इधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को साधने में जुटे हैं और उधर नॉर्थ कोरिया इसी से सीख लेकर अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है. नॉर्थ कोरिया के तानाशाह नेता किम जोंग उन ने नई मिसाइलों के टेस्ट का निरीक्षण किया है. ये मिसाइल समुद्र में चलने वाले एक युद्धपोत (डिस्ट्रॉयर) से छोड़ी गई थीं. नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने कहा कि ये हथियारों के टेस्ट रविवार को हुए थे. यह हाल के कई मिसाइल टेस्ट में से एक और टेस्ट है. यानी परमाणु हथियार से लैस यह देश एक के बाद एक मिसाइल टेस्ट को अंजाम दे रहा है.

मिसाइल टेस्ट खास क्यों था?
केसीएनए के अनुसार, दो स्ट्रैटेजिक क्रूज मिसाइल करीब 2 घंटे से थोड़ा ज्यादा समय तक उड़ीं. वहीं, एंटी-वारशिप मिसाइल 33 मिनट तक उड़ीं. इसमें बताया गया कि ये मिसाइल कोरिया के पश्चिमी समुद्र (जिसे वह येलो सी कहता है) के ऊपर तय रास्ते पर उड़ीं और अपने निशाने पर बहुत सटीक तरीके से लगीं. ये टेस्ट चोए ह्योन नाम के युद्धपोत से किए गए. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार यह 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर है. नॉर्थ कोरिया के पास ऐसे दो जहाज हैं, जो पिछले साल बनाए गए थे. किम जोंग उन देश की नौसेना को मजबूत करना चाहते हैं.
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केसीएनए द्वारा जारी एक फोटो में दिखा कि मिसाइल जहाज से छोड़े जाने के बाद उड़ान की शुरुआत में थी और उसके पीछे नारंगी आग की लपट दिख रही थी. केसीएनए ने कहा कि किम जोंग उन को दो और बन रहे जहाजों के हथियार सिस्टम की योजना के बारे में भी बताया गया. इन जहाजों को अभी नंबर 3 और नंबर 4 कहा जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने कहा कि वह इस बात से बहुत खुश हैं कि उनकी सेना की ताकत और तैयारी मजबूत हुई है. उन्होंने फिर कहा कि देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करना सबसे जरूरी काम है.

ईरान का उदाहरण और ट्रंप को मैसेज
नॉर्थ कोरिया पहले भी कह चुका है कि चोए ह्योन जहाज में बहुत ताकतवर हथियार लगे हैं. किम जोंग उन पिछले महीने से ऐसे जहाजों का कई बार निरीक्षण कर चुके हैं. विशेषज्ञों ने कहा कि इन मिसाइल टेस्ट का मकसद अमेरिका को दिखाना है कि अगर युद्ध हुआ, तो कहानी ईरान वाले हालात से अलग होगी. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार क्यूंगनाम यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट लिम एउल-चुल ने कहा, “युद्धपोत से बार-बार ऐसे मिसाइल छोड़ना अमेरिका को सीधा मैसेज है कि युद्ध के समय यह अमेरिका के जहाजों और एयरक्राफ्ट कैरियर को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है.”

अमेरिका की एक खुफिया कंपनी की सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए साउथ कोरिया की विपक्षी पार्टी पीपल पावर पार्टी के यू योंग-वोन ने कहा कि नॉर्थ कोरिया रूस की मदद से अपनी नौसेना को तेजी से आधुनिक बना रहा है. यह भी ध्यान रहे कि नॉर्थ कोरिया ने रूस की यूक्रेन पर हमले में मदद के लिए सैनिक और तोप के गोले भेजे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बदले में नॉर्थ कोरिया को रूस से सैन्य तकनीक मिल रही है.
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