- वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर तानाशाही, चुनावी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप हैं.
- मादुरो ने 2013 में ह्यूगो शावेज़ के निधन के बाद राष्ट्रपति पद संभाला और लगातार दोबारा चुने गए हैं.
- US प्रशासन ने मादुरो और उनके करीबियों पर प्रतिबंध लगाए और वेनेजुएला की नशीली दवाओं की तस्करी के आरोप लगाए.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो 10 जनवरी को सत्ता में तीसरी बार वापसी का पहला साल पूरा कर पाते, इससे पहले ही अमेरिका ने उनके देश पर हमला बोला. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर देश से बाहर लाया गया है. मादुरो पर तानाशाही, चुनावी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, विद्रोहियों को कुचलने और जनता को बदहाली में धकेलने जैसे आरोप लगे हैं. यूएन मानवाधिकार संगठन का दावा है कि उनके शासन में 20 हजार से ज्यादा लोगों की हत्याएं की गई हैं. 70 लाख वेनेजुएला नागरिक देश छोड़कर भाग गए हैं. वेनेजुएला में मीडिया पर कठोर प्रतिबंध हैं.
लेकिन निकोलस मादुरो के फर्श से अर्श बनने की कहानी भी दिलचस्प है. वेनेजुएला की राजधानी कराकस में ही पैदा हुए मादुरो कभी एक मेट्रो में बस ड्राइवर का काम करते थे और वहां की ट्रांसपोर्ट ट्रेड यूनियन के सदस्य थे. वामपंथी परिवार में जन्मे मादुरो के पिता भी ट्रेड यूनियन लीडर थे. रोमन कैथोलिक ईसाई मादुरो का दावा है कि उनके दादा-दादी यहूदी थे, लेकिन मादुरो खुद को भारत में सत्य साईं बाबा का अनुयायी भी मानते हैं.
जब राजनीति की पिच पर बैटिंग करने उतरे मादुरो
वेनेजुएला में जब 1992 में राष्ट्रपति कार्लोस एंड्रेस पेरेज को सत्ता से हटाने और ह्यूगो शावेज को जेल से रिहा कराने के लिए अभियान चला तो मादुरो ने इसकी अगुवाई की. शावेज ने पेरेज को सत्ता से हटाने के लिए गुरिल्ला आर्मी बनाई थी. यहीं से उनकी किस्मत ने पलटा खाया. शावेज की रिहाई के बाद मादुरो उनके शागिर्द बन गए और उनके फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट में सहायता की. मादुरो ने इसके लिए अभियान चलाया था.
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मादुरो को 1999 राष्ट्रीय संविधान सभा के लिए चुना गया और नए संविधान का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी मिली. मादुरो 2000 में नेशनल असेंबली के लिए भी चुने गए. ह्यूगो शावेज की सरकार में वो वर्ष 2006 से 2013 तक विदेश मंत्री रहे.शावेज 2012 में वाइस प्रेसिडेंट बने और जब शावेज जानलेवा कैंसर का खतरा झेल रहे थे, तब उन्होंने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. मार्च 2013 में शावेज की मौत के बाद मादुरो अंतरिम राष्ट्रपति बने.
वेनेजुएला में 14 अप्रैल 2013 को राष्ट्रपति चुनाव में 2 फीसदी से भी कम अंतर से जीत हासिल की. मादुरो ने वोटों की दोबारा गिनती की विपक्षी दलों की मांग खारिज कर दी. मादुरो ने सत्ता संभालते ही अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और तीन अमेरिकी राजनयिकों को निकाल दिया. उन पर सामाजिक संगठनों और नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों को कुचलने का आरोप लगा. 2014 में कई अमेरिकी पत्रकारों को भी देश से निकाला गया.
ओबामा काल में अमेरिका से बातचीत
अमेरिका में बराक ओबामा के राष्ट्रपति कार्यकाल में मादुरो ने अमेरिका से सीधी बातचीत को राजी हुए, लेकिन बात नही बनी. देश में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बीच मादुरो ने आर्थिक और फिर संवैधानिक आपातकाल लगा दिया. जुलाई 2017 में दोबारा नेशनल असेंबली चुनाव में मादुरो की जीत का दावा हुआ, लेकिन विपक्षी दलों ने इसमें धांधली का दावा करते हुए नतीजों को खारिज कर दिया. अमेरिका ने तब मादुरो, उनके परिजनों की संपत्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया.
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मादुरो फिर छह साल के लिए राष्ट्रपति बने
मादुरो ने 20 मई 2018 को छह साल फिर सत्ता में बने रहने के लिए राष्ट्रपति चुनाव में जीत का दावा किया. लेकिन 2013 में 80 की जगह 2018 में सिर्फ 46 फीसदी मतदान पर सवाल खड़े हुए. लैटिन अमेरिका देशों और कनाडा के समूह लीमा ग्रुप ने चुनाव को अवैध घोषित कर खारिज कर दिया.
मादुरो की हत्या की साजिश विफल
वेनेजुएला में 4 अगस्त 2018 को सैन्य परेड के दौरान मादुरो पर हथियारबंद ड्रोन से हमले का प्रयास हुआ. साजिश में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया.
तख्तापलट के प्रयासों का खुलासा
न्यूयॉर्क टाइम्स ने 8 सितंबर 2018 को खुलासा किया कि अमेरिकी और वेनेजुएला के सैन्य अधिकारियों के बीच मादुरो के तख्तापलट को लेकर गुप्त बैठकें हुई थीं.सीएनएन ने इस पर मुहर लगाई. अमेरिका ने मादुरो की पत्नी और अन्य करीबियों पर पाबंदियां लगाईं. बौखलाए मादुरो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और पड़ोसी लैटिन अमेरिकी देशों के खिलाफ जमकर आग उगली.
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पड़ोसी देशों ने नकारा
मादुरो ने बतौर राष्ट्रपति दूसरा कार्यकाल 10 जनवरी 2019 को शुरू किया. लेकिन ज्यादातर लैटिन अमेरिकी देशों ने उन्हें राष्ट्रपति के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया. लातिन अमेरिकी सदस्य देशों ने 19-6 के मत से मादुरो सरकार की अवैध ठहराया.
अमेरिकी अफसरों को अल्टीमेटम
वेनेजुएला में मादुरो सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच 23 जनवरी 2019 को नेशनल असेंबली के प्रमुख जुआन गुआइदो ने खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया.ट्रंप ने उन्हें मान्यता भी दे दी. मादुरो ने अमेरिका पर तख्तापलट के समर्थन का आरोप लगाया. साथ ही अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़ने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया.वहीं यूएन की रिपोर्ट में मादुरो पर अपने नागरिकों के दमन और उत्पीड़न का खुलासा हुआ.
मादुरो पर ड्रग्स, आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का नेता बताया गया. उन पर कोलंबिया के विद्रोही समूह एफएआरसी के साथ अमेरिका में ड्रग्स तस्करी का आरोप लगा. मादुरो ने मई 2020 में तख्तापलट के आरोप में दो अमेरिकी सैनिकों की गिरफ्तारी का दावा किया. हालांकि दिसंबर 2023 में समझौते के बाद आरोपियों को रिहा किया गया.
कोलंबियाई व्यवसायी एलेक्स साब, जो मादुरो का खजांची माना जाता था, उसको मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में अमेरिका को प्रत्यर्पित किया गया तो वेनेजुएला और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया. यूएन रिपोर्ट 20 सितंबर 2022 को पेश की गई, जिसमें वेनेजुएला की सेना के कथित अत्याचारों का दावा किया गया. जुलाई 2024 में जब राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो को फिर से विजेता घोषित किया गया तो वेनेजुएला के कई शहरों में हिंसा भड़क उठी.अमेरिका ने सितंबर 2024 में डोमिनिकन रिपब्लिक में मादुरो के विमान को जब्त कर लिया.
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वेनेजुएला में विपक्षी आंदोलन के विरोध के बावजूद मादुरो ने 10 जनवरी 2025 को तीसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के लिए शपथ ली लेकिन विरोध नहीं थमा. अमेरिका ने 6 फरवरी 2025 में मादुरो सरकार के दूसरे विमान को भी जब्त कर लिया.
अमेरिकी घेराबंदी और फिर हमला
अमेरिकी सेना ने नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वेनेजुएला की नौकाओं पर हमले शुरू कर दिए. मादुरो ने कहा कि वह वेनेजुएला की रक्षा के लिए आपातकाल लगाएंगे. वेनेजुएला ने सैन्य ठिकानों पर रूस निर्मित 5000 मिसाइलें तैनात होने का दावा किया. बात तब बढ़ी जब 24 नवंबर 2025 को अमेरिका ने मादुरो और उनके सरकारी सहयोगियों को एक विदेशी आतंकवादी संगठन का सदस्य घोषित किया. मादुरो ने तेल संगठन ओपेक को 30 नवंबर 2025 को लिखे पत्र में वेनेजुएला के तेल उत्पादन को नुकसान पहुंचाने और उनके देश की आर्थिक नाकेबंदी का आरोप अमेरिका पर लगाया.
निकोलस मादुरो की संपत्ति
वेनेज़ुएला के नेता निकोलस मादुरो की कुल संपत्ति (Net Worth) को लेकर सार्वजनिक अनुमानों में काफी अंतर देखा जाता है. इसका मुख्य कारण यह है कि वेनेज़ुएला में कोई पारदर्शी वित्तीय खुलासा उपलब्ध नहीं है और मादुरो ने भी कभी आधिकारिक संपत्ति विवरण सार्वजनिक नहीं किया है. इसी वजह से उनके बारे में उपलब्ध आंकड़े अक्सर अनिश्चित और विवादित रहते हैं.
ताजा और विश्वसनीय रिपोर्टों में आमतौर पर यह कहा गया है कि मादुरो की घोषित/अनुमानित व्यक्तिगत संपत्ति लगभग 2 मिलियन डॉलर है.
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