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UN में ईरान को रूस और चीन ने दिया धोखा? ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव आया लेकिन 'ब्रह्मास्त्र' नहीं चलाया

UNSC adopts resolution condemning Iran’s attacks: भारत भी ईरान के हमलों के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर करने वाले 135 देशों में शामिल था.

UN में ईरान को रूस और चीन ने दिया धोखा? ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव आया लेकिन 'ब्रह्मास्त्र' नहीं चलाया
UN Iran War: UNSC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा का प्रस्ताव पारित किया
  • प्रस्ताव में खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और शांति के लिए खतरा बताया गया
  • रूस और चीन ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं दिया. उसने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया. इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के खुलेआम दुरुपयोग की निंदा की. ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई. गौर करने वाली बात यह कि रूस और चीन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो वोट देने की बजाए वोट नहीं देने का विकल्प चुना. पाकिस्तान ने भी ईरान के खिलाफ वोट दिया है. भारत भी इस प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर करने वाले 135 देशों में शामिल था.

सुरक्षा परिषद में पास प्रस्ताव में क्या था?

प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई. इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. बहरीन ने ईरान द्वारा इन देशों के खिलाफ किए जा रहे सभी हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की. साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया.

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है. वहीं पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों में कम से कम दो पाकिस्तानी नागरिकों की जान चली गई और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों अन्य पाकिस्तानी खतरे में हैं. ईंधन की आपूर्ति और आवश्यक विमानन संपर्क भी बाधित हो गए हैं.

उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बातचीत और कूटनीति की ओर शीघ्र लौटने का आह्वान करते हैं." फ्रांस के प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने आरोप लगाया कि वर्तमान तनाव बढ़ने के लिए ईरान काफी हद तक जिम्मेदार है. फ्रांस काफी समय से ईरान के परमाणु खतरों से चिंतित रहा है.

बहरीन के इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद ने 13 वोटों से पारित कर लिया गया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि वह इन हमलों से अछूता नहीं है. सुरक्षा परिषद ने ईरान के साथ संवाद को सुगम बनाने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के उद्देश्य से जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों को भी स्वीकार किया.

साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की. साथ ही खाड़ी राज्यों और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन को दोहराया.

रूस के प्रस्ताव पर तो अमेरिका ने वीटो कर दिया

इससे पहले रूस ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आग्रह किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया. रूस के इस प्रस्ताव के पक्ष में रूस, चीन, सोमालिया और पाकिस्तान के चार मत प्राप्त हुए, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और लातविया ने इसके विरुद्ध मतदान किया.

यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बहरीन, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लाइबेरिया और पनामा सहित नौ सदस्यों ने मतदान से परहेज किया.

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