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ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान BRICS समिट के लिए आएंगे दिल्ली- रिपोर्ट 

अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच अहम होगी ईरानी राष्ट्रपति की यह यात्रा, इससे पहले जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे.

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान BRICS समिट के लिए आएंगे दिल्ली- रिपोर्ट 
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान BRICS समिट के लिए आएंगे दिल्ली- रिपोर्ट 
  • ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेंगे- रिपोर्ट
  • भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित करेगा
  • जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए थे

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आएंगे. न्यूज एजेंसी एएनआई ने ईरानी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार, 14 अगस्त को यह रिपोर्ट छापी है. भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा. यह सम्मेलन भारत की राजधानी नई दिल्ली में होने वाला है. अमेरिका और ईरान के बीच 5 महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के बीच पेजेशकियन की भारत यात्रा काफी अहम मानी जा रही है.

इस सम्मेलन की मेजबानी भारत के तय किए गए विषय “मजबूती, नए प्रयोग, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण” के तहत होगी. भारत ने 2026 की शुरुआत में ब्रिक्स की अध्यक्षता ब्राजील से संभाली थी.

बता दें अक्टूबर 2024 में पेजेशकियन ने रूस के कजान शहर में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी.

ईरान 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था. उसके साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी फुल टाइम मेंबर बने थे. इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हुआ. इसके साथ संगठन के पूर्ण सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो गई.

जून में भारत आए थे ईरान के विदेश मंत्री

इससे पहले जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे. बैठक के बाद नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने दुनिया में शांति कायम करने में भारत की बढ़ती भूमिका की तारीफ की. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ती स्थिति को शांत करने में भारत और बड़ी भूमिका निभा सकता है.

अराघची ने साफ कहा कि तेहरान यानी ईरान को हथियारों या युद्ध के रास्ते में कोई भविष्य नजर नहीं आता. उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है. उनके मुताबिक, आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता बातचीत के जरिए समझौता करना है. ईरान की ओर से भारत की मध्यस्थता के लिए तैयार होने का संकेत देते हुए अराघची ने कहा, “भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का हम स्वागत करेंगे.”

अराघची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मिलकर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले देश व्यापार और कारोबारी सुरक्षा के लिए ईरान पर भरोसा कर सकते हैं. अराघची ने यह भी साफ किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा करने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी ईरान हमेशा निभाता रहेगा.

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