विज्ञापन
This Article is From Mar 29, 2011

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लीबिया मुद्दे पर मंथन का दौर

वाशिंगटन: लीबिया पर सैन्य कार्रवाई के मसले पर मंगलवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों से पूर्व सोमवार को लीबिया के विद्रोहियों ने अपने अभियान में राजनीतिक और सैन्य बढ़त हासिल कर ली। मंगलवार को सैन्य कार्रवाई में शामिल देशों की लंदन में बैठक होगी जबकि रूस-उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) परिषद की इसी दिने होने वाली बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने एक संयुक्त बयान जारी करके गद्दाफी के समर्थकों से अपील की है कि वह बहुत देर होने से पहले गद्दाफी का साथ छोड़कर विद्रोहियों का साथ दें। वहीं अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने लीबिया में जारी मौजूदा घटनाक्रम पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए विचार विमर्श किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि चर्चा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने लंदन में मंगलवार को लीबिया मुद्दे पर बुलाए गए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का स्वागत किया। बयान के मुताबिक नेताओं ने लीबिया में जारी गठबंधन सेनाओं की कार्रवाई में होने वाली प्रगति पर चर्चा की। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान में कहा कि उनका देश लीबिया में आजादी चाहने वाले लोगों की मदद कर रहा है और लीबिया के शासक मुअम्मार गद्दाफी के निर्दयी दमन पर रोक लगा रहा है। ओबामा ने कहा कि हम गद्दाफी के इस्तीफे की मांग जारी रखेंगे। ओबामा ने कहा कि लीबिया के लोग चार दशक से भी ज्यादा समय से तानाशाह मुअम्मार गद्दाफी द्वारा शासित हैं। उन्होंने लोगों की आजादी की मांग खारिज की, उनकी सम्पत्ति का दोहन किया, विपक्षियों की हत्या की और पूरी दुनिया के आम लोगों को आतंकित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दूर खड़े होकर गद्दाफी की सेनाओं को बेनघाजी पर हमला करते हुए नहीं देख सकता, इसका परिणाम सात लाख की आबादी वाले इस शहर में भीषण नरसंहार हो सकता है। उन्होंने कहा, "हमने बेनघाजी पहुंच रही गद्दाफी की सेनाओं को रोका और यहां के लोगों की रक्षा की। हमारी सेना ने अजदाबिया में गद्दाफी की सेना को रोका। हमने उनकी वायु सेना को निशाना बनाया ताकि उड़ान प्रतिबंध लागू कराए जा सकें। हमने कस्बों और शहरों का घेराव कर रहे गद्दाफी की सेना के टैंकों और वाहनों को निशाना बनाया।" उधर, लीबिया में जारी मौजूदा घटनाक्रम पर विचार-विमर्श और आपसी विवाद को समाप्त करने के लिए ब्रसेल्स में मंगलवार को रूस-उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। नाटो में रूस के दूत दमित्री रोगोजिन ने कहा कि परिषद की बैठक में लीबिया पर कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा तय की गई सीमाओं की पुष्टि की जाएगी। रोगोजिन ने पिछले सप्ताह के अंत में कहा था, "लीबिया पर अधिकार के लिए जमीनी सैन्य अभियान शुरू करना सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के विपरीत है।" नाटो के प्रवक्ता ओना लंगेस्क्यू ने सोमवार को कहा कि विदेशी सैनिक लीबिया नहीं भेजे जाएंगे और लीबिया की जमीन पर नाटो के थल सैनिक मौजूद नहीं हैं। नाटो ने रविवार को लीबिया पर सैन्य कार्रवाई की कमान अमेरिका से अपने हाथ में की कवायद शुरू की है। जिम्मेदारियों के हस्तांतरण में तीन दिन लग सकते हैं। उधर फ्रांसीसी सेना के प्रवक्ता थिएरी बर्खार्ड ने सोमवार को बताया कि फ्रांस के लड़ाकू विमानों ने लीबिया के शासक मुअम्मार गद्दाफी का कमांड सेंटर नष्ट कर दिया है। रविवार को त्रिपोली से 10 किलोमीटर दूर स्थित गद्दाफी के कमांड सेंटर पर फ्रांस के दो राफेल लड़ाकू विमानों ने हमला किया।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
अंतरराष्ट्रीय, मंच, लीबिया, मंथन
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com