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एक वायरल वीडियो और जल उठा उत्तरी आयरलैंड, प्रवासियों के खिलाफ दंगाई क्यों बनी नकाबपोश भीड़?

उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में बात चाकू हमले की एक घटना से हुई लेकिन अब यह पूरा मामला प्रवासियों के विरोध में बदल चुका है. वजह है कि हमलावर सूडान से आया था और उसे देश में शरण दी गई थी.

एक वायरल वीडियो और जल उठा उत्तरी आयरलैंड, प्रवासियों के खिलाफ दंगाई क्यों बनी नकाबपोश भीड़?
Northern Ireland Anti-immigration protest: उत्तरी आयरलैंड में भड़की हिंसा (फोटो- एएफपी)
  • उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में चाकू हमले के बाद बड़े पैमाने पर प्रवासी-विरोधी प्रदर्शन शुरू
  • भीड़ बाहर देश से आकर बसे लोगों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही, हिंसा कर रही
  • इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में इमिग्रेशन और शरणार्थियों को लेकर चल रही बहस को फिर से गर्म कर दिया है

यूरोप के एक देश में इस समय नकाबपोश भीड़ दंगाई बनी हुई है. वह इमारतों में आग लगा रही है, कारों का राख कर रही है और सड़क पर उत्पात मचा रही है. हम बात कर रहे हैं उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट की, जहां दो दिनों से तनाव और हिंसा का माहौल है. एक चाकू हमले के बाद शहर में बड़े पैमाने पर प्रवासी-विरोधी यानी एंटी-इमिग्रेशन प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. यह भीड़ बाहर देश से आकर बसे लोगों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही, हिंसा कर रही. निशाना बनाकर की जा रही आगजनी के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर बाहर निकलना पड़ा. इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में इमिग्रेशन और शरणार्थियों को लेकर चल रही बहस को फिर से गर्म कर दिया है. 

तीन सवालों का जवाब देकर आपको पूरी बात बताते हैं.

सवाल नंबर 1- बेलफास्ट में हिंसा की शुरुआत कैसे हुई?

बेलफास्ट में हिंसा की शुरुआत एक चाकू हमले के बाद हुई. यह हमला सोमवार को हुआ था और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. वीडियो में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर चाकू से कई बार हमला करता दिखाई देता है. यहां के दक्षिणपंथी समूहों ने दावा किया कि सूडान से आया यह आरोपी हमलावर दरअसल सिर काटने की कोशिश कर रहा था. 

बेलफास्ट में दंगाई बनी नकाबपोश भीड़ (फोटो- एएफपी)

बेलफास्ट में दंगाई बनी नकाबपोश भीड़ (फोटो- एएफपी)

पीड़ित लगभग 40 साल का व्यक्ति है, जिसे आंखों और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं. पुलिस ने घटनास्थल से एक किचन नाइफ (रसोई का चाकू) बरामद किया है. वैसे तो आधिकारिक रूप से हमले के आरोपी 30 वर्षीय व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन उस पर हत्या की कोशिश, सार्वजनिक जगह पर धारदार हथियार रखने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं. उसे आज यानी बुधवार को अदालत में पेश किया जाना था.

बाद में ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि आरोपी एक सूडानी शरणार्थी है, जिसे 2023 में शरणार्थी का दर्जा मिला था और उसका निवास परमिट 2028 तक वैध है.

सवाल नंबर 2- प्रदर्शन हिंसक कैसे हो गया?

चाकूबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद मंगलवार शाम को सैकड़ों प्रदर्शनकारी बेलफास्ट के अलग-अलग इलाकों में जमा हो गए. इनमें से कई लोगों ने अपने चेहरे ढके हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें बंद कर दीं और कई जगहों पर आगजनी शुरू हो गई. इस भीड़ ने एक बस और कई कारों को आग लगा दी. शहर के  बीच में एक इमारत में भी आग लग गई, जिसके बाद वहां रहने वाले लोगों को बाहर निकालना पड़ा.

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मूल के इंजीनियर इमरान एक साल से बेलफास्ट में रह रहे हैं. उन्होंने बताया कि पहले कूड़ेदानों में आग लगाई गई. इसके बाद लोग पेट्रोल बम फेंकने लगे. धीरे-धीरे आग बढ़ गई और धुआं इमारत के अंदर भर गया. बाद में दमकल कर्मियों ने लोगों को बाहर निकलने को कहा. वहीं एक महीने पहले बेलफास्ट आई 36 वर्षीय चिली की नागरिक कैमिला ने कहा कि यह सब बहुत डरावना था. उन्होंने कहा कि लोगों के गुस्से को समझा जा सकता है, लेकिन इन मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से भी बात की जा सकती है.

हालात इतने खराब हो गए कि शहर के ऊपर पुलिस हेलीकॉप्टर गश्त करते रहे और कई दुकानों को समय से पहले बंद करना पड़ा. 

सवाल नंबर 3- नेता और पुलिस अधिकारी क्या कह रहे?

उत्तरी आयरलैंड की प्रथम मंत्री (फर्स्ट मिनिस्टर) मिशेल ओ'नील ने इन प्रदर्शनों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि नकाबपोश लोगों द्वारा परिवारों को उनके घरों से निकालने पर मजबूर कर देना बेहद शर्मनाक और कायरता से भरा है. उन्होंने कहा कि नस्लवाद, डराना-धमकाना और हिंसा हर स्थिति में गलत है और इसकी कोई सफाई नहीं दी जा सकती. वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस चाकू हमले को “भयानक” और “घिनौना” बताया. उत्तरी आयरलैंड की पांच प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भी संयुक्त बयान जारी कर कहा कि समाज में ऐसी क्रूरता की कोई जगह नहीं है.

पुलिस प्रमुख जॉन बुचर ने बताया कि आरोपी 2023 में पेरिस और डबलिन के रास्ते ब्रिटेन पहुंचा था. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी का नाम किसी नेशनल सिक्योरिटी डेटाबेस में नहीं था और वह पहले पुलिस के रिकॉर्ड में भी नहीं था. पुलिस और नेताओं ने लोगों से वीडियो शेयर न करने की अपील की, क्योंकि यह डरावना वीडियो पीड़ितों और संबंधित लोगों को दोबारा मानसिक चोट पहुंचा सकता है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके बावजूद कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से वीडियो शेयर किया जाता रहा और लोगों से बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील होती रही.

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