सीजफायर और MoU पर साइन होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर खतरनाक जंग शुरू हो गई है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है. ट्रंप ने ईरान की जमीन के नीचे बनी न्यूक्लियर फैसेलिटी 'पिकएक्स माउंटेन' पर बमबारी करने की धमकी दी है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है.
ट्रंप का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे. उन्होंने अब ईरान के एक ऐसे परमाणु ठिकाने पर बमबारी करने की धमकी दी है, जिसे सबसे सुरक्षित ठिकानों में से एक माना जाता है.
ट्रंप ने 'पिकएक्स माउंटेन' का जिक्र करते हुए पत्रकारों से कहा कि सेना 'बहुत जल्द उस इलाके पर जोरदार हमला करेगी'. ईरान में इसे 'कुह-ए-कोलांग गज ला' के नाम से जाना जाता है और यह देश की सबसे अहम न्यूक्लियर एनरिचमेंट फैसिलिटी में से एक है, जो जमीन के कई सैकड़ों किलोमीटर नीचे बनी है.
पिकएक्स माउंटेन कहां है?
पिकएक्स माउंटेन राजधानी तेहरान से 220 किलोमीटर दूर है. यह ईरान की नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर है.
नतांज में यूरेनियम एनरिचमेंट के दो प्लांट हैं, जिन पर पहले भी बमबारी हो चुकी है. इस फैसिलिटी पर पिछले साल जून में बमबारी हुई थी और उसके बाद 28 फरवरी को जंग के दौरान पर भी इस पर हमला किया गया.
ब्रिटिश मीडिया 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ के अंदर बने इस कॉम्प्लेक्स के बारे में बहुत कम जानकारी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका निर्माण अभी भी चल रहा है और अनुमान है कि यह पहाड़ के अंदर लगभग 100 मीटर की गहराई में बना है.
अमेरिकी थिंक-टैंक 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' (ISIS) के अनुसार, 2025 और 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान पिकएक्स माउंटेन में मौजूद इस फैसिलिटी को निशाना नहीं बनाया गया था.
यह भी पढ़ेंः क्या है नियमों का वो पेच जिस कारण NEET पेपर लीक चर्चा को लेकर सरकार और विपक्ष में ठन गई? Explained
पिकएक्स माउंटेन का इतिहास क्या है?
थिंक-टैंक ISIS के अनुसार, पिकएक्स माउंटेन पर इस फैसिलिटी का निर्माण 2020 में शुरू हुआ था. इसका काम इसलिए शुरू हुआ था, क्योंकि नतांज फैसिलिटी में एक धमाके के बाद तोड़-फोड़ हो गई थी.
उस समय ईरान ने कहा था कि नतांज में हुई तोड़-फोड़ से काफी नुकसान हुआ है. उसी साल सितंबर में, ईरान के तत्कालीन न्यूक्लियर चीफ अली अकबर सालेही ने कहा था कि देश ने एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए 'नतांज के पास पहाड़ के बीचो-बीच हर तरह से आधुनिक, बड़ी और ज्यादा व्यापक फैसिलिटी' बनाना शुरू कर दिया है. ये मशीनें यूरेनियम को तेजी से घुमाकर उसे एनरिच करती हैं और न्यूक्लियर फ्यूल बनाती हैं.
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रॉसी ने मार्च में कहा था कि ईरान ने पहले ही पिकएक्स माउंटेन पर परमाणु गतिविधि करने के अपने इरादे की घोषणा कर दी थी. उन्होंने कहा था, 'यह उनकी सबसे संवेदनशील सुविधाओं को जमीन के नीचे रखने की एक व्यवस्थित योजना का हिस्सा था.'

पिकएक्स माउंटेन पर क्या बनाया है?
ISIS थिंकटैंक ने इस जगह की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया और कहा कि यहां दो एंट्री गेट हैं और हाल ही में इस जगह के चारों ओर एक सुरक्षा दीवार पूरी की गई है.
थिंकटैंक की रिपोर्ट के अनुसार, जब से अमेरिका और इजरायल ने हमले शुरू किए हैं, सुरंग के एंट्री गेट को मजबूत किया गया है और जमीनी वाहनों की पहुंच रोकने के लिए आंशिक रूप से भरा गया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह से सील नहीं किया गया है.
फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के फेलो सैम लेयर ने रॉयटर्स को बताया कि सुरंग के एंट्री गेट की मजबूती बढ़ाने से 'बंकर बस्टर जैसे भेदने वाले हथियारों से निशाना बनाना' मुश्किल हो सकता है.
यह भी पढ़ेंः प्रदर्शन के दौरान हिरासत या गिरफ्तारी हो तो आपके पास क्या होते हैं संवैधानिक अधिकार? Explainer
क्या पिकएक्स माउंटेन काम कर रहा है?
इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने जब पिकएक्स माउंटेन को निशाना बनाने की धमकियां दी थीं, तब उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को वहां कोई गतिविधि नहीं दिख रही है.
उन्होंने कहा, 'वे अपनी परमाणु स्थिति को ठीक से नहीं संभाल पा रहे हैं. हर बार जब हम इसके बारे में सुनते हैं, तो हम उसे उड़ा देते हैं. इसलिए उन्हें इस बारे में बात करना पसंद नहीं है. लेकिन हम शायद जल्द ही पिकएक्स पर भी कोशिश करेंगे.'
ISIS थिंकटैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसका आकलन है कि यह फैसिलिटी अभी चालू नहीं है, लेकिन कंस्ट्रक्शन का काम जारी है और केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि यह कब चालू हो सकती है.
थिंकटैंक का कहना है कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या ईरान अभी भी वहाँ बड़े पैमाने पर असेंबली सुविधा स्थापित करने की योजना बना रहा है।
ISIS की रिपोर्ट में कहा गया है, 'फिर भी अगर ईरान अपनी सेंट्रीफ्यूज निर्माण क्षमता को फिर से बनाना शुरू करता है, तो वह पिकएक्स माउंटेन में एक छोटी सेंट्रीफ्यूज असेंबली यूनिट स्थापित करने की योजना बना सकता है जो परमाणु हथियार कार्यक्रम में काम आ सके.'
यह भी पढ़ेंः पाक रह जाएगा हाफ...अगर बलूचों ने करा लिया मुल्क आजाद तो क्या होगा? Explained
पिकएक्स माउंटेन पर हमला कैसे किया जा सकता है?
'द गार्डियन' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विशेषज्ञों का आकलन है कि जमीन में बहुत गहराई में बना यह कॉम्प्लेक्स अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बंकर बस्टर बमों की पहुंच से बाहर है. हवाई हमलों में भी कुछ हद तक अनिश्चितता होती है, क्योंकि जमीनी खुफिया जानकारी के बिना उनकी प्रभावशीलता का आकलन करना मुश्किल हो सकता है.
2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद पेंटागन की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि हुए नुकसान से परमाणु कार्यक्रम शायद एक से दो साल पीछे चला गया, लेकिन उस निष्कर्ष में काफी अनिश्चितता थी.
ISIS के थिंक-टैंक ने कहा कि 'यह जगह ग्राउंड ऑपरेशन के लिए ज्यादा सही हो सकती है. हालांकि, इस फैसिलिटी में कुछ लूपहोल भी हो सकता है जिनका फायदा हवाई हमलों के जरिए जमीन के अंदर तक घुसने वाले हथियारों से उठाया जा सकता है.'
ट्रम्प के लिए जमीनी कार्रवाई करना अब तक एक 'रेड लाइन' रही है और अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव बढ़ने के बावजूद, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वह इस तरह के कदम पर विचार करने के करीब भी हैं.
सैम लेयर ने रॉयटर्स से कहा कि हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि पिकएक्स माउंटेन पर ऐसी गतिविधियां चल रही हैं जिन्हें ईरानी जारी रखना चाहते हैं, लेकिन वे संभावित हमले को लेकर इतने चिंतित भी हैं कि अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए कदम उठा रहे हैं.
यह भी पढ़ेंः अमेरिकी टैरिफ से बचने को भारत ने निकाला वो रास्ता, चीन की हालत होगी खस्ता!
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं