- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए हैं
- अराघची जिस विमान से भारत पहुंचे उसका नाम #Minab168 था, जो युद्ध में मारी गई लड़कियों की याद दिलाता है
- ईरान ने BRICS में अपनी भागीदारी को बहुपक्षीय व्यवस्था मजबूत करने और आर्थिक न्याय के लिए रणनीतिक बताया है
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस समय भारत में हैं. यह युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान की तरफ से पहली बड़ी कूटनीतिक यात्रा मानी जा रही है. अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए हैं. यह बैठक दिल्ली में शुरू हो चुकी है, जिसमें ऊर्जा संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका-इजरायल युद्ध जैसे बड़े मुद्दों पर अहम चर्चा होने वाली है. खास बात यह है कि अराघची जिस विमान से भारत आए, उसका नाम भी युद्ध में मारे गए बच्चों की याद से जुड़ा था.
दरअसल ईरानी विदेश मंत्री जिस विमान से भारत पहुंचे, उसका नाम “मिनाब168” था. यह नाम ईरान के शहर मिनाब के उस स्कूल की याद में रखा गया है जहां युद्ध शुरू होने पर मिसाइल हमले में 168 लड़कियों की मौत हो गई थी.
अराघची के एजेंडे में क्या है?
अराघची और जयशंकर के बीच बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा प्रमुख रहने की संभावना है. यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से सामान्य समय में दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, भारत इस बातचीत में होरमुज से गुजर रहे बाकी व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का मुद्दा उठा सकता है.
अराघची और BRICS देशों के दूसरे विदेश मंत्री गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में मिडिल ईस्ट संकट और उसका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर सबसे बड़ा मुद्दा रहने की उम्मीद है.
ईरान ने क्या कहा?
ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबाद भी BRICS बैठक के लिए नई दिल्ली में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि BRICS जैसे मंचों में ईरान की सक्रिय भागीदारी एक रणनीतिक फैसला है. उन्होंने कहा कि इसका मकसद असली बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करना, बराबरी पर आधारित सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ज्यादा न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने में योगदान देना है.
उन्होंने X पर पोस्ट में कहा, “नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक ग्लोबल साउथ के भविष्य, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में सुधार, स्वतंत्र व्यापार, वित्तीय और बैंकिंग संबंध मजबूत करने और देशों की भेदभावपूर्ण व एकतरफा व्यवस्थाओं पर निर्भरता कम करने पर बातचीत का महत्वपूर्ण मौका हो सकती है.”
ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान अपनी भू-राजनीतिक स्थिति, ऊर्जा संसाधनों, ट्रांजिट नेटवर्क, वैज्ञानिक क्षमता और मानव संसाधनों के जरिए BRICS के एजेंडे में अहम भूमिका निभा सकता है।उन्होंने कहा कि संतुलित विकास, आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय संपर्क और स्वतंत्र देशों की आवाज मजबूत करने में ईरान योगदान दे सकता है. उन्होंने यह भी कहा, “अमेरिका के एकतरफा दबाव वाले कदमों और उनके गैरकानूनी तथा विकास विरोधी असर का विरोध करना आर्थिक न्याय और देशों के विकास के अधिकार की रक्षा का जरूरी हिस्सा है.”
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