विज्ञापन

4 महीने से चल रही थी खामेनेई के खात्मे की तैयारी, अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच युद्ध का कारण और अंजाम

ईरान के निर्वासित राजकुमार और इज़रायल के बेंचामिन नेतन्याहू दोनों ही इन पृथकतावादी गुटों को इंगेज करने की कोशिश कर रहे हैं. जारी युद्ध के अलावा अब इज़रायल और ईरान के बीच और अगल-बगल दो बड़ी घटनाओं की आशंका है.

  • अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमले में ईरान के लगभग अड़तालीस प्रमुख नेता और अधिकारी मारे गए
  • इस हमले में बंकर और तहखानों को निशाना बनाने वाले शक्तिशाली बमों का इस्तेमाल हुआ
  • अमेरिका और इज़रायल ने हमले की योजना वर्षों पहले बनाई थी, जिसमें उच्चस्तरीय जासूसी और AI की भूमिका रही
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

28 मार्च, सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर अमेरिका और इजरायल के ज्वाइंट अटैक ने ईरान के उच्च और सर्वोच्च नेताओं की पूरी एक पीढ़ी को खत्म कर दिया. कुछ सेकेंड के भीतर ईरान के बड़े और निर्णायक नेताओं का अंत हो गया. हवा से 30 बम गिराए गए. जमीन में घुसकर बंकर और तहखानों को मिटा देने वाले इन बम ने कुछ मिनट के भीतर करीब 48 प्रमुख नेताओं और अधिकारियों को मार डाला.

हमला कितना भयानक था , ये समझने के लिए कुछ प्रमुख नाम जान लीजिए. सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई, ईरान डिफेंस काउंसिल के सलाहकार अली शामखानी, IRGS के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर, ईरान आर्म्ड फोर्स के मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी, रक्षामंत्री ब्रिगेडियर जनरल अज़ीज़ नासिरज़ादेह, सुप्रीम लीडर के मिलिट्री ऑफिस चीफ ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद शीराज़ी, SPDN प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हुसैन जबल अमेलियन, देश के लॉजिस्टिक्स चीफ ब्रिगेडियर जनरल मोहसन दार्रे बाघी – डिप्टी फॉर लॉजिस्टिक्स, ईरान पुलिस गुप्तचर शाखा के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल ग़ुलामरेज़ा रज़ायन, हेड ऑफ ऑपरेशन्स ब्रिगेडियर जनरल बह्राम हुसैनी मोंतलघ़, ईरान खुफिया मंत्रालय के सीनियर ऑफिसर मोहम्मद बासरी और ईरान के खुफिया प्रमुख सालेह असअदी जैसे बड़े और महत्वपूर्ण लोग मारे गए.

हमले के बाद अमेरिका के सेकेट्री ऑफ वॉर पेट हेगसेथ ने कहा-कल उस यूनिट के चीफ को पकड़ कर मार दिया गया है, जो प्रेसिडेंट ट्रंप की हत्या करना चाहती थी. ईरान प्रेसिडेंट ट्रंप की हत्या करना चाहता था, लेकिन इस साजिश का अंजाम प्रेसिडेंट ट्रंप ही लिखेंगे. ट्रंप ने कहा-मेरा शिकार करना चाहते थे, लेकिन अब मैं शिकारी हूं.

Latest and Breaking News on NDTV

ईरान के लिए फैसला लेने वाले नेताओं की एक साथ मौत हो गई, लेकिन पॉलिसी पैरालिसिस नहीं हुआ. फैसले की कमी नहीं खली. ईरान ने पलटकर भीषण प्रहार शुरू किया. ये हमले बौखलाहट में नहीं किए गए थे. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ईरान का जवाब बहुत सोची समझी रणनीति है. ईरान सीधे अमेरिका तक हमला नहीं कर सकता था. इसलिए उसने अपनी मारक क्षमता की रेंज में आने वाली उन जगहों को निशाना बनाया, जहां अमेरिका के इंट्रेस्ट थे. जहां इजरायल से संधि थी या वो देश जो अमेरिका और इज़रायल के दोस्त थे. नतीजा ईरान पर अमेरिका और इज़रायल का हमला एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि दुनिया का क्राइसेस बन गया. एक्सपर्टस मानते हैं कि ईरान ने पहले से तैयारी कर ली थी, क्योंकि उसे अमेरिका और इज़रायल के इरादों की भनक लग चुकी थी. इज़रायल के डिफेंस मिनिस्टर कात्ज़ के एक बयान ने ईरान की आशंका पर मुहर लगा दी है. एक इंटरव्यू में कात्ज़ ने बड़ा खुलासा किया है.

खामेनेई के खात्मे की प्लानिंग

कात्ज के मुताबिक 2025 के नवंबर में खामेनेई को खत्म करने का प्लान बन चुका था. 2026 के मई-जून पर हमला होना था. IDF और मोसाद को जिम्मेदारी दे गयी थी. प्रधानमंत्री नेतन्याहू और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बात हुई, लेकिन तभी ईरान में आतंरिक विद्रोह शुरू हो गया. आशंका थी कि घरेलू दबाव की वजह से ईरान इज़रायल और अमेरिकी अड्डों पर बड़े हमले कर सकता है, इसलिए हमें अपना हमला पहले करना पड़ा.

अयातुल्लाह अली खामेनेई को रास्ते से मिटाने की रणनीति बहुत ही सतर्क तरीके से तैयार की गयी थी. अमेरिका का पेंटागन और इज़रायल का मोसाद इसमें बहुत बारीक तरीके से काम कर रहे थे. रणनीति के तीन चरण थे.

  • पहले चरण में नेताओं को खत्म करना था
  • दूसरे चरण में एयर डिफेंस सिस्टम को बेकार करना था
  • तीसरे चरण में मिसाइल अटैक क्षमता को मिटाना था
Latest and Breaking News on NDTV

इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए बहुत सतर्क तरीके से रणनीति को अंजाम दिया गया. इसमें बहुत बड़ी भूमिका AI की रही है. खामेनेई के अंत में AI ने कैसे अहम भूमिका निभाई इसे समझने का साफ्टवेयर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के हर कदम में छिपा है.

  1. सेंट्रल  तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक सिग्नल पर अमेरिका और इज़रायल की नजर थी. सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फीड भी इज़रायल में बने कंट्रोल रूम में देखी जा रही थी. मोबाइल फोन के टॉवर और उनके सिग्नल इज़रायल के सर्विलांस साफ्टवेयर की पकड़ में थे. चौबीस घंटे और सातों दिन का डेटा इज़रायल और अमेरिका के विशेषज्ञों के पास पहुंच रहा था.
  2.  तेहरान के फोन, ट्रैफिक और सीसीटीवी कैमरे के डेटा का एनालिसिस किया जा रहा था.  इसमें AI की बड़ी भूमिका बतायी जा रही है. ये डेटा ईरान के बड़े नेताओं, अधिकारियों और सुप्रीम लीडर के बारे में था. इससे ये जानने की कोशिश की जा रही थी कि उनकी दिनचर्या क्या है? जिसे टेक्निकल भाषा में ड्रॉ आउट पैटर्न ऑफ लाइफ ऑफ एडवर्सरीज़ कहा जाता है.
  3. इतना ही नहीं तेहरान के इस इलाके में जासूस भी तैनात किए गए थे. वो टेक्निकल इनफॉरेमेशन की ट्रूथ सैंपलिंग करते थे. डेटा एनालिसिस से जो बातें निकल कर सामने आती थीं, उसकी पुष्टि फिजिकली जासूसों से करवायी जाती थी और ऐसा कई सालों से लगातार किया गया ताकि चूक की कोई गुंजाइश न रह जाए. हालांकि इधर, अमेरिका और इजरायल अपनी तैयारी कर रहे थे तो उधर ईरान भी तैयार कर रहा था. ये तैयारी कैसी थी इसे उन तस्वीरों की मदद से समझते हैं, जो हमले के बाद सामने आयीं और जब  इनकी तुलना हमले से पहले की तस्वीरों के साथ की गयी.

ईरान को इस बात की भनक थी कि देश के सबसे महत्वपूर्ण कॉम्पलेक्स पर नजर रखी जा रही है. वर्ना वो उसके हर रास्ते और खुले हिस्से को ढकने की कोशिश क्यों करते? लेकिन ईरान की ये तैयारी किसी काम नहीं आ सकी. क्योंकि अमेरिका और इज़रायल ने वॉर प्लेबुक को बदल दिया. सेना पहले सीमा पर आती है, फिर आगे बढ़ती है और सबसे अंत में राजघानी तक पहुंचती है. यहां तो ये सीधे राजधानी में घुस गए.

खामनेई का खात्मा कैसे हुआ?

28 फरवरी को सुबह सुबह इज़रायल से 200 विमानों ने उड़ान भरी. इनमें से कुछ विमान ऐसे थे, जिनमें GBU-28, GBU-57 जैसे बम लगाए गए थे. बंकर में घुसकर तबाही मचाने वाले बमों से लैस विमान एक साथ घुसे और कुछ सेकेंड के भीतर तीस से ज्यादा बम उस इलाके में गिरा दिए. बम बंकर के भीतर घुसे. दो इमारतें तबाह हुईं और करीब 40 से अधिक लोगों के मारने का दावा किया गया. इस ऑपरेशन का तीसरा दूसरा चरण कुछ देर बाद शुरू हुआ. इसमें इजरायल से लड़ाकू विमान उड़े. उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया. ईरान की एयर डिफेंस को पूरी तरह तबाह कर दिया गया.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

हमले के बाद अयातुल्लाह खामेनेई और उनकी पत्नी को हॉस्पिटल पहुंचाया गया था. स्थानीय मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, खामेनेई और उनकी पत्नी की मौत हास्पिटल में हुई. जबकि खामेनेई की बहू, उनके बच्चे और बेटी-दामाद की मौत वहीं हो गयी थी.

हमले के जो वीडियो इज़रायल की सेना ने जारी  किए हैं, वो अंदर से हिलाने वाले हैं. बम की मारक क्षमता और विनाश का भीषण अहसास कराने वाले हैं. अमेरिका और इज़रायल की वायुसेना ने कई कई बार उसी जगह पर बमबारी करने के वीडियो सबूत दिए हैं, जहां खामेनेई और उनके साथियों को मार डालने का दावा किया गया है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का तीसरा चरण तब तक चलेगा, जब तक कि ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को पूरी तरह से तबाह नहीं कर दिया जाता है.

अमेरिका के सेकेट्री ऑफ वॉर पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका मतलब है अपराजेय. अगर अमेरिका के नागरिकों की हत्या होगी. अमेरिकन्स को धमकी दी जाएगी तो ऐसा करने वाले को हम दुनिया के किसी भी कोने में खोज निकालेंगे. उसे पकड़ेंगे और मार डालेंगे. इसमें न तो हमें कोई हिचक होगी और न ही हम शर्मिंदा होंगे. ऐसे लोगों के खिलाफ ही एपिक फ्यूरी है. ईरानी रैडिकल्स को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी.

पूरा मिडिल ईस्ट जल रहा

लड़ाई ईरान और इज़रायल-अमेरिका के बीच की है. लेकिन निशाने पर तेहरान से 538 किलोमीटर दूर अजरबैजान. 772 किलोमीटर दूर कुवैत. 694 किलोमीटर दूर इराक. 1056 किलोमीटर दूर बहरीन. 1157 किलोमीटर दूर क़तर. 1282 किलोमीटर दूर संयुक्त अरब अमीरात. 1304 किलोमीटर दूर सऊदी अरब. 1488 किलोमीटर दूर जॉर्डन. 1503 किलोमीटर दूर ओमान और 1635 किलोमीटर दूर साइप्रस हैं.

इस युद्ध में ईरान के जवाब ने एक जियो पोलिटकल केयॉस को जन्म दिया है. ईरान ने एक बड़ी कंपनी के डेटा सेंटर और रेडोम्स पर अटैक किया है. ये दिखाता है कि इस पूरे ऑपरेशन में डेटा, उसके एनालिसिस और AI का बड़ा इस्तेमाल किया गया है. अमेरिकी कंपनी एथ्रोपिक और पेंटागन का विवाद इतना ज्यादा हो गया कि अमेरिका की सरकार ने अपने ही देश की कंपनी को ऐसी लिस्ट में डाल दिया, जिसमें देशविरोधी कंपनियों का नाम लिखा रहता है. इस सूची में अमेरिका के व्यापारिक विरोधी चीन की कंपनियों का नाम लिखा है. ये साबित करता है कि ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई की सत्ता को बदलने के लिए अमेरिका कितना ज्यादा गंभीर था और इसके लिए वो किस हद तक जाने को तैयार है. हालांकि दुनिया में एक गुट ऐसा है, जो मानता है कि ईरान के खिलाफ एक्शन में एआई और टेक्नालॉजी को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. ये पश्चिमी दुनिया का ऐसा प्रयास है, जो उनके बिजनेस हित और साइंटिफिक सुपरमेसी के नेरटिव को सूट करता है.

क्यों अमेरिका-इजरायल की आंख का कांटा थे खामेनेई ?

अयातुल्लाह खामेनेई 36 साल से ईरान का चेहरा थे. उनकी रणनीति के तीन प्रमुख चेहरे थे.

  • पहला:- मध्यपूर्व में तेल और गैस के मुख्य गलियारे होर्मुज स्ट्रेट का एक रिमोट कंट्रोल ईरान के पास रहता था.
  • दूसरा:-ईरान के इशारे पर मिलिशिया संगठन. हिज्बुल्लाह-लेबनान और जॉर्डन में तो हूती-यमन में. ईराक में शिया मिलिशिया. फिलिस्तीन में हमास. सीरिया में फातेमियून डिवीजन और जै़नूबियन ब्रिगेड, कुदूस फोर्स प्रमुख हैं.
  • तीसरा:- शिया क्रिसेंट. ईरान, दक्षिण इराक, पश्चिमी सीरिया /अलवाइट क्षेत्र, लेबनान, बहरीन, अज़रबैजान, उत्तर-पश्चिम यमन के ज़ैदी शिया, अफगानिस्तान का हजारजात क्षेत्र, पाकिस्तान, साऊदी अरब और अरब के पूर्वी शिया क्षेत्र.
Latest and Breaking News on NDTV

ये तीनो चीजें इज़रायल और अमेरिका को बिल्कुल पसंद नहीं थी. ये अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा थीं. इज़रायल के भौगोलिक सुरक्षा के खिलाफ थीं. इसके साथ ईरान के दो प्रमुख स्ट्रेटजिक कदम ऐसे थे, जो पूरी दुनिया में अमेरिका-इज़रायल की पॉवर को चुनौती दे रहे थे.

नंबर-एक- परमाणु बम का विकास और नंबर-दो लंबी दूरी की मिसाइल का विकास.

इनकी वजह से ईरान लगातार अमेरिका और इज़रायल के निशाने पर था.  अयातुल्लाह खामेनेई इस इलाके में एक बख्तरबंद व्यक्तित्व थे, जो अमेरिका और इज़रायल के लिए चुनौती थे. शायद यही वजह है कि अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान में अब सत्ता किसके पास रहेगी, इसका फैसला भी अमेरिका करेगा.

अमेरिका का एंड गेम

अमेरिका चाहता है कि ईरान में एक बार फिर 1979 से पहले की स्थिति लौट आए. तब ईरान का समाज पश्चिमी तौर तरीकों के हिसाब से चलता था. बाजार और घर में महिलाएं वेस्टर्न कल्चर में देखी जाती थीं. आज की तरह हिजाब वाली महिलाएं ईऱान की पहचान नहीं थीं. तब लिबरल, प्रोग्रेसिव, फ्रीविल की-वर्ड्स हुआ करते थे, लेकिन राजशाही पर भीषण भ्रष्टाचार के आरोप लगे और1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की गद्दी से शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को उतार दिया गया. रूहेल्ला खामेनेई सुप्रीम लीडर बने थे. जिनके बाद1989 में अयातुल्लाह खामेनेई सुप्रीम लीडर बने. ईरान के समाज में बार बार आंदोलन होते रहे हैं. डेमोक्रेसी, लिबरल और आजादी की मांग को मुद्दा बनाया गया है. इसलिए जब ट्रंप अपने जैसे किसी
शासक की बात करते हैं तो पहलवी राजवंश के निर्वासित राजकुमार रेज़ा पहलवी की चर्चा सबसे ज्यादा होती है. हालांकि, ईरान की सत्ता और समाज की परख रखने वाले एक्सपर्टस का मानना है कि सत्ता का बदलाव कभी भी मिसाइल और बम के इस्तेमाल जैसा नहीं होता है. इसके लिए जरूरी चीजों की कमी पहलवी राजवंश के लोगों में है.
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजमिन नेतन्याहू निर्णायक मोड में शिफ्ट हो चुके हैं. उनकी तैयारी फाइनल है. अगर हम ईरान-अमेरिका और इज़रायल के बीच गुजरे तीन साल देखें तो हमको कुछ अहम घटनाएं नजर आती हैं.

  1. ऑपरेशन डेज़ ऑफ रेपेनटेंस, 26 अक्टूबर 2024: ईरान के भीतर 20 टारगेट फिक्स किए गए थे. जिसका कोडनेम 3वेव स्ट्राइक्स था. इसका लक्ष्य ईरान के मिसाइल उत्पादन क्षमता को बुरी तरह से नष्ट करना था. एयर डिफेंस नेटवर्क को मिटाना था. तेहरान और ईरान के दक्षिण पश्चिम सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए.
  2. ऑपरेशन राइज़िंग लॉयन, 13 से 24 जून 2025: ईरान के खिलाफ इज़रायल का अभियान. जिसका मकसद वरिष्ठ सैन्य कमांडर, परमाणु वैज्ञानिक, मिसाइल लॉन्चर और रक्षा प्रणालियों को नष्ट करना था.
  3. ऑपरेशन मिडनाइट हैमर, जून 2025: टारगेट था ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को कमजोर करना. ऑपरेशन छोटा और बेहद केन्द्रित था.
Latest and Breaking News on NDTV

इन सभी हमलों का मकसद सिर्फ और सिर्फ चार चीजों के इर्द-गिर्द है. ईरान के प्रमुख सुरक्षा अधिकारियों का सफाया. ईरान के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों का खात्मा. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पटरी से उतारना. ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना. इसके बाद  2025 में  एक और बड़ा ऑपरेशन अंजाम दिया गया. जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और ऑपरेशन लॉयन्स रोर का पूर्व अभ्यास कहा जा सकता है.

13 जून 2025 की रात 3 बजे पूरे इज़रायल में सायरन बजा और ऐम कलावी की शुरूआत हो गयी. इज़रायल ने इसे ईरान के खिलाफ ऐतिहासिक और सबसे बड़े प्री एम्पटिव स्ट्राइक का नाम दिया. इसका उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता का पूर्ण विनाश. ईरान की बेलास्टिक मिसाइल क्षमता का संपूर्ण नाश और ईरानियन रिवोल्यूशनरी गार्डस कॉर्प्स के बड़े कमांडर्स को खत्म करना.

पिछले दो साल से लगातार ईरान के खिलाफ इज़रायल और अमेरिका के टारगेटेड प्रयास चल रहे हैं. ऐसे में दो सवाल हैं- क्या ईरान खुद को बचा पाने में सफल होगा? दूसरा क्या ईरान में अमेरिका और इज़रायल की पैदल सेनाएं उतारी जाएंगी?

ईरान की जमीन पर उतरेगा अमेरिका?

दूसरे की जमीन पर उतरकर युद्ध लड़ने में अमेरिका का अनुभव अच्छा नहीं है. इसलिए माना ये जा रहा है कि अब ईरान को पांच हिस्सों में बांटने की रणनीति भी अपनायी जा सकती है. ईरान में लंबे वक्त से पांच प्रमुख जातीय पहचान के लोग अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं.

स्वतंत्र कुर्दिस्तान की मांग 1946 से हो रही है. से सबसे पुराने और प्रमुख हैं. इसके बाद ईरान के दक्षिण पूर्व सिस्तान-बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच. ईरान के खुजेस्तान प्रांत में बसे अहवाज़ी अरब. दक्षिण अज़रबैजान में अज़रबैजानी तुर्क. उत्तर-पूर्व ईरान में तुर्कमेन.

ईरान के निर्वासित राजकुमार और इज़रायल के बेंचामिन नेतन्याहू दोनों ही इन पृथकतावादी गुटों को इंगेज करने की कोशिश कर रहे हैं. जारी युद्ध के अलावा अब इज़रायल और ईरान के बीच और अगल-बगल दो बड़ी घटनाओं की आशंका है. पहली ईरान का पांच हिस्सों में बंटवारा और दूसरी वृहत्तर इज़रायल. इन दोनों ही स्थितियों में इस पूरे इलाके में बड़ी उथल-पुथल होगी. जो इस हवाई हमले और अब तक हुए युद्धों से भी ज्यादा विस्फोटक साबित हो सकती है. खामेनेई और उनके सिस्टम का अंत ईरान और दुनिया में एक नए वर्ल्ड ऑर्डर को जन्म देगा, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन ये दुनिया के हित में होगा या खिलाफ ये इस बात पर निर्भर करेगा कि खामेनेई की जगह कौन लेगा और ईरान के लोग उसे कैसे स्वीकार करेंगे?

ये भी पढ़ें-

इजरायल देता रह गया धमकी, ईरान ने चुन लिया नया सुप्रीम लीडर: रिपोर्ट

ईरान से लेकर दुबई तक खाड़ी के सभी देश आग में जल रहे, VIDEO डरा देंगे

भारत का दुश्मनों के लिए बारूदी प्लान: 'शेषनाग और काल' तैयार, नये ड्रोन प्रोजेक्ट्स करेंगे हैरान

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com