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ईरान में 'वेनेजुएला मॉडल' क्यों लागू करना चाहते हैं ट्रंप? सुप्रीम लीडर की कुर्सी के लिए कहा- 3 पसंद आ रहे

US-Israel War against Iran: डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि ईरान की जनता खुद मौजूदा सरकार को गिरा दे. उन्होंने कहा, "यह उन पर निर्भर करेगा कि वे ऐसा करना चाहते हैं या नहीं.

ईरान में 'वेनेजुएला मॉडल' क्यों लागू करना चाहते हैं ट्रंप? सुप्रीम लीडर की कुर्सी के लिए कहा- 3 पसंद आ रहे
US-Israel War against Iran: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के खिलाफ चार से पांच हफ्तों तक हमला जारी रख सकता है
  • ट्रंप ने वेनेजुएला मॉडल का उदाहरण दिया जहां युद्ध के बाद केवल शीर्ष नेता को हटाया गया, बाकी सरकार बनी रही
  • ट्रंप ने कहा कि ईरान की जनता भी मौजूदा सरकार को गिरा सकती है, लेकिन अमेरिका उनकी रक्षा का वादा नहीं करता
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका की सेना ईरान के खिलाफ अपना हमला चार से पांच हफ्तों तक जारी रख सकती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युद्ध के बाद तेहरान में सत्ता परिवर्तन के लिए वेनेजुएला मॉडल अपनाया जा सकता है, यानी केवल शीर्ष नेता को हटाया जाए और सरकार का बाकी ढांचा ज्यादातर वैसा ही बना रहे. न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक छोटे टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस अभियान को लंबे समय तक जारी रखने में सक्षम है और उन्होंने लैटिन अमेरिका में की गई अपनी हाल की एक सैन्य कार्रवाई और तख्तापलट का जिक्र किया.

ट्रंप ने कहा, "हमने वेनेजुएला में जो किया, मुझे लगता है वह बिल्कुल सही उदाहरण है." उनका मतलब ऐसे नतीजे से था जिसमें सिर्फ सैन्य कार्रवाई के बाद शीर्ष नेता को हटाया गया और सरकार का बड़ा हिस्सा अपने स्थान पर बना रहा. उन्होंने कहा, "दो लोगों को छोड़कर बाकी सबने अपनी नौकरी बनाए रखी."

गौरतलब है कि 3 जनवरी, 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में छापेमारी की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया. उन्हें तुरंत अमेरिका ले जाया गया, जहां वे वर्तमान में नार्को-आतंकवाद और ड्रग्स की तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे हैं. मादुरो की जगह उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कुर्सी संभाली और अब वो अमेरिका के साथ मिलकर काम करती दिख रही हैं.

जब ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका और इजराइल कितने समय तक मौजूदा स्तर के हमले जारी रख सकते हैं, तो ट्रंप ने कहा, "हमने चार से पांच हफ्तों का इरादा किया है." उन्होंने आगे कहा, "यह मुश्किल नहीं होगा. हमारे पास बहुत ज्यादा गोला बारूद है. हमारे हथियार दुनिया के कई देशों में अलग अलग जगहों पर रखे हुए हैं."

ईरान की कुर्सी के लिए मेरे पास तीन विकल्प हैं- ट्रंप

जब उनसे पूछा गया कि अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान का नेतृत्व कौन करेगा, तो ट्रंप ने कहा, "मेरे पास तीन बहुत अच्छे विकल्प हैं." उन्होंने कहा, "मैं अभी उनके नाम नहीं बताऊंगा. पहले काम पूरा होने दीजिए."

ट्रंप ने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि ईरान की जनता खुद मौजूदा सरकार को गिरा दे. उन्होंने कहा, "यह उन पर निर्भर करेगा कि वे ऐसा करना चाहते हैं या नहीं. वे कई सालों से इसके बारे में बात कर रहे हैं, इसलिए अब उनके पास मौका होगा." ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के नए नेता व्यवहारिक साबित होते हैं तो अमेरिका भविष्य में प्रतिबंध हटाने पर विचार कर सकता है, लेकिन उन्होंने यह वादा करने से इनकार किया कि अगर ईरान में लोग सरकार के खिलाफ उठ खड़े होते हैं तो अमेरिका उनकी रक्षा करेगा.

उन्होंने कहा, "मैं अभी किसी तरह का वादा नहीं कर सकता, अभी बहुत जल्दी है. हमें अभी बहुत काम करना है और हमने यह काफी अच्छी तरह किया है. मेरे हिसाब से हम तय समय से काफी आगे चल रहे हैं." ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि फारस की खाड़ी के अरब देशों को अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने की जरूरत है.

आगे और भी अमेरिकी सैनिकों की मौत हो सकती है

संघर्ष शुरू होने के लगभग 36 घंटे बाद ट्रंप ने माना कि आगे और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो सकती है. उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से तीन मौतें भी बहुत ज्यादा हैं. अगर अनुमान देखें तो यह संख्या इससे काफी ज्यादा भी हो सकती है." उन्होंने कहा, "हम हताहत होने की उम्मीद कर रहे हैं."

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों ने ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया, जिसमें नौ जहाज और नौसेना का मुख्यालय शामिल है. इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि संभव है ईरान की ताकतवर सैन्य इकाइयां अपने हथियार छोड़ दें. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारी अपने हथियार जनता को सौंप सकते हैं.

यह नया तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तेहरान की सैन्य क्षमता और उसके लंबे समय से चल रहे परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है.

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