- ट्रंप ने रूस से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने का समझौता किया, जो पुतिन को जन्मदिन का तोहफा माना जा रहा है
- यूरोपीय संघ रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों का 22वां दौर लागू करने की कोशिश कर रहा है
- रूस के अमीर उद्योगपतियों को दंडित करने का सीमित असर पड़ा है
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जन्मतिथि 7 अक्टूबर 1952 है. मतलब इसी दिन वो अपना बर्थडे मनाते हैं. इस साल पुतिन के बर्थडे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक गिफ्ट दिया. अमेरिका ने रूस से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने के लिए समझौते का ऐलान किया. एक्सपर्ट इस समझौते को ट्रंप का पुतिन को बर्थडे गिफ्ट मान रहे हैं, मगर साथ ही चेता रहे हैं कि ये इससे कहीं ज्यादा होने वाला है.
यूरोपीय संघ भी एकमत नहीं
व्लादिमीर पुतिन के रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण किए लगभग पांच साल बीत चुके हैं. ऐसे में, रूस पर और कड़े पश्चिमी प्रतिबंध लगाने की वकालत करने वालों के लिए यह समय काफी निराशाजनक है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक डीजल उपलब्ध कराने का एक समझौता किया है. यह कदम मॉस्को के ऊर्जा निर्यात पर लगी पाबंदियों के बीच एक बहुत बड़े सुपरयॉट (बेहद आलीशान जहाज) को निकालने जैसा है. वहीं, यूरोपीय संघ (EU) रूस के व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों का 22वां दौर लागू करने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन अब उसे अपनी पहुंच की सीमाएं भी समझ आने लगी हैं.रूस के जिन कारोबारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनके लिए हर जगह बचने के रास्ते (लूपहोल्स) खुल रहे हैं. यहां तक कि फ्रांस और लक्ज़मबर्ग जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश भी कुछ अरबपतियों से प्रतिबंध हटाकर अपनी स्थानीय राजनीतिक समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.

जापान टाइम्स के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से, रूस पर लगाए गए प्रतिबंध एक निराशाजनक रास्ते पर रहे हैं. मगर, ट्रंप के व्हाइट हाउस ने अपने वित्तीय और राजनयिक हथियारों का इस्तेमाल मॉस्को को छोड़कर बाकी हर जगह किया. ईरान के साथ युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से समस्या और बढ़ गई, जिससे रूसी तेल की कीमतें ऊंची हो गईं. अंततः, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले डीजल बाजार में राहत पाने के लिए ट्रंप बेताब हो गए. नतीजा यह निकला कि पुतिन को उनके जन्मदिन पर एक शानदार तोहफा मिल गया. यूरोपीय देश शायद इस 'फायदेमंद' डीजल सौदे को देखकर हैरान रह गए हों, लेकिन उनका अपना रिकॉर्ड भी कुछ खास अच्छा नहीं रहा है. यूक्रेन पर बढ़ते हमलों और यूरोपीय संघ के क्षेत्र तथा हवाई क्षेत्र के रूस द्वारा खुलेआम उल्लंघन को देखते हुए, वे मॉस्को को सजा देने के लिए कहीं अधिक इच्छुक हैं, लेकिन इतिहासकार निकोलस मुल्डर के अनुसार, इस गुट के पास अमेरिकी डॉलर सिस्टम जैसा प्रभाव नहीं है और यहां आम सहमति बनाने में अधिक समय लगता है.
लंबी प्लानिंग में हैं ट्रंप
'साइंसेज पो' के ज़की लैदी, जो पहले यूरोपीय संघ के पूर्व शीर्ष राजनयिक जोसेप बोरेल के सलाहकार रह चुके हैं, का मानना है कि ट्रंप का अपने रूसी दोस्त के साथ डीजल का सौदा, केवल मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी मतदाताओं को खुश करने की कोशिश भर नहीं है. वे कहते हैं, "यह एक ऐसा राजनीतिक संकेत है जो पुतिन को सैन्य रूप से और मजबूत करेगा, यूक्रेन को सीमित करेगा, और कीव की मदद करने का अधिक बोझ यूरोपीय देशों पर डाल देगा. यह पश्चिमी देशों की प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था का पूरी तरह से ढह जाना नहीं है, लेकिन यह उसमें एक बड़ी सेंध जरूर है."

रूसी अर्थशास्त्री और लंदन बिजनेस स्कूल के डीन, सर्गेई गुरिएव का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से अमीर रूसी उद्योगपतियों (ओलिगार्क्स) को दंडित करने का युद्ध पर सीमित असर ही पड़ा है, क्योंकि इन उद्योगपतियों ने खुद को (या अपनी संपत्ति को) बचाने के लिए चुप रहना ही बेहतर समझा है. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि रूसी राज्य और उसके तंत्र पर लगाए गए व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों का वास्तव में गहरा असर पड़ा है. इसलिए, यूरोपीय संघ के लिए बेहतर यही होगा कि वह मौजूदा प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करे—जैसे कि विदेशी क्षेत्रों (ऑफशोर ज्यूरिसडिक्शन) में 'शेल कंपनियों' के जरिए किए जा रहे जटिल वित्तीय खेल पर नकेल कसे. अगले साल फ्रांस और अन्य जगहों पर होने वाले चुनावों के नतीजों को देखते हुए, यूरोपीय संघ को इस दिशा में अपने प्रयासों को और तेज कर देना चाहिए. रूस के समर्थक लोकलुभावन नेताओं के सत्ता में आने का इंतजार करने के बजाय, अभी कदम उठाना ज्यादा समझदारी होगी.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अब तक दो बार यह कहा है कि रूस के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बारे में उनके सहयोगियों ने कीव को वह चेतावनी नहीं दी, जो आमतौर पर दी जाती है. अमेरिका, जिसके उपग्रह और अन्य साधन रूसी हमलों के लिए 'अर्ली वार्निंग' (शुरुआती चेतावनी) का काम करते हैं, आमतौर पर यूक्रेन के लोगों को मिसाइलें गिरने से पहले सुरक्षित स्थानों (शेल्टर) तक पहुंचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मिनट दे देते हैं. हाल ही में यूक्रेन पर ऐसी 39 मिसाइलें गिरीं. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि उन्होंने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया है. मंगलवार को उन्होंने कहा, "हम उनकी मदद कर रहे हैं और खुफिया जानकारी भी साझा कर रहे हैं." लेकिन इससे इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि शायद अब कम खुफिया जानकारी दी जा रही है, या फिर जानकारी मिलने में देरी हो रही है.
पुतिन के लिए भी इसमें जोखिम
यूरोप और यूक्रेन को अमेरिका के बिना आगे बढ़ने, खुद को मजबूत बनाने, नए तरीके खोजने और अपने रक्षा बजट को बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इससे क्रेमलिन (रूस) की स्थिति कमजोर हो जाती है और वह अब दबदबे वाली स्थिति में नहीं रहता. मॉस्को जितना ज्यादा यूरोप को अपना दुश्मन बनाएगा, यूरोप उतना ही ज्यादा हथियार जुटाएगा. लंबे समय में, यूरोप की सेनाएं रूस के लिए एक बड़ा (रक्षात्मक) खतरा बन जाएंगी.

आने वाले वर्षों में यह युद्ध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल सकता है. रूस में मुश्किलों को झेलने की जबरदस्त क्षमता है. लेकिन रूस कब टूट जाएगा, यह आसानी से पता नहीं चलता. कभी-कभी यह अचानक और खतरनाक तरीके से सामने आता है—जैसे 2023 में हुआ था, जब रूस के कुख्यात 'वैगनर' भाड़े के सैनिकों के गुट के हताश प्रमुख ने बगावत कर दी थी. हालांकि, फिलहाल इस रणनीति का पूरा जोखिम यूक्रेन को उठाना पड़ रहा है. कुल मिलाकर अभी ट्रंप-पुतिन के ब्रोमैंस की चर्चा ज्यादा है.
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