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भारत में BRICS के मंच से ईरान की अमेरिका-इजरायल को दो टूक, अराघची बोले- "न झुके हैं, न कभी झुकेंगे"

BRICS Talks in New Delhi: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हो रही BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक में अराघची का भाषण सबसे ज्यादा आक्रामक और भावनात्मक भाषणों में से एक माना गया है.

भारत में BRICS के मंच से ईरान की अमेरिका-इजरायल को दो टूक, अराघची बोले- "न झुके हैं, न कभी झुकेंगे"
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए हैं.
  • BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल को निशाने पर लिया
  • अराघची ने कहा कि ईरान केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए पश्चिमी दबाव के खिलाफ लड़ रहा है
  • उनके आक्रामक भाषण ने बैठक का माहौल बदल दिया और BRICS देशों की प्रतिक्रिया पर वैश्विक नजरें टिकी हैं
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BRICS Talks in New Delhi: नई दिल्ली में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बेहद भावुक और आक्रामक भाषण दिया. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ “क्रूर और गैरकानूनी हमला” करने का आरोप लगाया और साफ कहा कि ईरान कभी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है. अराघची ने दावा किया कि ईरान सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे “ग्लोबल साउथ” के लिए लड़ रहा है. उनके भाषण ने बैठक का माहौल पूरी तरह बदल दिया और दुनिया की नजर अब BRICS देशों की प्रतिक्रिया पर टिक गई है.

उन्होंने BRICS देशों से अपील की कि वे पश्चिमी देशों की “मनमानी” के खिलाफ ठोस कदम उठाएं. भारत की 2026 अध्यक्षता में नई दिल्ली में हो रही BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अराघची का भाषण सबसे ज्यादा आक्रामक और भावनात्मक भाषणों में से एक माना गया है. उन्होंने हाल के सैन्य हमलों में ईरान में हुई मौतों और नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की लड़ाई सिर्फ उसकी अपनी नहीं, बल्कि पूरे “ग्लोबल साउथ” की लड़ाई है.

“हम कभी नहीं झुके, और कभी नहीं झुकेंगे”

अराघची ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि एक साल से भी कम समय में ईरान पर दो अलग-अलग हमले हुए और अमेरिका तथा इजरायल ने इन्हें सही ठहराने के लिए “झूठे दावे” किए. उन्होंने कहा कि ये दावे अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA और यहां तक कि अमेरिका की अपनी खुफिया एजेंसियों के आकलन (एसेसमेंट) के खिलाफ हैं.

ईरानी विदेश मंत्री ने भावुक होकर अपने देश के लोगों की मजबूती का जिक्र किया. उन्होंने डॉक्टरों, शिक्षकों, सैनिकों और “मिनाब की उन माताओं” का उल्लेख किया जिन्होंने अपने बच्चों को खोने के बावजूद हार नहीं मानी. उन्होंने यहां सवाल किया, “क्या ईरान ने अपनी आजादी के सिद्धांतों से पीछे हटकर साम्राज्यवादी ताकतों के सामने घुटने टेक दिए?” फिर खुद ही जवाब देते हुए कहा, “जवाब साफ है- हमने ऐसा नहीं किया और कभी नहीं करेंगे.”

यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेजी से बढ़ चुका है. इजरायल की सैन्य कार्रवाई गाजा से आगे बढ़कर लेबनान तक पहुंच चुकी है और तेहरान का दावा है कि ईरानी क्षेत्र और सैन्य ढांचे को भी सीधे निशाना बनाया गया. इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र पिछले कई दशकों के सबसे खतरनाक तनाव में फंस गया है.

“नए वर्ल्ड ऑर्डर की लड़ाई”

अराघची ने ईरान की सैन्य और कूटनीतिक लड़ाई को वैचारिक संघर्ष बताया. उन्होंने कहा कि कमजोर पड़ रही पश्चिमी ताकतें उभरते हुए “ग्लोबल साउथ” को रोकने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने कहा, “गिरती हुई साम्राज्यवादी ताकतें समय को पीछे ले जाना चाहती हैं और गिरते वक्त बुरी तरह हमला कर रही हैं.” उन्होंने BRICS को एक नई और ज्यादा न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यह व्यवस्था अभी “नाजुक” है.

अराघची ने कहा, “ईरान की लड़ाई हम सभी की रक्षा के लिए है- उस नई दुनिया की रक्षा के लिए जिसे हम मिलकर बना रहे हैं.” उन्होंने कहा कि ईरानी सैनिकों ने “पश्चिमी वर्चस्व” और अमेरिका की “मनमानी” के खिलाफ अपनी जान दी है. उन्होंने बैठक में मौजूद दूसरे देशों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पश्चिमी दबाव का अनुभव वहां मौजूद लगभग हर देश ने किया है.

उन्होंने कहा, “अमेरिका की दबंगई के खिलाफ हमारी लड़ाई यहां बैठे लोगों के लिए कोई अनजानी बात नहीं है. हममें से कई देश अलग-अलग रूप में इसी तरह के दबाव का सामना करते हैं.”

ईरान ने BRICS देशों से क्या मांग की?

अराघची ने BRICS देशों से सीधी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और ईरान पर “गैरकानूनी हमले” की खुलकर निंदा करनी चाहिए. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के “राजनीतिक इस्तेमाल” को रोकने और युद्ध भड़काने वाली गतिविधियों को खत्म करने की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. अराघची ने पश्चिमी देशों पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी सरकारें अब उन चीजों को भी स्वीकार कर रही हैं जिन्हें पहले अकल्पनीय माना जाता था, जैसे “भयानक नरसंहार, देशों की संप्रभुता का उल्लंघन और खुलेआम समुद्री लूट.”

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की चुप्पी ने “मनमानी की संस्कृति” को और मजबूत किया है. उन्होंने कहा, “इस झूठे अधिकार की भावना को हम सभी को मिलकर तोड़ना होगा.”

टकराव के बीच कूटनीति की बात

भले उनका भाषण काफी आक्रामक था, लेकिन अराघची ने यह दिखाने की कोशिश भी की कि ईरान बराबरी के आधार पर बातचीत में विश्वास करता है. उन्होंने कहा, “ईरान से जुड़े किसी भी मुद्दे का सैन्य समाधान नहीं है.” उन्होंने आगे कहा, “हम कभी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकते, लेकिन सम्मान की भाषा का जवाब सम्मान से देते हैं.” उन्होंने ईरानी जनता को “शांति पसंद” बताया और कहा कि ईरान “पीड़ित है, आक्रमणकारी नहीं.” यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय भूमिका को लेकर ईरान पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं. 

अराघची के भाषण ने भारत को भी एक संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति में ला दिया है. भारत लगातार बातचीत और शांति की वकालत करता रहा है, लेकिन उसके रणनीतिक संबंध ईरान और पश्चिमी देशों दोनों के साथ हैं. अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि BRICS देश अमेरिका और इजरायल की खुली निंदा की ईरान की मांग पर क्या सामूहिक रुख अपनाते हैं.

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