विज्ञापन

चीन के कर्ज में गले तक डूबा पाक, EMI चुकाने को डॉलर नहीं, 'सिबिल' सुधरवाने शरीफ जा रहे बीजिंग

पाकिस्तान कर्ज संकट में फंसा है और EMI चुकाने के लिए डॉलर नहीं हैं. ऐसे में PM शहबाज शरीफ 23-26 मई तक चीन दौरे पर रहेंगे. चीन में वो कर्ज में मोहलत की मांग करेंगे.

चीन के कर्ज में गले तक डूबा पाक, EMI चुकाने को डॉलर नहीं, 'सिबिल' सुधरवाने शरीफ जा रहे बीजिंग
  • पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और विदेशी कर्ज की किस्त चुकाने के लिए पर्याप्त डॉलर नहीं बचा है.
  • पाकिस्तान के कुल बाहरी कर्ज का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा चीन से लिया गया है जो 30 अरब डॉलर के करीब है.
  • प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन से दो-तीन साल की कर्ज चुकाने में मोहलत मांगने के लिए बीजिंग का दौरा करेंगे.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब कर्ज के दबाव में पूरी तरह घिर चुका है. हालत यह है कि देश के पास अपने विदेशी कर्ज की किस्त (EMI) चुकाने के लिए भी पर्याप्त डॉलर नहीं बचे हैं. पाकिस्तान के कुल बाहरी कर्ज का करीब 25 फीसदी हिस्सा अकेले चीन का है, जो 27 से 30 अरब डॉलर के बीच बताया जा रहा है. 

इसी संकट से राहत पाने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई 2026 तक चीन की आधिकारिक यात्रा पर बीजिंग पहुंचेंगे. इस दौरे का मकसद साफ है, कर्ज चुकाने के लिए वक्त लेना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की ‘क्रेडिट प्रोफाइल' को बचाए रखना.

चीन से 2-3 साल की मोहलत की मांग

पाकिस्तान इस समय चीनी बैंकों, खासकर चीन के एक्जिम बैंक से लिए गए अरबों डॉलर के कर्ज को चुकाने में असमर्थ नजर आ रहा है. ऐसे में शरीफ सरकार चीन से इन कर्जों के भुगतान को 2 से 3 साल टालने (rescheduling) की मांग कर रही है. अगर चीन से यह राहत नहीं मिलती है, तो पाकिस्तान के लिए डिफॉल्ट का खतरा और बढ़ सकता है.

यह भी पढ़ें- अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा तो दुनिया में 2008 जैसी आ सकती है मंदी: रिपोर्ट

IMF डील के लिए ‘गारंटी' की जरूरत

पाकिस्तान की नजर इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 6 से 8 अरब डॉलर के नए लोन पैकेज पर भी टिकी है. लेकिन IMF की सख्त शर्त है. IMF से पाकिस्तान को नया कर्ज तभी मिलेगा, जब अन्य बड़े कर्जदाता (चीन, सऊदी अरब) पुराने कर्ज की वसूली को लेकर दबाव न बनाएं. यही वजह है कि शहबाज शरीफ चीन से लिखित आश्वासन (No repayment pressure guarantee) लेने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि IMF से फंड मिलने का रास्ता साफ हो सके.

डॉलर संकट ने तोड़ी कमर

पाकिस्तान इस समय भारी डॉलर संकट से गुजर रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम है. आयात प्रभावित हुआ ही है. कर्ज चुकाने की क्षमता बेहद कमजोर नजर आ रही है. देश के अंदर हालात इतने खराब हैं कि महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है. ऐसे में कर्ज की EMI चुकाना पाकिस्तान के लिए लगभग असंभव होता दिख रहा है.

यह भी पढ़ें- इजरायल पर अमेरिका ने लुटा दिए अपने हथियार, ट्रंप अब कंगाल, नेतन्याहू ने बचा लिया अपना जखीरा

CPEC बना बोझ?

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत लिए गए भारी कर्ज अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बोझ बनते दिख रहे हैं. जिन परियोजनाओं से आर्थिक सुधार की उम्मीद थी, वही अब कर्ज बढ़ाने का कारण बन गई हैं.

क्यों अहम है शरीफ का दौरा?

ऐसे आर्थिक संकट के बीच शहबाज शरीफ का यह दौरा पाकिस्तान के लिए ‘आर्थिक लाइफलाइन' जैसा है. पाकिस्तान को चीन से कर्ज भुगतान टालने की उम्मीद है. इससे IMF लोन का रास्ता साफ हो सकेगा. साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बनाए रखने की कवायद है. अगर इस दौरे से सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तो पाकिस्तान पर डिफॉल्ट का खतरा और गहरा सकता है.

गौरतलब है कि पाकिस्तान इस वक्त ऐसे मोड़ पर है जहां उसे कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है. चीन से मोहलत और IMF से राहत, दोनों पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी हुई है. ऐसे में शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा देश के आर्थिक भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com