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ब्रह्मोस पर डील, रणनीतिक साझेदारी.. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के वियतनाम दौरे के लिए खास प्लान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे के दौरान कई अहम डील हो सकते हैं. माना जा रहा है कि इस दौरान ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी डील हो सकती है.

ब्रह्मोस पर डील, रणनीतिक साझेदारी.. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के वियतनाम दौरे के लिए खास प्लान
राजनाथ सिंह विजतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर जाएंगे
नई दिल्ली:

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले हफ्ते  वियतनाम और दक्षिण कोरिया दौरे पर जाएंगे. इस दौरे का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करना है. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दो बड़े रक्षा मोर्चों पर तेजी दिख रही है. पहला है वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील वहीं, दूसरा है दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा समझौते की साझेदारी. 

वियतनाम में ब्रह्मोस डील पर फोकस

वियतनाम के दौरे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का मुख्य लक्ष्य ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित बिक्री होगी. यह मिसाइल भारत और रूस ने मिलकर बनाई है. इस डील पर कई सालों से बातचीत चल रही है. हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के भारत दौरे के बाद बातचीत तेज हुई है. वियतनाम चाहता है कि भारत उसकी समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करे.  सूत्रों के माने तो यह डील अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इसकी कीमत करीब 5,800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर यह समझौता होता है तो वियतनाम ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बनेगा. इससे पहले फिलीपींस और इंडोनेशिया यह मिसाइल खरीद चुके हैं. फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर की डील की थी. वहीं इंडोनेशिया ने इस साल 340 मिलियन डॉलर से ज्यादा की डील को अंतिम रूप दिया.

ब्रह्मोस की खासियत 

अगर ब्रह्मोस मिसाइल की बात करें तो यह आवाज की रफ्तार से लगभग तीन गुना तेज उड़ान भर सकती है. यह 290  किलोमीटर तक निशाना साध सकती है. दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ विवाद को देखते हुए यह मिसाइल वियतनाम की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी. भारत ने वियतनाम को तकनीकी सहयोग का भी प्रस्ताव दिया है. इसमें सुखोई -30 फाइटर जेट और किलो क्लास पनडुब्बियों की मरम्मत और अपग्रेड शामिल है. वियतनाम ने ये सभी प्लेटफॉर्म पहले रूस से खरीदे गए थे. भारत इनके रखरखाव में मदद कर सकता है. भारत की कोशिश रक्षा सौदों को लंबे रणनीतिक साझेदारी में बदलने की है.

दक्षिण कोरिया में रक्षा तकनीक पर जोर

वही दक्षिण कोरिया को सियोल में राजनाथ सिंह रक्षा उद्योग और नई तकनीकों पर चर्चा करेंगे. 20 अप्रैल 2026 को भारत और दक्षिण कोरिया की शिखर बैठक में नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था. इसका नाम है KIND-X यानी Korea-India Defence Accelerator. इस मंच का मकसद दोनों देशों की रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप, निवेशकों और विश्वविद्यालयों को जोड़ना है.

दोनों देश मिलकर ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मटेरियल जैसी तकनीकों पर काम करेंगे.  यह मॉडल K9 वज्र होवित्जर प्रोजेक्ट से प्रेरित है. भारत और दक्षिण कोरिया पहले से इस तोप का संयुक्त निर्माण कर रहे हैं. अब दोनों देश इसी मॉडल को भविष्य की सैन्य तकनीकों में लागू करना चाहते हैं. इसके अलावा भारत दक्षिण कोरिया को शिप बिल्डिंग तकनीक का भी लाभ लेना चाहता है. हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया दुनिया के बड़े हथियार निर्यातकों में उभरा है. उसने पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कई देशों के साथ अरबों डॉलर के रक्षा सौदे किए हैं.

भारत अब आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाना चाहता है। ऐसे में दक्षिण कोरिया का अनुभव भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है. वही फिलीपींस, इंडोनेशिया और अब वियतनाम वो देश है जिनसे चीन के रिश्ते बहुत अच्छे नही रहें हैं. ये सब देश दक्षिण चीन सागर में चीन के दबदबे से आतंकित है. ऐसे में जब इन देशों के पास ब्रहोम्स जैसे खतरनाक मिसाइल आ जाएगा तो यह देश रणनीतिक तौर पर काफी मजबूत हो जाएंगे.

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