- पाकिस्तान में तीन प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं जिनमें हिंगलाज माता मंदिर सबसे बड़ा और पवित्र माना जाता है
- पंजाब के कटास राज मंदिर का संबंध भगवान शिव और कृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं से है
- सिंध प्रांत की कालका गुफा मंदिर देवी कालका को समर्पित है और हिंगलाज मंदिर से सुरंगों से जुड़ी मानी जाती है
इस्लामिक देश पाकिस्तान का नाम आते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में धर्म और आध्यात्म को लेकर एक ही तरह की तस्वीर बनती है. लेकिन इसी देश में हिंदू धर्म से जुड़े कई बेहद पुराने और खास धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं. इनमें कुछ मंदिर सैकड़ों साल पुराने बताए जाते हैं, तो कुछ का संबंध हिंदू धर्म की बड़ी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है. क्या आपको पता है कि पाकिस्तान में कुल 3 प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं. पाकिस्तान में कई मंदिर गुफाओं, पहाड़ियों और समुद्र के किनारे बने हैं. इन जगहों पर आज भी हिंदू श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा करते हैं. आइए जानते हैं पाकिस्तान के उन पांच प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों के बारे में, जिनकी अपनी अलग कहानी है.
1. हिंगलाज माता मंदिर, बलूचिस्तान
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मौजूद हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के सबसे बड़े और सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है. यह पाकिस्तान में मौजूद तीन शक्ति पीठों में से एक है. बाकी दो शक्ति पीठ शिवहरकराय और शारदा पीठ हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, यहां माता सती का मस्तक (ब्रह्मरंध्र) गिरा था. यह मंदिर एक गुफा के अंदर बना है और देवी सती को समर्पित है. हर साल यहां हिंगलाज यात्रा होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसे पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिंदू धार्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है.

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर (फोटो- हिंगलाज माता मंदिर/फेसबुक)
2. कटास राज मंदिर, पंजाब, पाकिस्तान
पंजाब में मौजूद कटास राज मंदिर कई हिंदू मंदिरों का एक समूह है. ये मंदिर इसी नाम की एक झील के आसपास बने हैं. मान्यता है कि भगवान शिव अपनी पत्नी सती के शरीर को लेकर धरती पर घूम रहे थे. इसी दौरान उनकी एक आंख से आंसू गिरा और उसी जगह पर यह पवित्र स्थल बना. एक और मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने खुद यहां शिवलिंग बनाया था और भगवान शिव के सम्मान में मंदिर बनवाया था. पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने भारत के श्रद्धालुओं को इस मंदिर में जाने की सीमित अनुमति दी है. साल 2024 में महाशिवरात्रि के मौके पर भारत से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 112 वीजा जारी किए गए थे.

3. कालका गुफा मंदिर, सिंध
कालका गुफा मंदिर को कालका देवी मंदिर भी कहा जाता है. यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अरोड़ा की कालका पहाड़ियों में बनी एक प्राकृतिक गुफा के अंदर मौजूद है. यह मंदिर हिंदू धर्म में ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, देवी कालका देवी इसी जगह प्रकट हुई थीं. कहा जाता है कि वह हिंगलाज माता मंदिर की यात्रा पर जा रही थीं.

पाकिस्तान के सिंध में मौजूद कालका गुफा मंदिर (फोटो- sindhrenaissance.com)
4. पंचमुखी हनुमान मंदिर, कराची
कराची में मौजूद पंचमुखी हनुमान मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित एक खास मंदिर है. कहा तो जाता है कि यह मंदिर 1,500 साल पुराना है. इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद भगवान हनुमान की मूर्ति है. आमतौर पर मंदिरों में मूर्तियां बनाई जाती हैं, लेकिन इस मूर्ति को 'स्वयंभू' माना जाता है. संस्कृत में स्वयंभू का मतलब है कि जो अपने आप प्रकट हुआ हो. यह ऐतिहासिक मंदिर सिर्फ पाकिस्तान के हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र है.

कराची में मौजूद सैंकड़ों साल पुराना पंचमुखी हनुमान मंदिर (फोटो- reeheritage/FB)
5. वरुण देव मंदिर, कराची
कराची के मनौरा बीच पर मौजूद वरुण देव मंदिर एक प्राचीन धार्मिक स्थल है. इसका संबंध सिंधी हिंदुओं के समुद्री इतिहास से भी जोड़ा जाता है. यह मंदिर समुद्र के देवता वरुण को समर्पित है. कहा जाता है कि पुराने समय में व्यापारी और नाविक समुद्री यात्रा पर जाने से पहले यहां पूजा करते थे.

पाकिस्तान के कराची में मौजूद वरूण देव मंदिर (फोटो- Indian Reunification Association/FB)
समय के साथ मंदिर की इमारत काफी खराब हो गई थी. इसके बाद इसे बचाने और दोबारा ठीक करने की कोशिशें की गईं. चुरियो जबल की पहाड़ियों से लेकर मनौरा के समुद्र तट तक मौजूद ये धार्मिक स्थल सिंध क्षेत्र की अलग-अलग पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को दिखाते हैं.
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