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नामों में 'हिंदुस्तान': मलेशिया का सत्ता केंद्र 'पेर्डाना पुत्रा' क्यों लगता है भारत जैसा? जानें संस्कृत से क्या है कनेक्शन

मलेशिया की आधिकारिक भाषा 'बहासा मलेशिया' पर संस्कृत का गहरा और अमिट प्रभाव साफ दिखाई देता है. यही कारण है कि ऐसे बहुत से शब्‍द हैं जो आपको भारतीय भाषाओं के शब्‍द लगते हैं.

नामों में 'हिंदुस्तान': मलेशिया का सत्ता केंद्र 'पेर्डाना पुत्रा' क्यों लगता है भारत जैसा? जानें संस्कृत से क्या है कनेक्शन
  • मलेशिया और भारत के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और भाषाई संबंध समुद्री व्यापार से शुरू हुए थे.
  • मलेशिया की आधिकारिक भाषा बहासा मलेशिया में संस्कृत भाषा का गहरा और अमिट प्रभाव दिखाई देता है.
  • मलेशिया की प्रशासनिक राजधानी 'पुत्राजया' का नाम संस्कृत शब्दों 'पुत्र' और 'जया' से बना है.
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मलेशिया के कई नाम और शब्द भारतीयों को अपने से क्यों लगते हैं? इसका जवाब मलेशिया और भारत के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों में छिपा है. दोनों देशों के बीच संबंधों का इतिहास पहली शताब्‍दी तक जाता है, जब भारतीय व्यापारी और विद्वान समुद्री रास्तों से मलय प्रायद्वीप पहुंचे थे. उन्‍हीं के साथ संस्कृत भाषा, हिंदू धर्म और शासन की प्रणालियां भी वहां तक पहुंची. यही कारण है कि मलेशिया की आधिकारिक भाषा 'बहासा मलेशिया' पर संस्कृत का गहरा और अमिट प्रभाव साफ दिखाई देता है और कम से कम नामों में हिंदुस्‍तान जरूर नजर आता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के मलेशिया दौरे पर हैं. पीएम मोदी का रविवार को औपचारिक स्‍वागत मलेशिया के सत्ता केंद्र ‘पेर्डाना पुत्रा' में हुआ. ‘पेर्डाना' शब्द संस्कृत के ‘प्रधान' से निकला माना जाता है, जिसका अर्थ मुख्य या सर्वोच्च होता है. यही कारण है कि यह नाम भारतीय संदर्भों से काफी मिलता‑जुलता लगता है. 

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प्रशासनिक राजधानी के नाम पर भी संस्‍कृत का प्रभाव

मलेशिया की प्रशासनिक राजधानी ‘पुत्राजया' भी संस्कृत प्रभाव का बड़ा उदाहरण है. यह नाम संस्कृत के ‘पुत्र' (राजकुमार) और ‘जया' (विजय) शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — विजयी राजकुमार. इस शहर का नाम मलेशिया के पहले प्रधानमंत्री तुंकु अब्दुल रहमान पुत्रा अल‑हाज के सम्मान में रखा गया था. 

इतिहासकारों के अनुसार, सदियों पहले भारत और दक्षिण‑पूर्व एशिया के बीच समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान के चलते संस्कृत शब्द इस क्षेत्र की भाषाओं में शामिल होते चले गए. यही वजह है कि आज भी मलेशिया में ऐसे सैकड़ों शब्द प्रचलन में हैं, जिनकी जड़ें संस्कृत या भारतीय भाषाओं से जुड़ी हुई हैं. 

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भारत नहीं, मलेशिया में हैं ये शब्‍द 

मलय शब्दसंस्कृत/भारतीय मूलअर्थ
Bhaktiभक्तिसेवा/समर्पण
Budiबुद्धिनैतिकता/चरित्र
Nagaraनगरदेश/राष्ट्र 
Rajaराजाराजा/शासक
Syurgaस्वर्गजन्नत/स्वर्ग
Manusiaमनुष्यइंसान
Bahasaभाषाजुबान/बोली

ये शब्द न सिर्फ भाषाई समानता दिखाते हैं, बल्कि भारत‑मलेशिया के साझा सांस्कृतिक इतिहास की भी गवाही देते हैं. 

जानकारों का मानना है कि संस्कृत कनेक्शन मलेशिया की पहचान का अहम हिस्सा है और आज भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का काम कर रहा है. 

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