बांग्लादेश में चुनाव से ऐन पहले मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने NDTV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पड़ोसी देश के हालात, राजनीतिक भविष्य और मोहम्मद यूनुस सरकार पर बेबाकी से अपनी राय रखी है. तस्लीमा ने साफ कहा कि यूनुस की सरकार के पीछे असल ताकत इस्लामिक कट्टरपंथियों की है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यूनुस इन कट्टरपंथी ताकतों के भरोसे टिके हैं, ऐसे में वो कभी भी हिंदू अल्पसंख्यकों की हिफाजत नहीं कर पाएंगे.
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्या, 1971 के युद्ध स्मारकों को ढहाने और मीडिया पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की.
चुनावों को लेकर तस्लीमा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि आवामी लीग के बिना बांग्लादेश में हो रहे चुनाव पूरी तरह से अवैध हैं. उनका कहना था कि जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों पर बैन लगना चाहिए, न कि आवामी लीग पर. उन्होंने शेख हसीना का जिक्र करते हुए कहा कि आज हसीना को भी उनकी तरह ही निर्वासन का दंश झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं चाहती हूं कि हसीना जल्द अपने घर लौटें.
तस्लीमा ने अपनी घर वापसी की संभावनाओं पर कहा कि अगर बांग्लादेश सरकार उन्हें सुरक्षा की गारंटी दे और अभिव्यक्ति की आजादी बहाल हो तो वह 31 साल का निर्वासन खत्म करके एक दिन अपने वतन लौट सकती हैं. उन्होंने बीएनपी नेता तारिक रहमान के बारे में कहा कि अगर वो सत्ता में आते हैं तो उन्हें लोकतंत्र और बोलने की आजादी के अधिकार को बहाल करने पर काम करना चाहिए.
तस्लीमा ने कहा कि जब तक उनका निर्वासन खत्म नहीं होता, तब तक रहने के लिए भारत एक अच्छा देश है. उन्होंने पाकिस्तान के साथ जमात-ए-इस्लामी के संबंधों पर भी गहरी चिंता जताई और कहा कि बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान आज खतरे में है.
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