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दिल्ली से आधी आबादी वाला इजरायल इतना ताकतवर कैसे बना? क्यों थर्राते हैं दुश्मन देश, 5 बड़ी वजहें

PM Narendra Modi Israel Visit: PM मोदी 9 सालों के बाद दूसरी बार इजरायल के दौरे पर गए हैं. पीएम मोदी के इस दौरे में भारत और इजरायल के बीच एक बड़े सुरक्षा समझौते का नया MoU साइन होने की उम्मीद है.

दिल्ली से आधी आबादी वाला इजरायल इतना ताकतवर कैसे बना? क्यों थर्राते हैं दुश्मन देश, 5 बड़ी वजहें
Israel Military Defense Superpower: इजरायल कैसे बना इतना ताकतवर देश
  • PM मोदी 9 सालों के बाद दूसरी बार इजरायल दौरे पर गए हैं
  • भारत और इजरायल के बीच एक नए सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है
  • इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद अपने प्रोएक्टिव सुरक्षा रणनीति और जटिल ऑपरेशन के लिए जानी जाती है
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PM Narendra Modi Israel Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की इजरायल यात्रा पर गए हैं. पीएम मोदी के अनुसार उनकी यह राजकीय यात्रा दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों को और मजबूत करेगी व रणनीतिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगी. पीएम मोदी की यह यात्रा अहम है क्योंकि लगभग 9 साल के बाद वह इजरायल दौरे पर जा रहे हैं. वे नेसेट यानी इजरायली संसद को संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वो भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे. पीएम मोदी के इस दौरे में भारत और इजरायल के बीच एक बड़े सुरक्षा समझौते का नया MoU साइन होने की उम्मीद है. इस समझौते में संवेदनशील टेक्नोलॉजी शेयरिंग और संयुक्त उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। इससे भारत की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिस इजरायल की आबादी दिल्ली की आबादी से आधी है, वह इतना ताकतवर कैसे बन गया. चलिए आपको यहां इसकी 5 वजहें बताते हैं.

1- खुफिया एजेंसी मोसाद: इजरायल का सबसे मजबूत कवच

इजराइल की ताकत के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी शक्तिशाली खुफिया एजेंसी मोसाद है. इसे दुनिया की सबसे प्रभावी (इफेक्टिव) खुफिया एजेंसी में से एक माना जाता है. मोसाद जासूसी करने, आतंकवादी गतिविधियां रोकने, गुप्त अभियान (ब्लैक ऑप) चलाने और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में माहिर है. दशकों से, मोसाद ने इजरायल में पहुंचने से पहले खतरों को बेअसर करने के लिए अपने देश के बॉर्डर से बाहर भी अत्यधिक जटिल ऑपरेशन किए हैं. इसे इजरायल की प्रोएक्टिव सुरक्षा रणनीति मानी जाती है. इस वजह से इजरायल अधिकतर मौकों पर हमला होने के बाद प्रतिक्रिया नहीं देता, उसकी बजाय वो हमलों को पहले ही रोक देता है.

2- डिफेंस तकनीक में बेजोड़ इजरायल

इजरायल अपने एडवांस रक्षा तकनीक के लिए विश्व स्तर पर पहचाना जाता है. इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और एल्बिट सिस्टम्स जैसी कंपनियां विश्व स्तर के हथियार, ड्रोन, रडार सिस्टम और साइबर रक्षा उपकरण बनाती हैं. इसका एक प्रमुख उदाहरण आयरन डोम है, जो एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है जो आने वाले रॉकेटों को हवा में ही रोक देती है. इजरायल न केवल इन तकनीकों का उपयोग अपनी सुरक्षा के लिए करता है बल्कि दुनिया भर में रक्षा उपकरणों का निर्यात भी करता है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव दोनों मजबूत होते हैं.

3- रिसर्च एंड डवलपमेंट पर बड़ा खर्च

इजरायल दुनिया में रिसर्च और डेवलपमेंट पर अपनी GDP का सबसे अधिक प्रतिशत (6%) खर्च करता है. यह निवेश रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चिकित्सा और स्पेस टेक्नोलॉजी में नवाचार यानी इनोवेशन को बढ़ावा देता है. इस वजह से इजरायल अपने विरोधियों पर तकनीकी श्रेष्ठता सुनिश्चित करता है. वहां की यूनिवर्सिटीज, प्राइवेट कंपनियों और सेना के बीच मजबूत सहयोग का इकोसिस्टम बनाया गया है. इससे रिसर्च को वास्तविक दुनिया के समाधानों में तेजी से बदलने में मदद मिलती है. ना रुकने वाला इनोवेशन का यह चक्र इजरायल को रणनीतिक और आर्थिक रूप से आगे रखता है.

4- 18 साल के नागरिक के लिए आर्मी ट्रेनिंग अनिवार्य

इजरायल में अधिकांश नागरिकों के लिए 18 साल की आयु के बाद सैन्य सेवा अनिवार्य है. पुरुष और महिला दोनों सशस्त्र बलों में सेवा करते हैं (कुछ छूटों के साथ)। इससे किसी भी जंग की सूरत में राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार प्रशिक्षित और अनुशासित व्यक्तियों का एक बड़ा समूह तैयार होता है. इस सिस्टम के कारण, इजरायल के पास एक मजबूत रिजर्व फोर्स होता है. किसी भी आपात स्थिति के दौरान इस फोर्स को तेजी से मॉबिलाइज किया जा सकता है. 
 

5- स्टार्टअप नेशन कहलाता है इजरायल

इजरायल में स्टार्टअप का कल्चर है. यहां प्रति व्यक्ति स्टार्टअप की उच्च संख्या के कारण इजरायल को अक्सर "स्टार्टअप नेशन" कहा जाता है. अपनी छोटी आबादी के बावजूद, इजरायल में टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, फिनटेक, बायोटेक और AI में हजारों स्टार्टअप हैं. तेल अवीव जैसे शहर वैश्विक तकनीकी केंद्र बन गए हैं. यहां का कल्चर ही लोगों को रिस्क लेने, कुछ नया खोजने के लिए प्रोत्साहित करती है. इतना ही नहीं कई पूर्व सैन्य अधिकारी भी सफल तकनीकी कंपनियों को लॉन्च करने के लिए अपने तकनीकी अनुभव का उपयोग करते हैं.

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