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जेएनयू प्रोफेसर अमिताभ मट्टू का नेपाल में बयान- 'बफर' नहीं, बल्कि एक 'रणनीतिक मध्यस्थ' बनिए

इस चर्चा में चीन के उदय, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की कोशिश, भारत-चीन संबंधों में हो रहे बदलाव और एशिया की उभरती व्यवस्था को आकार देने में क्षेत्रीय व वैश्विक ताकतों की व्यापक भूमिकाओं पर बात की गई.

जेएनयू प्रोफेसर अमिताभ मट्टू का नेपाल में बयान- 'बफर' नहीं, बल्कि एक 'रणनीतिक मध्यस्थ' बनिए
भारत-नेपाल के संबंध हमेशा से अच्छे रहे हैं.
  • प्रोफेसर अमिताभ मट्टू ने नेपाल को बड़ी ताकतों के बीच रणनीतिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका बढ़ाने की सलाह दी
  • मट्टू ने एशिया की बदलती शक्ति गतिशीलता और क्षेत्रीय रणनीतिक विकल्पों पर गहराई से चर्चा की
  • नेपाल को कूटनीति, संस्थागत सहयोग और क्षेत्रीय जुड़ाव के माध्यम से अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़ना चाहिए

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय  के प्रोफेसर अमिताभ मट्टू ने कहा है कि नेपाल को बड़ी ताकतों के बीच एक 'बफर' या 'पुल' के रूप में अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़ना चाहिए. उन्हें कूटनीति, संस्थागत सहयोग और क्षेत्रीय जुड़ाव के जरिए खुद को एक 'रणनीतिक मध्यस्थ' के रूप में स्थापित करना चाहिए.

क्यों कहा ऐसा

'एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी एंड इंटरनेशनल अफेयर्स' द्वारा आयोजित एक व्याख्यान में बोलते हुए, मट्टू ने एशिया की बदलती शक्ति गतिशीलता और इस क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाले रणनीतिक विकल्पों का विश्लेषण किया. "एशिया का भविष्य: भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण, चीन का उदय और एशियाई व्यवस्था का भविष्य शीर्षक वाला यह व्याख्यान, AIDIA के 'सेंटर फॉर एशियन फ्यूचर्स' द्वारा आयोजित दूसरी श्रृंखला का हिस्सा था. इसमें 'मास्टर इन इंटरनेशनल अफेयर्स, इकोनॉमी एंड डिप्लोमेसी' (MIAED) कार्यक्रम के पहले बैच के छात्र शामिल हुए, जिसे काठमांडू विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में चलाया जा रहा है.

इस चर्चा में चीन के उदय, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की कोशिश, भारत-चीन संबंधों में हो रहे बदलाव और एशिया की उभरती व्यवस्था को आकार देने में क्षेत्रीय व वैश्विक ताकतों की व्यापक भूमिकाओं पर बात की गई. मट्टू ने तर्क दिया कि एशिया के भविष्य को किसी एक "एशियाई सदी" के पारंपरिक विचार के बजाय, कई अलग-अलग संभावनाओं के रूप में समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की दिशा किसी पहले से तय रास्ते पर नहीं, बल्कि कई अलग-अलग पक्षों, परस्पर विरोधी हितों और रणनीतिक विकल्पों से तय होगी.

नेपाल की स्थिति कैसी

इस व्याख्यान में रणनीतिक विविधीकरण और मजबूत संस्थानों के महत्व पर भी जोर दिया गया. साथ ही, यह भी बताया गया कि कैसे बड़ी ताकतों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद, छोटे देश अपनी सार्थक भूमिका निभा सकते हैं. प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए और मट्टू का परिचय देते हुए, AIDIA के कार्यकारी उपाध्यक्ष और MIAED के प्रमुख, राजदूत दुर्गा बहादुर सुबेदी ने कहा कि अलग-अलग देश इस उभरती क्षेत्रीय व्यवस्था में जो विकल्प, विचार और संस्थाएं लाएंगे, उन्हीं से एशिया का भविष्य तय होगा.

सुबेदी ने कहा, "सेंटर फॉर एशियन फ्यूचर्स के ज़रिए, AIDIA रणनीतिक विचारकों की अगली पीढ़ी को तैयार करना चाहता है. ये विचारक तात्कालिक भू-राजनीतिक बदलावों से परे देख सकें और एशिया के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकें—जिसमें नेपाल की भूमिका भी शामिल है." इस सत्र का उद्देश्य अकादमिक दृष्टिकोणों को समकालीन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जोड़ना था. इसमें विशेष रूप से इस बात पर चर्चा की गई कि बदलती भू-राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत स्थितियां नेपाल जैसे देशों के लिए क्या मायने रखती हैं.

इसका मुख्य संदेश यह था कि एशिया का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यहां के देश और संस्थाएं कैसी रणनीतिक पसंद चुनती हैं. 'सेंटर फॉर एशियन फ्यूचर्स', AIDIA की एक पहल है. यह एशिया के बदलते भू-राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत परिदृश्य पर शोध, रणनीतिक दूरदर्शिता और नीति-केंद्रित संवाद पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य इस पूरे क्षेत्र के समाजों और संस्थाओं की मदद करना है, ताकि वे 10 से 50 वर्षों के समय-सीमा में एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ भविष्य का निर्माण कर सकें.

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