- इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद कैमरे के सामने आकर अपनी मौत और 6 उंगलियों वाली अफवाहों का खंडन किया.
- नेतन्याहू ने वीडियो में कॉफी पीते हुए और हाथों को दिखाकर अपनी सामान्य और स्वस्थ स्थिति का प्रदर्शन किया.
- नेतन्याहू के बाद अब दुनिया ये जानना चाहती है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई कहां हैं और कैसे हैं.
मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग और इंटरनेट पर फैली अफवाहों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुद कैमरे के सामने आकर यह साबित करना पड़ा कि वे जिंदा हैं और उनकी हाल की वीडियो AI‑जनरेटेड नहीं है. दरअसल सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से यह दावा वायरल था कि नेतन्याहू की ताजा वीडियो में उनके हाथ पर 'छह उंगलियां' दिख रही हैं और यह इस बात का संकेत है कि उनकी मौत हो चुकी है और सरकार उनकी जगह AI‑वीडियो जारी कर रही है.
लेकिन तथ्य इससे बिल्कुल उलट निकले. अंतरराष्ट्रीय फैक्ट‑चेक संस्थाओं ने वीडियो की बारीकी से जांच कर पुष्टि की कि नेतन्याहू के दोनों हाथों में पांच-पांच उंगलियां ही हैं और 'छठी उंगली' सिर्फ एक ऑप्टिकल इल्यूजन था. इसमें हथेली के निचले हिस्से की हल्की उभार को गलत समझा गया.
इतना ही नहीं, इजरायली गवर्नमेंट प्रेस ऑफिस द्वारा जारी मूल वीडियो में भी कोई असामान्यता नहीं मिली और विशेषज्ञों ने इसे AI‑जनरेशन की संभावना 0.1% से भी कम बताई.
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कैमरे के सामने आकर नेतन्याहू ने क्या दिखाया?
वायरल अफवाहों के बाद नेतन्याहू ने वीडियो में खुद कॉफी पीते हुए, हाथों को पास से दिखाते हुए अपने जिंदा होने का सबूत दिया. उनकी बॉडी‑लैंग्वेज भी सामान्य और शांत थी, जो ये संकेत थी कि उनकी मौत या चोट से जुड़ी अफवाहें निराधार हैं.
सोशल मीडिया पर उनके 'जिंदा सबूत' दिए जाने को लेकर इजरायल समर्थक समूहों ने इसे 'क्लियरिंग द एयर' बताया है, क्योंकि अफवाहें इतनी तेज़ी से फैली थीं कि सरकार को सार्वजनिक रूप से इसे खंडन करना पड़ा.
अब दबाव ईरान पर- मुजतबा खामेनेई की क्या स्थिति है?
जैसे ही नेतन्याहू खुद सामने आ गए, अब अंतरराष्ट्रीय निगाहें ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पर टिक गई हैं. मुजतबा खामेनेई के जिंदा होने, घायल होने या गंभीर रूप से प्रभावित होने को लेकर कई दावे फैले हुए हैं. कई रिपोर्टों में कहा गया है कि वे कथित रूप से कोमा में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मुजतबा एक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए हैं और सार्वजनिक रूप से बिलकुल दिखाई नहीं दिए. इसी स्थिति को लेकर कई बार ईरान की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं.
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नेतन्याहू की उपस्थिति ने अब ईरान पर समान स्तर की स्पष्टता लाने का दबाव बढ़ा दिया है. जब एक पक्ष अपने नेता की मौजूदगी का प्रमाण दे चुका है, तो युद्ध में यह स्वाभाविक है कि दूसरे पक्ष से भी मुजतबा खामेनेई की सलामती का प्रमाण सार्वजनिक करने की अपेक्षा की जाए.
मुजतबा की चुप्पी क्यों?
तथ्यों की पुष्टि करने वाले कई वैश्विक पोर्टल्स की रिपोर्टों में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से मुजतबा की कोई सार्वजनिक उपस्थिति नहीं दिखी है, न ही कोई वीडियो संदेश, न ही अस्पताल या सरकारी परिसर से कोई तस्वीर सामने आई है. यह चुप्पी ही उन अटकलों को और तेज कर रही है कि कहीं ईरान अपने नए सुप्रीम लीडर की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रहा.
इजरायल के कुछ सैन्य और खुफिया दावों में यह तक कहा गया है कि ईरान की नेतृत्व संरचना इस समय भीतर से अस्थिर है और मुजतबा की स्थिति को गोपनीय रखना इसका हिस्सा है। हालांकि ईरान ने आधिकारिक रूप से इन दावों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है.
अफवाहों की लड़ाई बनाम ग्राउंड रियलिटी
इस पूरे विवाद ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को फिर सामने ला दिया है. युद्ध में अफवाहें भी हथियार होती हैं. नेतन्याहू के मामले में सोशल मीडिया पर AI और डीपफेक की चर्चा ने उनकी सेहत को लेकर भ्रम पैदा कर दिया, जिसे उन्होंने खुलकर जवाब देकर निरस्त कर दिया. अब वैश्विक निगाहें ईरान पर हैं कि क्या वह भी इसी तरह स्पष्ट संकेत देगा कि मुजतबा खामेनेई पूरी तरह सक्षम और स्वस्थ हैं. या फिर उनकी चुप्पी उन अटकलों को और हवा देगी जिनके अनुसार स्थिति वास्तव में गंभीर है.
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