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नेपाल में जहां से सबसे ज्यादा मची तबाही, वहां सबसे पहले पहुंचा NDTV, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही के केंद्र बने रसुवा जिले तक NDTV की टीम पहुंची. ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय पत्रकार ने उस भयावह दिन की पूरी कहानी बताई, जब अचानक बादल फटने और ग्लेशियर से आए मलबे ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया.

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेकाबू हो चुके हैं. इस सैलाब के मुख्य केंद्र रसुवा जिले के जमीनी हालात का जायजा लेने NDTV की टीम खतरनाक चढ़ाई चढ़कर पहाड़ों की उस ऊंचाई पर पहुंची, जहां से पूरी तबाही का खौफनाक मंजर साफ दिखाई देता है. रसुवा पहुंचने वाला NDTV पहला भारतीय न्यूज चैनल है. ग्राउंड जीरो पर मौजूद स्थानीय नेपाली पत्रकार दीपक ने NDTV से बातचीत में उस दिन की पूरी दास्तान बताई.

बह गईं बस्तियां

दीपक ने बताया कि नेपाल और तिब्बत बॉर्डर के ठीक पास मौजूद विशाल ग्लेशियर के अचानक फटने से भोटे कोशी नदी में उफान आया. पहाड़ों से टर्न लेती हुई इस नदी ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को पूरी तरह तबाह कर दिया.

टिमुरे बॉर्डर, जो नेपाल-चीन का प्रमुख व्यापारिक केंद्र और मानसरोवर यात्रा का मुख्य रास्ता था, वहां खड़ी 1000 से ज्यादा गाड़ियां बाढ़ के तेज बहाव में बह गईं. भारत से आए कई तीर्थ यात्री और टिमुरे कस्टम्स के पास स्थित सुप्रसिद्ध सप्रेस बाजार की करीब 2500 की आबादी का अब तक कोई अता-पता नहीं है.

आगे चलकर रसुवा और नुवाकोट के बॉर्डर पर स्थित 'उत्तर गया धाम' (भद्रवती) में भी भयानक तबाही हुई. यहां 250 से ज्यादा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए. अकेले एक इलाके से करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. रसुवा को जोड़ने वाला केरुंग-गल्छी-त्रिशूली हाईवे पूरी तरह से कट चुका है. अब यहां केवल ऑरेंज रंग के रेस्क्यू हेलीकॉप्टर्स की मदद से ही घायलों और शवों को निकाला जा रहा है.

बेघर, भूखे और घायल मगर जिंदगी के लिए लड़ रहे नेपाल के लोग... NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह, चितवन तक बहकर आ रहे शव

सरकारी आंकड़ों और स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 3000 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें से 300 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं. भोटे कोशी और त्रिशूली नदी का बहाव इतना तेज था कि शव बहकर दूर चितवन तक पहुंच गए हैं. चितवन में मिले 239 शवों का DNA सैंपल लेकर एक साथ सामूहिक दफनाने की घोषणा की गई है.

त्रिशूली बाजार में स्थित 21 मेगावॉट का हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और उसमें काम करने वाले 300 से 400 कर्मचारी लापता हैं. त्रिशूली और रसुवा के बीच की पक्की सड़कें पानी में बह जाने से दोनों जिलों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट चुका है.

फिलहाल, रसुवा के एक स्कूल को अस्थाई रिलीफ सेंटर बनाया गया है, जहां बचे हुए लोगों को शिफ्ट कर हेलीकॉप्टर और राहत दलों द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. 4 दिन बीत जाने के बाद भी यहां हालात बेहद खौफनाक बने हुए हैं.

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