अमेरिका में सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मुकदमे की सुनवाई शुरू हो गई है, जिसमें कंपनी पर बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म का आदी बनाने और जनता को गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं. फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा के खिलाफ 29 राज्यों के गठबंधन ने संघीय अदालत (फेडरल कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया है. अभियोजन पक्ष का दावा है कि मेटा ने जानबूझकर ऐसे फीचर विकसित किए, जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक ऑनलाइन बनाए रखते हैं. विशेषज्ञ इस मामले को सोशल मीडिया उद्योग का "बिग टोबैको मोमेंट" बता रहे हैं, क्योंकि यह मुकदमा भविष्य में पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए मिसाल बन सकता है.
मेटा पर क्या हैं आरोप?
अमेरिका के कई राज्यों ने आरोप लगाया है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और किशोर सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताएं और उससे मानसिक रूप से प्रभावित हों. कैलिफोर्निया की ओर से अदालत में पेश हुईं अभियोजक मेगन ओ'नील ने कहा, "मेटा का बिजनेस मॉडल यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़कर रखने, उन्हें अधिकतम समय तक रोकने, उनका डेटा एकत्र करने और फिर सच्चाई को जनता से छिपाने पर आधारित था."
ओ'नील ने कहा कि मेटा ने इन कमजोरियों पर शोध किया और इस बात पर भी चर्चा की कि इंस्टाग्राम को इनका फायदा उठाने के लिए कैसे बदला जा सकता है. उन्होंने कहा, “‘The young ones are the best ones' मेटा की एक स्टडी का शीर्षक है, जिसे हम अदालत में पेश करेंगे.” उन्होंने जूरी से कहा कि मेटा के लिए “बच्चे ही उत्पाद (Product) हैं.” ओ'नील ने यह भी आरोप लगाया कि मेटा जानती थी कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे उसके प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, जबकि उन्हें इसकी अनुमति नहीं थी. इसके बावजूद कंपनी ने उन्हें रोकने के लिए बुनियादी कदम तक नहीं उठाए. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि मेटा को पता चलता था कि फेसबुक का कोई उपयोगकर्ता 13 वर्ष से कम आयु का है, तो कंपनी उसका फेसबुक अकाउंट बंद कर देती थी, लेकिन उससे जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट को सक्रिय रहने देती थी.
मेटा ने आरोपों को किया खारिज
मेटा की ओर से पेश वकील पॉल श्मिट ने स्वीकार किया कि कुछ उपयोगकर्ताओं को प्लेटफॉर्म पर नकारात्मक अनुभव हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कंपनी ने उनकी सहायता के लिए कई सुरक्षा उपकरण विकसित किए हैं. मुकदमे की शुरुआत से पहले मेटा ने एक बयान में कहा था कि वह अभिभावकों, विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार काम करती रही है.
पूर्व इंजीनियर ने खोले कई राज
सुनवाई के दौरान मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग निदेशक आर्टुरो बेजार ने अदालत को बताया कि फेसबुक के शुरुआती वर्षों में उपयोगकर्ताओं तक तेजी से फीचर पहुंचाना प्राथमिकता थी. उन्होंने कहा, "उद्देश्य था कि चीजों को जितनी जल्दी हो सके उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाया जाए, जिसका मतलब यह था कि सुरक्षा और संरक्षा अक्सर बाद में विचार का विषय बनती थी." मेटा ने बेजार की गवाही रोकने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत ने कंपनी की यह मांग खारिज कर दी.
अदालत के बाहर भी हुआ विरोध प्रदर्शन
मुकदमे के दौरान अदालत के बाहर सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई अभिभावकों ने प्रदर्शन किया. इनमें ऐसे परिवार भी शामिल थे, जिनका दावा है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण उनके बच्चों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. एक प्रदर्शनकारी लोरी शॉट ने कहा, "मार्क जुकरबर्ग और एडम मोसेरी ने दुनिया की सबसे प्रभावशाली और सबसे अमीर कंपनियों में से एक बनाई है, लेकिन ताकत किसी नुकसान को सही नहीं ठहरा सकती."
29 राज्यों का बड़ा गठबंधन
यह मुकदमा पहली बार 2023 में दायर किया गया था. कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी 29 राज्यों के गठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उनका आरोप है कि मेटा ने:
- बच्चों के लिए अपने ऐप्स के खतरों को कम करके बताया.
- ऐसे फीचर बनाए जो उन्हें बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं.
- 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा अभिभावकों की अनुमति के बिना एकत्र किया.
- स्क्रीन-टाइम नियंत्रण जैसे फीचर्स को प्रभावी बनाने के बजाय आसानी से दरकिनार किए जाने योग्य बनाया.
- 200 अरब डॉलर के जुर्माने की मांग
- राज्यों के गठबंधन ने मेटा पर लगभग 200 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने की मांग की है.
इसके अलावा वे चाहते हैं कि Facebook और Instagram में बड़े बदलाव किए जाएं, जिनमें बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमाएं, बेहतर सुरक्षा उपाय और डेटा संरक्षण के कड़े नियम शामिल हों.
'बिग टोबैको मोमेंट' क्यों कहा जा रहा है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला 1990 के दशक में तंबाकू कंपनियों के खिलाफ चले मुकदमों जैसा है. तब अमेरिकी राज्यों ने तंबाकू कंपनियों पर स्वास्थ्य नुकसान छिपाने का आरोप लगाया था और 1998 में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था. उस समझौते के बाद कंपनियों को 176 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करना पड़ा. फेडरल अदालत में चल रही यह सुनवाई करीब छह सप्ताह तक चलने की उम्मीद है. मामले में अक्टूबर तक फैसला आने की संभावना जताई गई है.
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