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इजरायल पर अमेरिका ने लुटा दिए अपने हथियार, ट्रंप अब कंगाल, नेतन्याहू ने बचा लिया अपना जखीरा

US Iran War Updates: ईरान जंग के बीच आई नई रिपोर्ट के बाद लग रहे आरोप- अमेरिका ने मिसाइल रक्षा का ज्यादातर बोझ उठाया, जबकि इजरायल ने अपने स्टॉक को बचाकर रखा.

इजरायल पर अमेरिका ने लुटा दिए अपने हथियार, ट्रंप अब कंगाल, नेतन्याहू ने बचा लिया अपना जखीरा
US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान जंग बहुत महंगी साबित हो रही

US Iran War Updates: ईरान से लड़ाई में इजरायल का बचाव करते-करते अब अमेरिका खुद परेशानी में फंसता दिख रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के मिसाइल भंडार पर सवाल उठने लगे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल को बचाने के लिए अमेरिका ने इतनी ज्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलें दाग दीं कि उसके अपना स्टॉक आधा रह गया है. अब जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगी भी चिंता में हैं. डर इस बात का है कि अगर अचानक चीन, नॉर्थ कोरिया या फिर ईरान के साथ नया तनाव बढ़ा, तो क्या अमेरिका के पास खुद को और अपने दोस्तों को बचाने के लिए पर्याप्त मिसाइलें बची हैं?

रिपोर्ट में बड़ा दावा

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में ईरान के साथ हुए संघर्ष के दौरान इजरायल की हवाई सुरक्षा का बड़ा हिस्सा संभालने की वजह से अमेरिका के एडवांस मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का बड़ा स्टॉक खत्म हो गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि इस असंतुलन ने चिंता बढ़ा दी है कि क्या अमेरिका दुनिया भर में अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इजरायल की रक्षा के लिए 200 से ज्यादा टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस यानी THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलें दागीं. इसके अलावा पूर्वी भूमध्य सागर में मौजूद अपने नौसैनिक जहाजों से 100 से ज्यादा स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 इंटरसेप्टर भी लॉन्च किए गए.

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इससे अमेरिका के मिसाइल भंडार का लगभग आधा हिस्सा खत्म हो गया है.

वहीं दूसरी तरफ, इजरायल ने 100 से कम एरो इंटरसेप्टर और करीब 90 डेविड्स स्लिंग इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए. इनमें से कुछ का इस्तेमाल यमन और लेबनान में ईरान समर्थित समूहों द्वारा दागे गए कम ताकत वाले प्रोजेक्टाइल को रोकने के लिए किया गया. सैन्य विश्लेषकों ने द वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि ये आंकड़े अमेरिका और इजरायल की रक्षा साझेदारी की असली तस्वीर दिखाते हैं.

अमेरिका के लिए खतरा क्यों

इस रिपोर्ट के अनुसरा स्टिमसन सेंटर की सीनियर फेलो केली ग्रीको ने कहा कि ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं. अमेरिका ने मिसाइल रक्षा का ज्यादातर बोझ उठाया, जबकि इजरायल ने अपने स्टॉक को बचाकर रखा. भले ही रणनीति सही रही हो, लेकिन अब अमेरिका के पास सिर्फ करीब 200 THAAD इंटरसेप्टर बचे हैं और उनकी उत्पादन क्षमता मांग के मुकाबले बहुत धीमी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान और साउथ कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगी भी इस कमी को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि दोनों देश चीन और नॉर्थ कोरिया से खतरे को रोकने के लिए अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर हैं. एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने द वॉशिंगटन पोस्ट से कहा, “कुल मिलाकर अमेरिका ने लगभग 120 ज्यादा इंटरसेप्टर दागे और ईरानी मिसाइलों से दोगुना ज्यादा मुकाबला किया.”

अधिकारी ने इशारा किया कि अमेरिका-इजरायल पार्टनरशिप को लेकर जो चमक-दमक दिखाई जाती है, असल सैन्य बोझ उससे काफी अलग था. अखबार ने यह भी बताया कि इजरायल की सेना अपनी कुछ मिसाइल रक्षा बैटरियों को रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद करने वाली है. अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने का फैसला लेते हैं, तो अमेरिकी इंटरसेप्टर स्टॉक पर दबाव और बढ़ सकता है.

ट्रंप की सेना ने क्या कहा?

एक बयान में अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इजरायल और अमेरिका के बीच इस्तेमाल किए गए हथियारों के संतुलन का बचाव किया. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने द पोस्ट से कहा, “बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर सिर्फ उस बड़े नेटवर्क का एक हिस्सा हैं, जिसमें कई तरह के सिस्टम और क्षमताएं शामिल हैं. यही मिलकर कई स्तर वाली और एकीकृत हवाई रक्षा व्यवस्था बनाते हैं.”

पार्नेल ने कहा, “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान इजरायल और अमेरिका दोनों ने बराबरी से रक्षा का बोझ उठाया. इस अभियान में दोनों देशों ने लड़ाकू विमान, एंटी ड्रोन सिस्टम और कई दूसरी एडवांस एयर और मिसाइल डिफेंस तकनीकों का बेहद प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया.”

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