Taslima Nasreen
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NDTV Exclusive: कट्टरपंथियों के भरोसे बांग्लादेश की यूनुस सरकार, हिंदू कैसे सुरक्षित रहेंगेः तस्लीमा नसरीन
- Wednesday February 11, 2026
- Reported by: आदित्य राज कौल, Edited by: मनोज शर्मा
मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने NDTV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में साफ कहा कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथी ताकतों के भरोसे टिके हैं, ऐसे में वो कभी भी हिंदू अल्पसंख्यकों की हिफाजत नहीं कर पाएंगे.
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पुलिस के सामने... तस्लीमा नसरीन ने बताया कैसे की गई बांग्लादेश में दीपू की लिंचिग
- Saturday December 20, 2025
- Reported by: सौरभ गुप्ता, Edited by: विजय शंकर पांडेय
तस्लीमा नसरीन कई वर्षों से भारत, पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में निर्वासन में रह रही हैं. उनके लेखन से कट्टरपंथियों की भावनाएं आहत होने के बाद उनका बांग्लादेशी पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली थीं.
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तसलीमा नसरीन बोलीं- बंगाली मुस्लिम भी हिन्दू हैं, वो अरब संस्कृति के नहीं... जावेद अख्तर ने दिया जवाब
- Tuesday September 30, 2025
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: पीयूष जयजान
तसलीमा नसरीन ने कहा कि हिंदू संस्कृति ही बंगाली संस्कृति की नींव है, चाहे वह बंगाली हिंदू हों या फिर मुस्लिम. उनके इस बयान पर मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जिक्र किया.
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समय-समय पर कोलकाता आना चाहती हूं, लेकिन वहां रहना एक विकल्प नहीं : तस्लीमा नसरीन
- Friday March 21, 2025
- Reported by: भाषा
नसरीन ने 90 के दशक के प्रारंभ में अपने लेखों और उपन्यासों के कारण चर्चा में रही थी. जिनमें उन्होंने नारीवादी विचार व्यक्त किए थे. उन्हें 1994 में अपने उपन्यास ‘लज्जा’ के प्रकाशन के बाद जारी किए गए कई फतवों के कारण बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
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तब मुझे निकाला था और आज... हसीना के तख्तापलट पर तसलीमा ने निकाला दिल का गुबार
- Tuesday August 6, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: पीयूष जयजान
प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा. अपनी स्थिति के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं. उन्होंने कट्टरपंथियों को पनपने दिया. उन्होंने अपने लोगों को भ्रष्टाचार में शामिल होने दिया. अब बांग्लादेश को पाकिस्तान जैसा नहीं बनना चाहिए. सेना को शासन नहीं करना चाहिए. राजनीतिक दलों को लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता लानी चाहिए."
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पत्रिका स्त्री लेखा के स्त्री नवजागरण अंक का हुआ विमोचन, कार्यक्रम में लेखिका तसलीमा नसरीन रही मौजूद
- Sunday May 26, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: रितु शर्मा
सोमा बनर्जी और संदीप मुखर्जी की टीम ने शानदार नृत्य नाटिका पेश कर दर्शकों का मनमोह लिया. बच्चों के समूह ने भी बेहद प्यारा नृत्य पेश किया. प्रयाग शुक्ल और विनोद बनर्जी ने बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किए.
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"अगर पैगंबर आज जीवित होते ...": विरोध प्रदर्शन पर बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की नसीहत
- Saturday June 11, 2022
- Edited by: पीयूष
तसलीमा नसरीन को कट्टरपंथी संगठनों द्वारा मौत की धमकी के मद्देनजर 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था, जिन्होंने उन पर इस्लाम विरोधी होने का आरोप लगाया था.
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तस्लीमा नसरीन ने ए आर रहमान की बेटी के बुर्का पहनने को बताया 'घुटन', तो जवाब मिला- ताजी हवा में सांस लें...
- Monday February 17, 2020
- Written by: आशना मलिक
ए आर रहमान (AR Rahman) की बेटी खतीजा (Khatija Rahman) अपने बुर्का पहनने को लेकर एक बार फिर निशाने पर आ गई हैं. दरअसल, लेखिका तस्लीमा नसरीन (Taslima Nasreen) ने ए आर रहमान की बेटी खतीजा द्वारा बुर्का पहनने पर सवाल उठाया था.
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नौकरानी से बनीं लेखक, पति ने किया रेप और संघर्ष की कहानी ने बनाया स्टार
- Tuesday May 15, 2018
- Written by: मोहित चतुर्वेदी
बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाली बेबी की जिंदगी काफी भयावह रही है. जब वो 4 साल की थीं तो मां छोड़कर चली गईं. 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई. शादी की रात ही पति ने उनका रेप कर दिया.
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भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत पाकिस्तान और बांग्लादेश से काफी बेहतर : तसलीमा नसरीन
- Sunday December 17, 2017
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
विवादास्पद लेखन के लिये मशहूर कलमकार तस्लीमा नसरीन ने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों के मुकाबले भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत को काफी बेहतर बताया है. अपनी मातृभूमि बांग्लादेश से निर्वासन का दंश झेल रहीं 55 वर्षीय लेखिका का कहना है कि भारत उन्हें अपने घर की तरह लगता है. तसलीमा नसरीन ने कहा, "बांग्लादेश में हिंदुओं और बौद्धों पर बहुत अत्याचार होता है. मैं हालांकि पाकिस्तान कभी नहीं गयी लेकिन मैंने वहां भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण और उन पर ढाये जाने वाले दूसरे जुल्मो-सितम के बारे में पढ़ा है." उन्होंने कहा, "इन दोनों मुल्कों के मुकाबले भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत काफी बेहतर है. भारत का आइन (संविधान) सबके लिये समान है. हालांकि, मैं यह नहीं कह रही हूं कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय की सारी दुश्वारियां खत्म हो गयी हैं."
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NDTV Exclusive: कट्टरपंथियों के भरोसे बांग्लादेश की यूनुस सरकार, हिंदू कैसे सुरक्षित रहेंगेः तस्लीमा नसरीन
- Wednesday February 11, 2026
- Reported by: आदित्य राज कौल, Edited by: मनोज शर्मा
मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने NDTV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में साफ कहा कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस कट्टरपंथी ताकतों के भरोसे टिके हैं, ऐसे में वो कभी भी हिंदू अल्पसंख्यकों की हिफाजत नहीं कर पाएंगे.
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पुलिस के सामने... तस्लीमा नसरीन ने बताया कैसे की गई बांग्लादेश में दीपू की लिंचिग
- Saturday December 20, 2025
- Reported by: सौरभ गुप्ता, Edited by: विजय शंकर पांडेय
तस्लीमा नसरीन कई वर्षों से भारत, पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में निर्वासन में रह रही हैं. उनके लेखन से कट्टरपंथियों की भावनाएं आहत होने के बाद उनका बांग्लादेशी पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली थीं.
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तसलीमा नसरीन बोलीं- बंगाली मुस्लिम भी हिन्दू हैं, वो अरब संस्कृति के नहीं... जावेद अख्तर ने दिया जवाब
- Tuesday September 30, 2025
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: पीयूष जयजान
तसलीमा नसरीन ने कहा कि हिंदू संस्कृति ही बंगाली संस्कृति की नींव है, चाहे वह बंगाली हिंदू हों या फिर मुस्लिम. उनके इस बयान पर मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जिक्र किया.
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समय-समय पर कोलकाता आना चाहती हूं, लेकिन वहां रहना एक विकल्प नहीं : तस्लीमा नसरीन
- Friday March 21, 2025
- Reported by: भाषा
नसरीन ने 90 के दशक के प्रारंभ में अपने लेखों और उपन्यासों के कारण चर्चा में रही थी. जिनमें उन्होंने नारीवादी विचार व्यक्त किए थे. उन्हें 1994 में अपने उपन्यास ‘लज्जा’ के प्रकाशन के बाद जारी किए गए कई फतवों के कारण बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
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तब मुझे निकाला था और आज... हसीना के तख्तापलट पर तसलीमा ने निकाला दिल का गुबार
- Tuesday August 6, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: पीयूष जयजान
प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा. अपनी स्थिति के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं. उन्होंने कट्टरपंथियों को पनपने दिया. उन्होंने अपने लोगों को भ्रष्टाचार में शामिल होने दिया. अब बांग्लादेश को पाकिस्तान जैसा नहीं बनना चाहिए. सेना को शासन नहीं करना चाहिए. राजनीतिक दलों को लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता लानी चाहिए."
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पत्रिका स्त्री लेखा के स्त्री नवजागरण अंक का हुआ विमोचन, कार्यक्रम में लेखिका तसलीमा नसरीन रही मौजूद
- Sunday May 26, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: रितु शर्मा
सोमा बनर्जी और संदीप मुखर्जी की टीम ने शानदार नृत्य नाटिका पेश कर दर्शकों का मनमोह लिया. बच्चों के समूह ने भी बेहद प्यारा नृत्य पेश किया. प्रयाग शुक्ल और विनोद बनर्जी ने बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किए.
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"अगर पैगंबर आज जीवित होते ...": विरोध प्रदर्शन पर बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की नसीहत
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तसलीमा नसरीन को कट्टरपंथी संगठनों द्वारा मौत की धमकी के मद्देनजर 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था, जिन्होंने उन पर इस्लाम विरोधी होने का आरोप लगाया था.
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तस्लीमा नसरीन ने ए आर रहमान की बेटी के बुर्का पहनने को बताया 'घुटन', तो जवाब मिला- ताजी हवा में सांस लें...
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- Written by: आशना मलिक
ए आर रहमान (AR Rahman) की बेटी खतीजा (Khatija Rahman) अपने बुर्का पहनने को लेकर एक बार फिर निशाने पर आ गई हैं. दरअसल, लेखिका तस्लीमा नसरीन (Taslima Nasreen) ने ए आर रहमान की बेटी खतीजा द्वारा बुर्का पहनने पर सवाल उठाया था.
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नौकरानी से बनीं लेखक, पति ने किया रेप और संघर्ष की कहानी ने बनाया स्टार
- Tuesday May 15, 2018
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बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाली बेबी की जिंदगी काफी भयावह रही है. जब वो 4 साल की थीं तो मां छोड़कर चली गईं. 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई. शादी की रात ही पति ने उनका रेप कर दिया.
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भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत पाकिस्तान और बांग्लादेश से काफी बेहतर : तसलीमा नसरीन
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विवादास्पद लेखन के लिये मशहूर कलमकार तस्लीमा नसरीन ने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों के मुकाबले भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत को काफी बेहतर बताया है. अपनी मातृभूमि बांग्लादेश से निर्वासन का दंश झेल रहीं 55 वर्षीय लेखिका का कहना है कि भारत उन्हें अपने घर की तरह लगता है. तसलीमा नसरीन ने कहा, "बांग्लादेश में हिंदुओं और बौद्धों पर बहुत अत्याचार होता है. मैं हालांकि पाकिस्तान कभी नहीं गयी लेकिन मैंने वहां भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण और उन पर ढाये जाने वाले दूसरे जुल्मो-सितम के बारे में पढ़ा है." उन्होंने कहा, "इन दोनों मुल्कों के मुकाबले भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हालत काफी बेहतर है. भारत का आइन (संविधान) सबके लिये समान है. हालांकि, मैं यह नहीं कह रही हूं कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय की सारी दुश्वारियां खत्म हो गयी हैं."
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