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नेपाल की ये दीवार, दुनिया की सबसे दर्द भरी दीवार

एक दीवार का कितना वजह होता है, उस पर लगी ईटों से उसे कैलकुलेट किया जा सकता है लेकिन जिस दीवार पर दो हजार से ज्यादा तस्वीरें लगी हैं, उसका वजह कैसे कैलकुलेट किया जाएगा.

नेपाल की ये दीवार, दुनिया की सबसे दर्द भरी दीवार
नेपाल त्रासदी की कहानियां बयां करती एक दीवार (Photo: Manogya Loiwal/NDTV)
  • महाराजगंज स्थित TU टीचिंग हॉस्पिटल की 25 मीटर दीवार दुनिया भर में चर्चा को मौजू बनी है.
  • इसे दर्द की दीवार कहा जा रहा है, जिस पर लापता हुए लोगों की तस्वीरें लगाई जा रही हैं
  • नेपाल त्रासदी के बाद 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता हैं.
काठमांडू:

दीवार ईंटों से बनती है. लेकिन इस दीवार पर हजारों दिल धड़कते हैं. इस दीवार में हजारों दर्द भरी कहानियां चिपकी हैं. यहां सांस ले रही हैं हजारों दुआएं. मौत के समंदर के बीच इस दीवार पर हैं हजारों अनकहे ख्वाब, जो उम्मीद छोड़ने को तैयार नहीं. इस दीवार पर जिंदा है किसी का बेटा, किसी का पति, किसी की मां, किसी के पापा. इस दीवार पर रोज मोतियाबिंद से धुंधली हो रही एक मां की आखें रोशनी खोजती हैं. इस दीवार पर एक बच्चा अपना भविष्य खोजता है. यहां रोज एक सुहागन अपने हाथों की मेहंदी खोजती है. ये दीवार है, नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में. ये दीवार दुनिया की सबसे दर्द भरी दीवार है.

लोग आपनों की तलाश में दीवार पर फोटो लगा रहे हैं.

लोग आपनों की तलाश में दीवार पर फोटो लगा रहे हैं.
Photo Credit: Manogya Loiwal/NDTV

इस दीवार पर जहां तक नजर जाएगी, लोगों की तस्वीर ही तस्वीर लगी है. यह जगह त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल है, नेपाल के काठमांडू के महाराजगंज में स्थित एक प्रमुख पब्लिक एंड एजुकेशनल हॉस्पिटल है.

त्रासदी बयां करती तस्वीरें...

एक दीवार का कितना वजह होता है, उस पर लगी ईटों से उसे कैलकुलेट किया जा सकता है लेकिन जिस दीवार पर दो हजार से ज्यादा तस्वीरें लगी हैं, उसका वजह कैसे कैलकुलेट किया जाएगा. क्योंकि इसमें लापता हुए तमाम लोगों के अपनों ने उम्मीदें भी शामिल हैं. इस दीवार पर न जाने कितनी जिंदगियों का वजन है. यह भार सिर्फ वही समझ सकता है, जो इसको ढो रहा है. इस बात को वही लोग समझ सकते हैं, जो यहां पर अपने प्रियजनों की तस्वीरें लगाकर जा रहे हैं.

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यह उस त्रासदी की तस्वीर है, एक ऐसी दीवार की तस्वीर है, जिसने सिर्फ उन लोगों का वजन ढोया है, जिन्होंने दिन और रात रोते हुए अपना वक्त गुजारा है. सभी तड़प रहे लोगों और त्रासदी के बाद लापता हो चुके चेहरों के लिए सिर्फ दुआएं की जा सकती हैं.

हर उम्र के लोगों की तस्वीरें...

टीयू टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर खंभों सहित, 25-मीटर (80-फीट) ऊंची दीवार पर हर उम्र के नेपालियों और विदेशियों की तस्वीरें लगी हुई हैं. चीन-नेपाल बॉर्डर पर हिमालय के ग्लेशियर के टूटने से बर्फीले पानी और मलबे की सुनामी जैसी लहर उठी, जिसमें 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 4,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें से करीब 600 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं.

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