- ईरान और चीन के बीच CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल की खरीद पर समझौता अंतिम चरण में है.
- ये मिसाइलें अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने में सक्षम और इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हैं.
- ईरान सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम और एंटीसैटेलाइट हथियार भी खरीद रहा है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और चीन के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता लगभग फाइनल होने की खबर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान चीन से ऐसी सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें खरीदने जा रहा है, जो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तक को निशाना बनाने में सक्षम हैं. यह तब हो रहा है जब इस क्षेत्र में अमेरिका दशकों का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुका है और ईरान पर कार्रवाई की धमकी दे रहा है.
12 दिन की इजरायल-ईरान जंग के बाद तेज हुई बातचीत
पिछले दो वर्षों से जारी बातचीत को जून में हुई 12 दिन की इजरायल-ईरान झड़प के बाद अचानक गति मिली है. 1980 के दशक में चीन ईरान का बड़ा हथियार सप्लायर था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते यह साझेदारी कम हो गई थी.
CM-302 मिसाइल डील लगभग तैयार

रॉयटर्स के अनुसार, ईरान और चीन के बीच चाइनीज CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल की खरीद पर समझौता अंतिम चरण में है. हालांकि अभी तक मिसाइलों की डिलीवरी को लेकर कोई तारीख तय नहीं हुई है. इसके अलावा ईरान चीनी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, MANPADS, एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम और एंटी-सैटेलाइट वेपन्स की खरीद पर भी बातचीत कर रहा है.
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क्या है CM-302 मिसाइल?
- 290 किलोमीटर रेंज
- सुपरसोनिक स्पीड
- समुद्री सतह के बेहद करीब उड़ान
- जहाजों की एयर डिफेंस चकमा देने में सक्षम
- एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबोने की क्षमता
हथियार विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल गेमचेंजर साबित हो सकती है. इजरायली विश्लेषक डैनी सिट्रीनॉविज के मुताबिक, यह मिसाइलें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है और ईरान को भारी सामरिक बढ़त देंगी.
UN प्रतिबंधों की अनदेखी?
CM-302 मिसाइलें चीन द्वारा ईरान को दिए जाने वाले सबसे उन्नत हथियारों में होंगी. यह कदम उन हथियार प्रतिबंधों को चुनौती देता है जो 2006 में UN द्वारा लगाए गए थे, जिन्हें 2015 में परमाणु समझौते के तहत निलंबित किया गया था लेकिन 2025 में फिर से लागू कर दिए गए.
अचानक क्यों बदल रहे समीकरण?
यह सौदा ईरान-चीन सैन्य रिश्तों को और मजबूत कर सकता है, जिससे अमेरिका की ईरान को दबाने की रणनीति जटिल हो जाएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, चीन नहीं चाहता कि ईरान में कोई पश्चिमी शासन स्थापित हो क्योंकि इससे उसके हितों को नुकसान हो सकता है.
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि भले ही चीन अभी मिसाइल न भेजे, सिर्फ इस चर्चा से ही अमेरिका के रणनीतिक प्लान में असमंजस पैदा करना संभव है.
अमेरिका की प्रतिक्रिया
पिछले वर्ष अमेरिका ने कई चीनी संस्थाओं पर पाबंदी लगाई थी, यह आरोप लगाते हुए कि वे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को सामग्री भेज रही थीं. चीन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह निर्यात नियंत्रण का सख्त पालन करता है.
इसी बीच, पूर्व US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 फरवरी को ईरान को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि 10 दिनों में परमाणु समझौते पर बात न हुई तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी.
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