- वेस्ट बैंक में इजरायली कब्जे के दौरान बढ़ती हिंसा में छह फिलिस्तीनियों की गोली मारकर हत्या की गई
- युद्ध की आड़ में इजरायल फिलिस्तीनी जनसंख्या के खिलाफ जातीय सफाए के प्रयास तेज कर रहा है
- ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 180 फिलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक से जबरन बेदखल किया जा चुका
ईरान-इजरायल युद्ध को शुरू हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं पर यह कब खत्म होगा,इसका उत्तर न तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास है और न ही पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के पास. अपने-अपने दावे हैं जो समय के साथ बदलते रहते हैं. वैश्विक राजनीति की समझ रखने वाले लोगों का कहना है कि ईरान हार मानेगा नहीं और अमेरिका इजरायल का साथ देकर फंसा सा फील कर रहा है,लेकिन कई मिसाइलों, ड्रोन हमलों ने आमजन का भी काफी नुकसान किया है. वहीं इजरायल की ओर से कब्जा किए गए वेस्ट बैंक में भी घातक हमले वहां के लोगों को दहशत में डाल चुके हैं. रामल्लाह स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार,महीने की शुरुआत से अब तक, छह फिलिस्तीनियों को ऐसे हमलों में गोली मारकर हत्या की गई है.
टूटे दिल और रुंधे गले से महिला ने कहा कि मैंने उसे दो‑तीन बार और फोन किया, लेकिन उसने जवाब नहीं दिया, अल्लाह उसकी रूह पर रहमत बरसाए. बस सब खत्म हो गया. न्यूज एजेंसी एफपी से बातचीत में मां के अपने बेटे Thaer की फ्रेम की हुई तस्वीर को देखते हुए कांपते होंठों के साथ उसके ये कथन कलेजा चीर रहे थे. इजरायल के कब्जाए वेस्ट बैंक में हाल ही में बस्तियों से जुड़े घातक हमलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इजरायली मानवाधिकार समूह B'Tselem ने कहा कि इस बढ़ती हिंसा से यह साफ होता है कि ईरान के साथ युद्ध की आड़ में इजरायल जातीय सफाए (ethnic cleansing) के प्रयासों को और तेज कर रहा है.
ईरान से युद्ध के बीच बढ़ गई संख्या
यह भावना जमीन पर मौजूद फिलिस्तीनियों में भी दिखी. एक ने कहा कि ऐसा लगता है कि जब ईरान युद्ध शुरू हुआ, तो बसने वालों (settlers) ने इसे एक सुनहरा मौका मान लिया था. Ibrahim Hamayel ने कहा कि 28 फरवरी को इजरायल की ओर से इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ अभियान शुरू करने के बाद से हमलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है. आंकड़े भी उनके दावे का समर्थन करते हैं. OCHA के अनुसार, अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने से लेकर पिछले महीने ईरान के साथ युद्ध शुरू होने तक के 28 महीनों में 24 फिलिस्तीनियों की हत्या बसने वालों ने ही की है. वेस्ट बैंक में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार ऐसी बस्तियां गैरकानूनी हैं,वहां लगभग 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं और इनके साथ-साथ 5 लाख से अधिक इजरायली भी बस्तियों और आउपोस्ट्स में रहते हैं.
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‘वे सभी नकाब पहने हुए थे'
अबू फलाह के निवासी Ibrahim Hamayel ने AFP को वह जगह भी बताई जहां झड़प हुई थी. जब बसने वाले आए तो वे सभी नकाब पहने हुए थे और उनमें से कुछ के पास हथियार थे. उन्होंने उस जगह की ओर इशारा किया जहां उसी दिन जैतून के पेड़ों के बीच एक व्यक्ति की मौत हुई थी. सफेद चूना-पत्थर की चट्टानों पर खून के धब्बे थे, जो वेस्ट बैंक की लाल मिट्टी में मिलते‑जुलते दिख रहे थे. जहां वे लोग मारे गए थे, वहां छोटे‑छोटे पत्थरों के गोल घेरे बनाकर तुरंत बनाए गए स्मारक भी दिखे. उनमें से एक के ऊपर एक छोटा फिलिस्तीनी झंडा हवा में लहरा रहा था. इजरायली सेना ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि अबू फलाह (रामल्लाह के उत्तर‑पूर्व में) में इजरायली बसने वाले फिलिस्तीनियों पर हमला कर रहे हैं. सूचना मिलने पर सेना के जवानों को वहां भेजा गया और उन्होंने भीड़ को तितर‑बितर करने के लिए कई कोशिशें भी कीं.
तीन मौतों को स्वीकार किया
इजरायल ने बसने वालों की हिंसा की निंदा की और तीन फिलिस्तीनियों की मौत की रिपोर्टों को स्वीकार भी किया, जिनमें एक की मौत दम घुटने से हुई थी. सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह दम घुटना उनकी आंसू गैस के कारण हुआ या नहीं. फिलिस्तीनी और इजरायली मानवाधिकार समूहों का कहना है कि एक‑एक पहाड़ी पर कब्जा करते हुए इस तरह की लगातार धमकियां और हमले का लक्ष्य फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से हटाना है.Ibrahim Hamayel ने बताया कि उनका मकसद अपनी योजना को लागू करना है: बेदखली और फिलिस्तीनी गांवों को सिर्फ उनकी बसी हुई सीमाओं तक सीमित कर देना है.
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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 180 फिलिस्तीनियों को बेदखल किया जा चुका है और 2026 की शुरुआत से अब तक कुल 1,500 फिलिस्तीनियों को विस्थापित किया गया है. यूरोपीय संघ ने हाल ही में कहा कि वेस्ट बैंक में हिंसा का स्तर अस्वीकार्य है. उनका कहना है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कई फिलिस्तीनी समुदाय हमलों की चपेट में आए, उनकी संपत्तियां नष्ट हुईं, और उनकी रोजी‑रोटी बर्बाद हो गई. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से बसने वालों की हिंसा लगातार रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है. OCHA के अनुसार, इस साल फिलिस्तीनियों का विस्थापन 2025 के कुल स्तर के 90% तक पहुंच चुका है.अबू फलाह उस इलाके में स्थित है जहां बसने वालों के हमले और सेना की हिंसा अक्सर होती रहती है. पास के गांवों में लगभग हर दिन ऐसी घटनाएं होती हैं.
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