जान लीजिए.
1. आक्रामकता को बनाया 'सक्सेस मंत्र'
कोच एंडी फ्लावर की अगुवाई में आरसीबी ने अपने सफलता सूत्र का आधार आक्रामकता को बनाया. और यह सोच चाहे बैटिंग हो, या बॉलिंग या फिर फील्डिंग, यह सभी में साफ-साफ झलकी, और इस सोच को कप्तान रजत पाटीदार खुद अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़े, तो सबसे जूनियर और अनकैप्ड प्लेयर की मनोदशा और खेलने के अंदाज में साफ-साफ झलकी. जिस आक्रामकता के साथ आरसीबी ने मेगा टूर्नामेंट में एंट्री की थी, उसी एप्रोच के साथ ही उसके बल्लेबाजों ने समापन किया. आखिर में यही नजरिया टीम की खिताबी जीत का आधार साबित हुआ .
2. टॉप ऑर्डर का विराट प्रदर्शन
आरसीबी की सफलता की दूसरी सबसे बड़ी वजह यह रही कि उसके ज्यादातर शीर्ष बल्लेबाजों के प्रदर्शन में न केवल निरंतरता रही, बल्कि इन्होंने सक्सेस के मूल मंत्र 'अटैक इस द बेस्ट पॉलिसी' को आखिर तक बरकरार रखा. ओपनिंग का दूसरा छोर जरूर ऐसा रहा, जो समय-समय पर गड़बड़ाया. बीथल की फॉर्म बिगड़ी, तो फिल सॉल्ट आए. सॉल्ट का सुर बिगड़ा, तो फिर मानो एकदम सही समय पर वेंकटेश अय्यर को ओपनर बनाकर प्रबंधन ने अपना बिगड़ा सुर सही कर कर लिया. कोहली ने 16 मैचों की इतनी ही पारियों में 56.26 के औसत, 1 शतक और 5 अर्द्धशतकों से बेंगलुरु के लिए सबसे ज्यादा 675 रन बनाए, तो स्लॉग ओवरों में बड़ा पॉजिटव बनकर आए ओपनर वेंकटेश अय्यर ने 7 मैचों की 6 पारियों में 52.25 के औसत और 1 अर्द्धशतक से 209 रन बनाए. देवदत्त पडिक्कल ने भी 16 मैचों की 15 पारियो में 33.14 के औसत और 2 अर्द्धशतक से 464 रन बनाए.
3. पाटीदार का आगे रहकर नेतृत्व
आरसीबी की लगातार दूसरी खिताबी जीत में रनों के सरदार विराट रहे, तो कप्तान रजत पाटीदार रीढ़ साबित हुए. नंबर-4 पर पाटीदार का सुनामी अंदाज और फील्डिंग के दौरान कप्तानी में न के बराबर गलतियों ने आरसीबी की जीत की लय का स्तर कभी भी गिरने नहीं दिया. पाटीदार टूर्नामेंट में उन कप्तानों में शुमार रहे, जिन्होंने पांच सौ का आंकड़ू छुआ. आरसीबी कप्तान ने 15 मैचों की 14 पारियों में 35.78 के औसत से 501 रन बनाए. इसमें उन्होंने 5 अर्द्धशतक रहे, लेकिन जो बात इन आंकड़ों में छिप गई और जिसने आरसीबी का बहुत भला किया, वह उनका 19.2.69 का स्ट्राइक रहा और वह टूर्मामेंट में सबसे ज्यादा स्ट्राइक-रेट के मामले में छठे नंबर पर रहे.
4. भुवनेश्वर कुमार बने जादुई हाथ!
बिना गेंदबाजों की मुहर लगे कोई भी टीम चैंपियन नहीं ही बन सकती. और उम्र के 37वें साल में चल रहे टीम इंडिया के स्टार पेसर भुवनेश्वर कुमार आरसीबी के लिए इस सीजन में गोल्डेन हैंड साबित हुए. पाटीदार ने जब भी जरूरत के समय भुवनेश्वर की ओर गेंद उछाली, भुवी ने कप्तान को निराश नहीं किया. वास्तव में अगर बैटिंग में खिताबी जीत का सबसे बड़ा योगदान विराट का रहा, तो गेंद के साथ यही भूमिका भुवनेश्वर ने निभाई. कुमार खेले 16 मैचों में फेंके 63 ओवरों में 28 विकेट लेकर सीजन के दूसरे सबसे सफल बॉलर रहे.
5. क्रुणाल पांड्या का बढ़िया साथ/रासिख ने भी बढ़ाया हाथ
अगर जीत के कारणों में मिड्ल ऑर्डर की रीढ़ कप्तान रजत पाटीदार रहे, तो ऐसी ही भूमिका क्रुणाल पांड्या ने भी निभाई. और अगर यह कहा जाए कि यह सीजन क्रुणाल के करियर का सर्वश्रेष्ठ करियर रहा, तो गलत नहीं ही होगा. क्रुणाल पांड्या ने बैटिंग में 16 मैचों की 9 पारियों में 37.66 के औसत और 1 यादगार अर्द्धशतक से 37.66 के औसत से 226 रन बनाए, तो वहीं उन्होंने बॉलिंग में भी दमदार प्रदर्शन करते हुए फेंके 50. 3 ओवरों में 14 विकेट लिए. उनका टीम में सबसे कम इकॉनमी रन रेट (8.41) का रहा, तो जम्मू-कश्मीर के युवा पेसर रासिख सलाम ने भी भुवनेश्वर और टीम की मदद में अच्छा हाथ आगे बढ़ाते हुए 12 मैचों में फेंके 42.5 ओवरों में 19 विकेट लिए.
(खबर जारी है...)
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