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धोखे से कब्जा करके बैठे पाकिस्तान ने PoK को कैसे कर दिया बर्बाद? गवाही देते हैं ये आंकड़े

पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर फिर जल रहा है. लेकिन वहां की सरकार और सेना लोगों पर गोलियां चलवा रही है. सच तो यह है कि पाकिस्तान ने PoK को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है.

धोखे से कब्जा करके बैठे पाकिस्तान ने PoK को कैसे कर दिया बर्बाद? गवाही देते हैं ये आंकड़े
पाकिस्तान ने धोखे से कश्मीर पर कब्जा कर लिया था. (सांकेतिक तस्वीर)
AFP
नई दिल्ली:

आजादी के बाद कबाइलियों की आड़ में अपनी सेना को भेजकर पाकिस्तान ने जिस कश्मीर पर धोखे से कब्जा कर लिया था, उसे उसने बर्बाद कर दिया है. आलम ये है कि बंटवारे के बावजूद पाकिस्तान न तो खुद आगे बढ़ पाया और न ही उसने उस कश्मीर को आगे बढ़ने दिया, जिसे उसने धोखे से कब्जा लिया था. पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यानी PoK बार-बार आजादी की मांग करता है, लेकिन वहां की सरकार और सेना लोगों को कुचल देती है. PoK दो हिस्सों में बंटा है. पहला- जिसे वह आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है और दूसरा- गिलगित-बल्टिस्तान. दोनों ही बर्बाद हो चुके हैं. आजाद जम्मू-कश्मीर के लोग तो आए दिन अपनी बुनियादी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी करते हैं, लेकिन हर बार की तरह उन पर गोलियां चला दी जाती हैं. एक बार फिर पाकिस्तान की सेना ने आजाद जम्मू-कश्मीर के लोगों पर गोलियां चलवाई हैं. पाकिस्तानी सरकार और सेना बोलती है कि वह प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि मिलिटेंट हैं. लेकिन सच तो यह है कि पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में 32 मासूमों की जान चली गई. 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए. 

क्या मांग रहे थे लोग?

आजाद जम्मू-कश्मीर के लोग सिर्फ इतना ही मांग रहे थे कि विधानसभा की 45 में से 12 सीटें जो कथित शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं, उन्हें खत्म किया जाए. 

सरकार दावा करती है कि ये वो शरणार्थी हैं, जो बंटवारे और कई जंगों के बाद कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से आकर पाकिस्तान में बसे. लेकिन सच तो यह है कि इसके पीछे पाकिस्तान की अपनी चाल है.

PoK के रावलकोट के पत्रकार इरशाद महमूद ने फ्रंटलाइन मैग्जीन को बताया कि इन 12 सीटों में से 8 आमतौर पर पंजाब प्रांत में सत्ताधारी पार्टी के खाते में जाती हैं. दो सीटें सिंध प्रांत में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) जबरदस्ती ले लेती है, जबकि कुछ मामलों में ऐसी पार्टियों ने भी सीटें हासिल की हैं, जिनका कश्मीर से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में अदालतों ने पहले भी इन सीटों पर जीतने वालों को अयोग्य करार दिया है.

इन 12 सीटों को जिन शरणार्थियों के लिए आरक्षित किया गया है, वे कश्मीर में भी नहीं रहते, बल्कि पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं. 

जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि ये 12 सीटें स्थानीय प्रतिनिधित्म को कमजोर करती हैं. उसने इस सिस्टम को खत्म करने की मांग की है. यहां 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.

यह भी पढ़ेंः PoK Explained: इतिहास, टकराव और पाकिस्तान को मिलने वाले फायदे की कहानी, PoK पाकिस्तान के लिए क्यों इतना अहम?

कैसा है PoK?

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि PoK दो हिस्सों में बंटा है. ये पूरा इलाका 90,972 वर्ग किलोमीटकर में फैला हुआ है. आजाद जम्मू-कश्मीर 13,297 वर्ग किलोमीटर और गिलगित-बल्टिस्तान 72,495 वर्ग किलोमीटर में है. 

एक हिस्से को पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है. यहां का अपना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति है. यहां का अपना अलग संविधान है. हालांकि, ये और बात है कि यहां के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक के चुनावों में धांधली होती है और पाकिस्तानी सेना और सरकार की पसंद का व्यक्ति यहां सरकार चलाता है.

PoK की सीमा कई देशों से लगती है. आजादी के बाद अक्टूबर 1947 में कबायलियों की आड़ में पाकिस्तान ने इस पर कब्जा कर लिया था. बाद में 1949 में आजाद जम्मू-कश्मीर के नेताओं और पाकिस्तानी सरकार के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत गिलगित-बल्टिस्तान पाकिस्तान को मिल गया था. इसे 'कराची समझौता' कहा जाता है.

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पाकिस्तान ने बर्बाद कर दिया?

पाकिस्तान खुद खस्ताहाल है और उसने PoK की हालत और खराब कर दी है. वहां के लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए भी सड़क पर उतरना पड़ता है.

इसे इस आंकड़े से ही समझ लीजिए कि पाकिस्तान की तुलना में आजाद जम्मू-कश्मीर में साक्षरता दर कहीं ज्यादा है, लेकिन बेरोजगारी दर भी ज्यादा है. आजाद जम्मू-कश्मीर की सरकार के आंकड़े बताते हैं कि यहां साक्षरता दर 77.5% है, जबकि पूरे पाकिस्तान की साक्षरता दर 62.4% है. लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान में बेरोजगारी दर 6-7% लेकिन आजाद जम्मू-कश्मीर में 11% तक है.

यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि 2020 तक PoK की बेरोजगारी 6-7% थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 9 से 11% तक पहुंच गई.

इसके अलावा, पाकिस्तान में हर व्यक्ति की औसत कमाई 1,900 डॉलर है. ये इसलिए ज्यादा है, क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था रेमिटेंस यानी बाहर से आने वाले पैसों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. पाकिस्तान के जो लोग विदेशों में काम करते हैं, वह अपने घर पर पैसा भेजते हैं, इस कारण प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है.

लेकिन इसके उलट आजाद जम्मू-कश्मीर के हालात खराब हैं. यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 तक PoK में औसत कमाई 1,400-1,500 डॉलर थी जो 2025 तक घटकर 1,300 से 1,400 डॉलर हो गई. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गिरावट के कारण लोगों का खर्च कम हो गया है और लोकल डिमांड कमजोर हो गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियां और भी धीमी हो गई हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि PoK की आर्थिक हालत बद से बदतर हो जाती है.

इतना ही नहीं, पाकिस्तान की सरकार ने PoK को दिए जाने वाले बजट में 16% की कटौती भी कर दी है. 2025 में पाकिस्तानी सरकार ने PoK का बजट 75 अरब से घटाकर 63 अरब पाकिस्तानी रुपये कर दिया था. जबकि, भारत जम्मू-कश्मीर के लिए लगातार बजट बढ़ा रहा है. इसी साल सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए 43,290 करोड़ रुपये का बजट रखा है. 2024-25 की तुलना में यह लगभग 5 फीसदी ज्यादा है.

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