- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एकदूसरे पर बड़े हवाई हमले किए हैं. दोनों तरफ नुकसान हुआ है
- पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में आतंकियों के बहाने मासूम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगा है
- मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी हमलों में आम नागरिकों की मौत की पुष्टि की. यूएन में शिकायत भी की गई है
खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताकर अफगानिस्तान में बम बरसा रहे पाकिस्तान की पोल खुल गई है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकियों पर कार्रवाई के नाम पर आसिम मुनीर की फौज अफगानिस्तान में मासूम नागरिकों को निशाना बना रही है. स्कूलों पर बम गिराए जा रहे हैं. रिहाइशी इलाकों को भी नहीं बख्शा जा रहा.
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में खूनी संघर्ष
अफगानिस्तान की सेना ने गुरुवार देर रात पाकिस्तान में हमले किए. इसके बाद दोनों में जंग छिड़ गई. पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए. तालिबान ने भी जबाव दिया और राजधानी इस्लामाबाद, नौशेरा, जमरूद और एबटाबाद में पाकिस्तानी मिलिट्री ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की. दोनों तरफ से भारी नुकसान पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं.
देखें- अफगानिस्तान-पाकिस्तान में जंग तेज, इस्लामाबाद और एबटाबाद समेत कई सैन्य ठिकाने तबाह!
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से दखल की अपील
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खूनी संघर्ष कोई नई बात नहीं है. पिछले कुछ समय से खूनखराबा काफी बढ़ गया है. हाल ही में एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र और यूरोपियन यूनियन समेत अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से अपील की गई थी कि उन्हें दखल देकर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हमलों की जांच करनी चाहिए और ये पूछा जाना चाहिए कि वो किस आधार पर हमले कर रहा है.
'पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का शर्मनाक पैटर्न'
'टाइम्स ऑफ इजरायल' में मिडिल ईस्ट मामलों के एक्सपर्ट माइकल एरिजांती ने हाल ही में लिखा था कि 22 फरवरी को पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक एक शर्मनाक पैटर्न दिखाता है. पाकिस्तान बेगुनाह अफगान नागरिकों पर मौत बरसा रहा है और हमले को सेल्फ डिफेंस की आड़ लेकर छिपा रहा है. उन्होंने यहां तक लिखा कि यह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) को टारगेट करने के बारे में नहीं है. यह अफगान नागरिकों पर खुला हमला है, संप्रभुता का उल्लंघन है, जिसे अब बंद होना चाहिए.
आतंकी बताकर किए थे हवाई हमले
एक्सपर्ट ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में पाकिस्तानी जेट अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों के ऊपर गरजे और तथाकथित “आतंकी ठिकानों” पर हमला किया. पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए इस ऑपरेशन में 70-80 आतंकी मारे गए.
मानवाधिकार संगठनों ने बताई सच्चाई
एरिजांती ने पाकिस्तान के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े इन हमलों के पीछे की डरावनी सच्चाई दिखाते हैं. अफगानिस्तान में यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन का कहना था कि हमले में 13 आम नागरिक मारे गए और सात घायल हुए, जिनमें औरतें और बच्चे भी थे. अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने अकेले नंगरहार में ही 18 मौतों की जानकारी दी थी जबकि तालिबानी अधिकारियों और चश्मदीदों ने 20 मौतों की पुष्टि की थी.
एरिजांती के मुताबिक, अफगानिस्तान ने वैश्विक स्तर पर यह मुद्दा उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत दर्ज कराई और पाकिस्तानी हमलों को रोकने व निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है. तालिबान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आम लोगों की सुरक्षा की मांग करते हुए पाकिस्तान को जवाब देने की कसम खाई है.
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