- NDTV संवाददाता सिक्ता देव और कैमरापर्सन पूजा आर्य अंधेरे-बारिश में रसुवा पहुंची हैं.
- नेपाल का त्रिशूली बाजार कीचड़-मलबे में बदल चुका है.
- एनडीटीवी की टीम को अंधेरी रात गुजारने के लिए सिर्फ एक छोटा सा कमरा मिल सका.
नेपाल के रसुवा को समय के अंधेरे ने अपनी आगोश में ले लिया है. तबाही वाली जगह पर लोगों के लिए राज गुजारना बेहद मुश्किल हो गया है. ऊपर से बरसती तेज बारिश ने मंजर को और डरावना बना दिया है. हर बूंद जैसे उस तबाही की याद दिला रही है, जिसने इस इलाके को झकझोर कर रख दिया. इसी अंधेरे और बारिश के बीच NDTV संवाददाता सिक्ता देव भी रसुवा पहुंच चुकी हैं. उनके साथ मौजूद हैं कैमरापर्सन पूजा आर्य, जिन्होंने रसुवा के इस डरावने मंजर को अपने कैमरे में कैद करने की पूरी कोशिश की है. हालात इतने कठिन हैं कि NDTV की टीम को रात गुजारने के लिए बस एक छोटा-सा कमरा ही नसीब हो सका. इलाके में रिलीफ अभी पहुंचनी शुरू ही हुई है. पिछले तीन दीनों से लाइट की व्यवस्था नहीं है. दुकानों में मोमबत्तियां खत्म हो चुकी हैं. अंधेरे से लड़ने के लिए किसी के पास टॉर्च तक नहीं मौजूद है.
#NDTVExclusive | अंधेरा, बारिश और डरावना सन्नाटा!
— NDTV India (@ndtvindia) August 29, 2026
देखिए- नेपान के रसुवा से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट@DeoSikta | #Rasuwa | #Nepal pic.twitter.com/2if95FwuCb
वो मनहूस सुबह...
26 अगस्त की सुबह, नेपाल की त्रिशूली नदी के किनारे 72 किलोमीटर के इलाके में कई जगहों पर अचानक बाढ़ और मडस्लाइड यानी जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं, जिससे रसुवा और नुवाकोट जिलों में भारी तबाही मची. बाढ़ की नई चेतावनियों से चिंता बनी हुई है. त्रिशूली बाजार में रहने वाली एक महिला का कहना है कि वह अपना घर छोड़कर नहीं जा सकतीं क्योंकि उनके पति बिस्तर पर हैं और चल-फिर नहीं सकते. उत्तरी नेपाल के नुवाकोट जिले का एक कभी फल-फूल रहा बाजार, त्रिशूली बाजार, अब कीचड़, मलबे, टूटे-फूटे घरों और तबाही का मंजर बन गया है.
'कुछ भी हो जाए, मुझे यहीं रहना है...'
नेपाल के कुछ हिस्सों में संभावित बाढ़ की चेतावनी जारी होने के बाद एनडीटीवी की टीम ने त्रिशुली बाजार क्षेत्र का दौरा किया. पिछले दिन के विपरीत, जब लोग लापता प्रियजनों, बचाव टीमों और क्षतिग्रस्त घरों और सामानों के बारे में जानकारी का इंतजार कर रहे थे, त्रिशूली बाजार में काफी हद तक सन्नाटा था.
यह पूछे जाने पर कि अलर्ट मिलने के बाद उन्होंने इलाका क्यों नहीं छोड़ा, सुश्री तमांग ने कहा, "मेरे पति बूढ़े हैं और वह चलने में सक्षम नहीं हैं. इसलिए मैं छोड़कर उन इलाकों में नहीं जा सकती. चाहे कुछ भी हो जाए, मुझे यहीं रहना है."
ताजा अपडेट्स क्या हैं?
तिब्बत से लगे बॉर्डर पर आई भयानक बाढ़ के बाद नेपाल कराह रहा है. अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं. नेपाल में अब तक करीब 676 शव मिल चुके हैं, जबकि 3,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 275 भारतीय भी शामिल हैं.
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