नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. जंतर-मंतर पर जहां 25 दिन से प्रदर्शन जारी है तो वहीं अब संसद में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहती है. सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है. हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि वह स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा करना चाहती है.
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए पेपर लीक और 20 जुलाई को हुई पुलिस की कथित बर्बरता पर चर्चा के लिए 'स्थगन प्रस्ताव' को मंजूरी दी जाए. उन्होंने कहा कि जब पूरा देश छात्रों का दर्द महसूस कर रहा है तो सदन के बाकी सभी कामकाज रोक दिए जाने चाहिए और संसद के लिए यह मुद्दा सबसे ऊपर होना चाहिए.
वेणुगोपाल ने मांग की कि विपक्ष इस मुद्दे पर 'स्थगन प्रस्ताव' के जरिए चर्चा करना चाहता है. उन्होंने नियम 193 के तहत चर्चा से इनकार कर दिया.
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि चर्चा का समय और अवधि सभी दलों से बातचीत के बाद तय की जाएगी.
संसद में चर्चा के नियम क्या हैं?
संसद का कामकाज कैसे चलेगा, इसके लिए रूलबुक है. इसमें वे नियम भी लिखे हैं, जिनके जरिए संसद में किसी मुद्दे पर चर्चा की मांग की जा सकती है.
संसद में अगर किसी मुद्दे पर सिर्फ आधे घंटे की चर्चा करना चाहता है तो उसके लिए नियम 55 है. इस नियम के तहत एक सदस्य आधे घंटे की चर्चा शुरू कर सकता है.
इस नियम के तहत, चर्चा से तीन दिन पहले एक नोटिस देना होता है, जिसमें उस चर्चा का कारण बताना होता है. अध्यक्ष चाहें तो उस नोटिस की अनुमति दे सकते हैं या खारिज कर सकते हैं. चर्चा के दौरान ज्यादा से ज्यादा 4 अन्य सांसद सवाल पूछ सकते हैं.
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नियम 193 के तहत चर्चा क्यों नहीं?
संसद में चर्चा के लिए नियम 193 भी है. इसके तहत कोई सांसद जनहित से जुड़े मामले पर चर्चा शुरू कर सकता है. इसे लेकर अध्यक्ष को नोटिस देना है, जिसमें उस विषय की जानकारी और उसे उठाने के कारण बताए जाते हैं.
संसद में सांसद इस मामले को उठाता है और फिर बाकी सांसद उस पर चर्चा करते हैं. चर्चा के आखिर में संबंधित मंत्री जवाब देते हैं.
इस नियम के अलावा नियम 184 भी है, जिसके तहत किसी मुद्दे को प्रस्ताव के तौर पर उठाया जाता है. इस पर चर्चा होती है और मंत्री के जवाब के बाद प्रस्ताव पर वोटिंग होती है.
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह नियम 193 के तहत चर्चा नहीं चाहती, क्योंकि इसमें सिर्फ चर्चा होगी और मंत्री जवाब देंगे.
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स्थगन प्रस्ताव से क्या होगा फिर?
विपक्ष का कहना है कि स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा होनी चाहिए. नियम 56, 57 और नियम 58 के तहत स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की जा सकती है. स्थगन प्रस्ताव आता है तो संसद का सारा कामकाज रोककर सिर्फ उसी मुद्दे पर चर्चा की जाती है.
नियम 56 कहता है कि सदन के स्पीकर की अनुमति से स्थगन प्रस्ताव लाया जा सकता है. नियम 57 के तहत सुबह 10 बजे से पहले स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया जाना जरूरी है. अगर 10 बजे के बाद नोटिस दिया जाता है तो उस पर अगले दिन चर्चा होगी.
वहीं, नियम 58 में उन 8 शर्तों के बारे में बताया गया है, जिसके पूरा होने पर ही स्थगन प्रस्ताव लाकर किसी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. ये 8 शर्तें हैं:-
- एक ही सत्र में एक ही मामले पर एक से ज्यादा स्थगन प्रस्ताव नहीं ला सकते.
- स्थगन प्रस्ताव के जरिए उसी मुद्दे पर चर्चा होगी, जिसके लिए इसे लाया गया है.
- प्रस्ताव हाल ही में हुई किसी घटना या मामले तक सीमित होगा.
- स्थगन प्रस्ताव में विशेषाधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जाएगा.
- प्रस्ताव से ऐसे मामले पर चर्चा फिर नहीं होगी, जिस पर उसी सत्र में पहले ही चर्चा हो चुकी हो.
- ऐसे मुद्दे को नहीं उठाया जाएगा, जिस पर चर्चा के लिए पहले ही समय तय हो चुका है.
- प्रस्ताव ऐसे किसी भी मामले से जुड़ा नहीं होगा, जो किसी भी अदालत में चल रहा हो.
- ऐसा मामला नहीं उठाया जाएगा, जिसे उठाने के लिए संविधान या इन नियमों के तहत अलग से नोटिस देना जरूरी हो.
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स्थगन प्रस्ताव मंजूर होने का मतलब क्या?
चर्चा से पहले सांसद स्पीकर को स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देते हैं. PRS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर स्थगन प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो वोटिंग के बाद सदन स्थगित हो जाता है.
स्थगन प्रस्ताव के पास होने का मतलब है कि सरकार की नीतियों से जबरदस्त असहमति जताई जा रही है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार गिर गई.
पिछले 10-12 सालों में विपक्ष कई बार स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग कर चुका है. हालांकि, अब तक सिर्फ एक ही बार स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा हुई थी. अगस्त 2015 में ललित मोदी विवाद पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाया गया था. चर्चा के बाद जब इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो ध्वनिमत से ये खारिज हो गया था.
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